Hindi NewsIndia NewsGeneral Upendra Dwivedi on Shaksgam Valley row Pakistan China 1963 agreement is illegal
चीन-पाकिस्तान के बीच 1963 का समझौता अवैध, शक्सगाम घाटी विवाद पर बोले आर्मी चीफ

चीन-पाकिस्तान के बीच 1963 का समझौता अवैध, शक्सगाम घाटी विवाद पर बोले आर्मी चीफ

संक्षेप:

शक्सगाम घाटी पर चीन के दावे के बीच भारतीय सैन्य प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का बयान है। जनरल द्विवेदी ने कहा कि जहां तक शक्सगाम घाटी की बात है, भारत 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच समझौते को अवैध मानता है।

Jan 13, 2026 05:39 pm ISTDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share Share
Follow Us on

शक्सगाम घाटी पर चीन के दावे के बीच भारतीय सैन्य प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का बयान है। जनरल द्विवेदी ने कहा कि जहां तक शक्सगाम घाटी की बात है, भारत 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच समझौते को अवैध मानता है। ऐसे में शक्सगाम घाटी में किसी भी तरह की गतिविधि को हम स्वीकार नहीं करते। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने पहले ही इसको लेकर बयान जारी कर दिया है। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आगे कहा कि चीन में जारी हुए संयुक्त बयान को हम स्वीकार नहीं करते हैं। शक्सगाम घाटी में चीन और पाकिस्तान की किसी भी गतिविधि को हम गैरकानूनी मानेंगे।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा था
गौरतलब है कि शक्सगाम घाटी पर चीन के दावे पर भारत ने शुक्रवार को चीन की विकास परियोजनाओं की आलोचना की। भारत ने कहा कि चूंकि यह भारतीय क्षेत्र है, इसलिए वह अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक उपाय करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि शक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है। हमने 1963 में हस्ताक्षरित तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है। हम लगातार यह कहते आए हैं कि यह समझौता अवैध और अमान्य है। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने 1963 में अवैध रूप से शक्सगाम घाटी स्थित 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र को चीन को सौंप दिया था, जो उन क्षेत्रों का हिस्सा था जिन पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा था।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

चीन ने फिर दोहराया दावा
वहीं, चीन ने सोमवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में शक्सगाम घाटी पर अपने दावे को दोहराते हुए कहा कि यह इलाका चीन का है और चीन को अपने क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का निर्माण करने का पूरा अधिकार है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक में एक सीमा समझौता किया था और दोनों देशों के बीच सीमा तय की थी, जो संप्रभु देशों के रूप में चीन और पाकिस्तान का अधिकार है। उन्होंने कहा कि चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) कश्मीर पर बीजिंग की स्थिति को प्रभावित नहीं करते हैं, जो अपरिवर्तित बनी हुई है।

क्या है विवाद
शक्सगाम घाटी, या ट्रांस काराकोरम ट्रैक्ट पीओके के हुंजा-गिलगिट क्षेत्र का हिस्सा है और पाकिस्तान के कब्जे में मौजूद भारतीय क्षेत्र है। इसकी सीमा उत्तर में चीन के शिनजियांग प्रांत, दक्षिण और पश्चिम में पीओके के उत्तरी क्षेत्रों और पूर्व में सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र से लगती है। इसे 1963 में पाकिस्तान ने चीन को सौंप दिया था, जब दोनों देशों ने एक सीमा समझौता किया था। इस समझौते ने काराकोरम राजमार्ग की नींव रखी, जिसे 1970 के दशक में चीनी और पाकिस्तानी इंजीनियरों ने मिलकर बनाया था। खबरों के मुताबिक, चीन शक्सगाम घाटी में एक सड़क बना रहा है। रिपोर्ट्स की मानें तो 75 किलोमीटर लंबी सड़क पहले ही बन चुकी है।

Deepak Mishra

लेखक के बारे में

Deepak Mishra
दीपक मिश्र मीडिया इंडस्ट्री में करीब 17 साल का अनुभव रखते हैं। खेल, सिनेमा और राजनीति पर प्रमुखता से काम किया है। खासतौर पर खेल की खबरों से जुनून की हद तक मोहब्बत है। 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप और 2014 में फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप प्रमुखता से कवर कर चुके हैं। फोटोग्राफी और मोबाइल वीडियो स्टोरी के साथ-साथ पॉडकास्ट में विशेष रुचि रखते हैं। दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट के साथ काम करते हुए कई वीडियो स्टोरीज पर काम किया। इसी दौरान आईपीएल पर पॉडकास्ट के साथ एक अन्य पॉडकास्ट ‘शहर का किस्सा’ भी कर चुके हैं। पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद आज अखबार के साथ पत्रकारिता की शुरुआत हुई। इसके बाद दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट और पत्रिका अखबार में काम किया है। आई नेक्स्ट की डिजिटल विंग में काम करते हुए कई नए और रोचक प्रयोग किए। लाइव हिन्दुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रहे हैं। और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।