14 साल में बच्ची को नहीं मिला ऑपरेशन का नंबर, AIIMS में मौत; पिता ने शव लेने से किया इनकार
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मंगलवार तड़के लगभग 2:50 बजे बच्ची ने थकान और कमजोरी की शिकायत की। उसका ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिरकर 48 प्रतिशत पर पहुंच गया और शरीर में ऑक्सीजन की कमी से शरीर नीला पड़ने लगा।

देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS, New Delhi) में देश के कोने-कोने से मरीज एक बेहतर इलाज का आशा लिए आते हैं। राजस्थान के कोटा से भी 2 साल की मासूम तन्वी को लिए परिजन इसी उम्मीद के साथ आज से करीब 14 साल पहले यानी कि 2012 में पहुंचे थे। इसकी उम्र अब करीब 16 साल हो चुकी थी। मंगलवार तड़के उसकी मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही और सही जानकारी न देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची की स्थिति बेहद जटिल थी और उसे बचाने के तमाम प्रयास किए गए थे।
राजस्थान के कोटा की रहने वाली तन्वी को मात्र दो साल की उम्र में वर्ष 2012 में एम्स लाया गया था। जांच के दौरान उसमें जन्माजात हृदय रोग (वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट यानी दिल में छेद और पल्मोनरी एट्रेसिया) पाया गया था। वर्ष 2014 के एम्स के दस्तावेजों के अनुसार, डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह दी थी और इसके लिए अनुमानित खर्च 1.2 लाख रुपये बताया गया था।
तन्वी के पिता मुकेश पारियानी के अनुसार, वे पिछले 13 वर्षों से अपनी बेटी के इलाज के लिए एम्स के चक्कर काट रहे थे। 2015 में सर्जरी की तारीखें तय की गईं, लेकिन किसी न किसी वजह से प्रक्रिया को टाल दिया गया और अंततः ऑपरेशन कभी नहीं हो सका। समय बीतने के साथ बच्ची की स्थिति और अधिक गंभीर होती चली गई।
डॉक्टरों ने कहा- सर्जरी संभव नहीं थी
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एम्स के कार्डियो थोरैसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वी. देवागुरु का कहना है कि 2013 में बच्ची की रिपोर्ट देखने के बाद 2018 में बच्ची की शारीरिक संरचना की जटिलता के कारण सर्जरी की संभावना को खारिज कर दिया गया था। जांच में पाया गया था कि फेफड़ों को रक्त आपूर्ति करने वाली मुख्य धमनियां नहीं थीं। ऐसी स्थिति में सर्जरी करना जानलेवा हो सकता था। इसके बाद से तन्वी का दवाओं के जरिए इलाज किया जा रहा था। हाल ही में 24 अगस्त को उसे हृदय और फेफड़े ट्रांसप्लांट के मूल्यांकन के लिए एम्स में भर्ती कराया गया था। ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया के तहत सोमवार शाम को उसकी एंडोस्कोपी की गई थी।
कार्डियक अरेस्ट से हुई मौत
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मंगलवार तड़के लगभग 2:50 बजे बच्ची ने थकान और कमजोरी की शिकायत की। उसका ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिरकर 48 प्रतिशत पर पहुंच गया और शरीर में ऑक्सीजन की कमी से शरीर नीला पड़ने लगा। तड़के 3:30 बजे उसे ऑक्सीजन दी गई, लेकिन हाइपोक्सिक स्पेल के कारण उसे कार्डियक अरेस्ट आया। डॉक्टरों ने उसे बचाने
साजिश के आरोप और जांच की मांग
तन्वी के पिता मुकेश पारियानी ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सोमवार शाम एंडोस्कोपी के बाद से ही बच्ची की हालत बिगड़ने लगी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टर लगातार दस्तावेजों की मांग करते रहे और उन पर डिस्चार्ज लेने का दबाव भी बनाया गया। पिता का कहना है कि उन्हें बच्ची की मौत का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया है। मुकेश पारियानी ने मामले में साजिश की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। अपनी इन्हीं मांगों के चलते उन्होंने फिलहाल अस्पताल से बच्ची का शव लेने से इनकार कर दिया है।


