
नेहरू ने कश्मीर को गिरवी रखा, ब्रिटिशों के सामने सरेंडर किया; गिरिराज सिंह का आरोप
गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी से नेहरू के इन कार्यों के लिए राष्ट्र से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने नेहरू और अंतिम वायसराय माउंटबेटन की पत्नी एडविना माउंटबेटन की तस्वीरें दिखाते हुए दावा किया कि ये फोटो सब कुछ साफ करती हैं।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नेहरू ने अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कश्मीर को गिरवी रख दिया और ब्रिटिशों के सामने सरेंडर कर दिया। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से नेहरू के इन कार्यों के लिए राष्ट्र से माफी मांगने की मांग की। गिरिराज सिंह ने नेहरू और अंतिम वायसराय माउंटबेटन की पत्नी एडविना माउंटबेटन की तस्वीरें दिखाते हुए दावा किया कि ये फोटो सब कुछ स्पष्ट करती हैं।
गिरिराज सिंह ने कहा कि नेहरू ने डॉ. बीआर आंबेडकर की हार पर जश्न मनाया था। यह बयान संसद के बजट सत्र के दौरान आया, जहां राजनीतिक बहस तेज चल रही है। यह टिप्पणी विपक्षी सांसदों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर अमेरिका के साथ घोषित अंतरिम व्यापार समझौते को समर्पण बताने के जवाब में आई है। विपक्षी दलों के सांसदों ने मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरों वाला पोस्टर लेकर लिखा था, 'नरेंद्र सरेंडर?' और राष्ट्र की नजरों में सरकार को चुनौती दी।
विपक्षी दलों का क्या है आरोप
विपक्ष भारत की संप्रभुता, किसानों की सुरक्षा और रूस से छूट पर तेल खरीदने पर चिंता जता रहा है। वे संसद के बजट सत्र में इस व्यापार समझौते पर चर्चा की मांग कर रहे हैं। गिरिराज सिंह के बयान को विपक्षी हमलों का पलटवार माना जा रहा है, जहां वे नेहरू युग की नीतियों को कश्मीर मुद्दे से जोड़कर कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं। अमेरिका-भारत अंतरिम व्यापार समझौते के अनुसार, भारत से आने वाले सामानों पर यूएस 18 प्रतिशत टैरिफ लागू करेगा। इसमें कपड़ा, चमड़ा, प्लास्टिक, रबर, कार्बनिक रसायन, घरेलू सजावट और कुछ मशीनरी शामिल हैं।
अमेरिका से डील पर हंगामा
व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया कि भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने का वादा किया है और अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा। साथ ही दोनों देश अगले 10 वर्षों में रक्षा सहयोग बढ़ाएंगे। हालांकि, भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा नीति में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहेगा। साथ ही, उपलब्धता, उचित मूल्य और आपूर्ति की विश्वसनीयता मुख्य आधार होंगे। यह विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बन गया है, जहां सत्ताधारी दल नेहरू की नीतियों को कश्मीर और ब्रिटिश संबंधों से जोड़कर कांग्रेस को घेर रहा है।





