
कर्नाटक के गांव में नींव खोदते वक्त मिला सोना, ASI के अधिकारियों ने बताई 'खजाने' की सच्चाई
कर्नाटक के एक गांव में मकान की नींव खोदते वक्त सोने के गहने मिले थे। एएसआई की टीम ने दौरा किया और कहा कि यह कोई खजाना नहीं है बल्कि पहले के लोग अपने धन को ऐसे ही छिपा दिया करते थे।
कर्नाटक के गडग में अपनी वास्तुकला विरासत के लिए मशहूर गांव लक्कुंडी में एक घर के विस्तार के लिए नींव खोदते समय मिला सोना 'खजाना नहीं है'। एएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) धारवाड़ सर्कल के वरिष्ठ पुरातत्वविद् रमेश मुलिमानी ने सोने से भरा तांबे का बर्तन मिलने के एक दिन बाद उस जगह का दौरा किया।
मुलिमानी ने कहा, 'यह कोई खजाना नहीं है... यहां से मिले कई गहने टूटे हुए हैं। वे घर के किचन में मिले थे। पहले, हमारे पूर्वज गहनों को किचन के चूल्हे के पास गाड़कर छिपाते थे... यह पहले एक चलन था और अब जो मिला है, वह भी वैसा ही लगता है।' उन्होंने कहा, 'गहने कितने पुराने है इसका पता लगाना जरूरी है। कई टूटे हुए हैं। अगर सिक्के मिलते, तो हम अंदाजा लगा पाते कि वे किस समय के थे।'
उन्होंने कहा कि सोने को अब राजकोष में सुरक्षित रखा गया है। सरकार ने 470 ग्राम सोने को अपने कब्जे में ले लिया है जिसमें हार, चूड़़ी और झुमके जैसे अलग-अलग तरह के गहने शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, आठवीं कक्षा के एक छात्र ने तांबे के बर्तन में गहने देखे।
पुलिस अधीक्षक (एसपी) रोहन जगदीश ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा, 'लड़के ने ईमानदारी से गांव के बड़े-बुजुर्गों को बताया। जानकारी मिलते ही अलग-अलग विभाग के अधिकारी और जांच करने वाले मौके पर पहुंचे। बर्तन में 22 चीजें रखी थीं, जिन्हें कब्जे में ले लिया गया है।'

लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
और पढ़ें



