गोवा चुनाव से पहले सियासी खेल, AAP-GFP ने मिलाया हाथ; गठबंधन का नाम- गोवा फर्स्ट
आम आदमी पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने रविवार को 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन की घोषणा की। दोनों पार्टियों ने इस गठबंधन का नाम ‘गोवा फर्स्ट’ रखा है। अरविंद केजरीवाल और विजय सरदेसाई ने कहा कि यह गठबंधन भाजपा और कांग्रेस के अलावा तीसरा विकल्प देगा।

्आाम आदमी पार्टी (AAP) और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) ने रविवार को 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव पूर्व गठबंधन की घोषणा की। इस गठबंधन का नाम ‘गोवा फर्स्ट’ रखा गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और जीएफपी नेता विजय सरदेसाई ने कहा कि दोनों पार्टियां मिलकर चुनाव लड़ेंगी। केजरीवाल ने कहा कि यह गठबंधन भाजपा और कांग्रेस के अलावा तीसरा विकल्प देगा।
इससे पहले केजरीवाल शनिवार को गोवा पहुंचे थे। उन्होंने कहा था कि वे बड़ी घोषणा करने आए हैं। उनके आने से पहले राज्य में आप और जीएफपी के पोस्टर लगे थे। इनमें लिखा था कि कांग्रेस और भाजपा ने दो बार धोखा दिया है, तीसरी बार धोखा न देने दें। शनिवार को जीएफपी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक भी हुई। पार्टी ने फैसला किया कि फरवरी 2027 के चुनाव में भाजपा का मुकाबला करने के लिए समान सोच वाली धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के साथ गठबंधन किया जाएगा।
बता दें कि कांग्रेस भी जीएफपी से बात कर रही थी, लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, आप और जीएफपी के नेताओं ने कहा कि बड़े विपक्षी गठबंधन बनाने में देरी के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि बाद में अन्य पार्टियां भी जुड़ सकती हैं, लेकिन चुनाव के आखिरी महीनों तक इंतजार नहीं किया जा सकता।
बता दें कि इस गठबंधन की ताकत फिलहाल कुछ खास नहीं है। जीएफपी के पास एक विधायक हैं विजय सरदेसाई, जो फातोर्डा से चुनाव जीते थे। जीएफपी पूर्व उपमुख्यमंत्री सरदेसाई के नेतृत्व वाला क्षेत्रीय दल है। शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में जीएफपी ने कहा था कि हमारा संदेश साफ है- गोवा सबसे पहले। पार्टी से पहले, राजनीति से पहले और निजी महत्वाकांक्षाओं से भी पहले। गोवा सबसे पहले।
वहीं आप के पास दो विधायक हैं (बेनौलिम से वेंजी वियेगास और वेलिम से क्रूज सिल्वा) दोनों दक्षिण गोवा से हैं। 2022 के चुनाव में 40 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी और 20 सीटें जीती। कांग्रेस ने 11 सीटें जीती थीं, लेकिन बाद में आठ विधायक भाजपा में चले गए। अब कांग्रेस के पास तीन विधायक हैं। 2019 में भी दस कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे।


