जल प्रलय का 'टाइम बम' बनीं ग्लेशियल झीलें, भारत में भी मच सकती है भारी तबाही

हिन्दुस्तान टीम
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वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत पर भी नेपाल जैसी जल प्रलय का खतरा मंडरा रहा है. हिमाचल और तिब्बत सहित ट्रांस हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियल झीलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 

Glacial Lake
ग्लेशियर के टूटने या पिघलने से बनने वाली झीलों को ग्लेशियल झील कहते हैं

प्रभात कुमार

जलवायु परिवर्तन की वजह से सतलुज नदी के कैचमेंट एरिया जिसमें हिमाचल प्रदेश और तिब्बत सहित ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र शामिल हैं। यहां ग्लेशियल झीलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2023 में ग्लेशियल झीलों की संख्या 1048 थी, वर्ष 2019 में यह आंकड़ा 560 था। सतलुज बेसिन में ग्लेशियल झीलों, खासकर मोरेन-डैम वाली झीलों के बढ़ने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) से निचले इलाकों में भीषण तबाही मच सकती है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में पेश रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद द्वारा किए गए अध्य्यन का हवाला देते हुए सतलुज नदी के कैचमेंट एरिया में ग्लेशियल झीलों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी को स्वीकार किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि झीलें फटती हैं तो निचले इलाकों में बाढ़ आ सकती है, बस्तियों, पनबिजली परियोजनाओं, सड़कों और अन्य जरूरी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हो सकता है। यहां तक की हिमाचल प्रदेश तथा उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में लोगों की जान को भी खतरा हो सकता है।

खतरों की पहचान कर लागू हो रहे उपाय

एनडीएमए ने एनजीटी से कहा कि संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के उपक्रमों के साथ मिलकर भारतीय हिमालयी क्षेत्र में झील फटने से आने वाली बाढ़ के खतरों की पहचान, निगरानी, XXआकलन और उन्हें कम करने के लिए एक व्यापक संस्थागत ढांचा तैयार किया है। इसे लागू भी किया जा रहा। अक्टूबर 2023 में सिक्किम की साउथ ल्होनक झील से आई विनाशकारी गलेशियल झील फटने से बाढ़) घटना ने आपदा जोखिम कम करने के तरीकों को मजबूत करने की जरूरत को उजागर किया।

ग्लेशियर और ग्लेशियल में अंतर

ग्लेशियर एक भौगोलिक संरचना है। यह पहाड़ों या ध्रुवीय क्षेत्रों में लंबे समय तक जमा हुई बर्फ का विशाल और मोटा भंडार होता है, जो अपने भार और गुरुत्वाकर्षण के कारण बहुत धीमी गति से नीचे की ओर खिसकता है। इसे हिमनद भी कहते हैं। हिमालय में स्थित गंगोत्री एक ग्लेशियर है। इसी तरह ग्लेशियल झील को हिमनदीय झील कहते हैं। इसका निर्माण ग्लेशियर की गतिविधियों या उसके पिघलने से होता है।

Nepal Flood

एनडीएमए ने पांच प्रमुख सुझाव दिए

अतिरिक्त संवेदनशील नदी बेसिनों में राष्ट्रीय ग्लोफ जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम का तेजी से विस्तार और कार्यान्वयन, जिसमें सतलुज बेसिन जैसी सीमा-पार नदी प्रणालियों पर विशेष जोर दिया जाए। हिमालयी राज्यों में बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं की योजना, मूल्यांकन और अनुमोदन प्रक्रियाओं में ग्लोफ के खतरों और जोखिमों के व्यापक आकलन को अनिवार्य रूप से शामिल करें।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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