गैस कनेक्शन के नाम पर चल रहा है तगड़ा स्कैम, इस App से बचकर रहिए
एक ऐप के जरिए लाखों के फ्रॉड को अंजाम दिया जा रहा है। अगर आपके पास भी गैस कनेक्शन को बंद करने की चेतावनी का मैसेज या कॉल आया है, तो सतर्क हो जाएं। साथ ही फोन में किसी भी अनधिकृत सोर्स से ऐप डाउनलोड न करें।

गैस कनेक्शन के फर्जी अपडेट या बकाया बिल के नाम पर लोगों को ठगने का नया तरीका जलसाजों ने खोजा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इस स्कैम के कई मामले सामने आ चुके हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि महज चार मामलों में ही मासूम जनता 46 लाख रुपये से ज्यादा की बैंक में जमा पूंजी गंवा चुकी है। धोखेबाज महज ऐप इंस्टॉल करने की बात कहकर इस स्कैम को अंजाम दे रहे हैं। विस्तार से समझते हैं पूरी बात।
लखनऊ का पॉश इलाका माने जाने वाले गोमती नगर में 67 साल के बुजुर्ग ने बैंक में जमा 31.84 लाख रुपये धीरे-धीरे गंवा दिए। इसके अलावा 88 वर्षीय को भी 5 लाख का चूना लग चुका है। ऐसे ही धोखेबाजी का शिकार हुए पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है, जो गैस कनेक्शन के फर्जी मैसेज के झांसे में आकर अपने लाखों गंवा चुके हैं। उनकी गलती बस इतनी थी कि जालसाजों के कहने पर ऐप डाउनलोड कर ली।
पहले बचने का उपाय जान लें
ऐसे पहचान स्कैम- अगर आपके पास फोन या मैसेज आए कि आपका ग्रीन गैस कनेक्शन आज बंद हो जाएगा, तो परेशान न हों। सुनिश्चित करें कि आप उस कॉल पर किसी भी तरह की जानकारी न दें और मैसेज है तो रिप्लाई न करें। अगर आपसे किसी भी तरह की ऐप को डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है, तो सतर्क हो जाएं और ऐसा बिल्कुल न करें।
आपको क्या करना है- सबसे पहले कंपनी के ऑफिशियल नंबर पर बात करें। आमतौर पर ये नंबर टोल फ्री होते हैं और बिल पर भी दर्ज होते हैं। अगर बात नहीं कर पा रहे हैं, तो नजदीकी दफ्तर तक पहुंचें।
क्या है ऐप का खेल
धोखेबाज खुद को ग्रीन गैस का अधिकारी बताते हैं। इसके बाद ग्राहकों से कहा जाता है कि उनका गैस कनेक्शन अपडेट नहीं है या बकाया भुगतान के चलते उनका कनेक्शन कट सकता है। यहां से झूठे डर और बचाव के नाम पर डिजिटल लूट का खेल शुरू हो जाता है। पीड़ितों को व्हाट्सएप के जरिए Meter Update.apk नाम से फाइल भेजी जाती है और इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है।
ऐप के चक्कर में फंसकर लाखों गंवा दिए
क्राइम ब्रांच का कहना है, 'साइबर सेल की तरफ से 4 मामलों की पहचान की गई है। इनमें पीड़ितों को कुल मिलाकर लगभग ₹46.48 लाख का नुकसान हुआ है; इनमें से एक 67 वर्षीय व्यक्ति ने तीन बैंक खातों से 25 ट्रांजैक्शन के जरिए 31.84 लाख रुपये गंवा दिए।' एडीसीपी किरण यादव बताती हैं, 'यह खतरनाक ऐप एक बार इंस्टॉल हो जाने पर ठगों को पीड़ित के फोन का रिमोट एक्सेस दे सकता है, जिससे वे बैंक खातों की जानकारी चुराकर पैसे उड़ा सकते हैं।'
गोमती नगर मामले में पीड़ित को 7 सितंबर को फोन आया था और अपराधी ने खुद को ग्रीन गैस का कर्मचारी बताया था। उन्हें बताया गया कि गैस बिल बकाया है और एक एपीके फाइल भेजी गई। बुजुर्ग ने ऐप इंस्टॉल कर ली। इसे बाद 25 बार हुए अलग-अलग लेन देन में कुल 31 लाख 84 हजार रुपये साफ कर दिए गए।
कानपुर रोड पर भी ठीक इसी तरह की धोखाधड़ी हुई। उन्हें गैस सप्लाई बंद करने की चेतावनी के साथ एपीके फाइल भेजी गई थी और महज 13 रुपये मांगे गए थे। जैसे ही उन्होंने एप डाउनलोड की, तो उनके पीएनबी खाते से 6 लाख 38 हजार रुपये उड़ गए। उनके खाते में खुल 13 बार लेन देन हुए। एक अन्य मामले में 88 साल के बुजर्ग को भी ऐप भेजकर 3 लाख 25 हजार रुपये उड़ा लिए गए।
कैसे ले लेते हैं भरोसे में
इस दौरान सबसे बड़ी मुश्किल इन जालसाजों की पहचान करना है। खबर है कि साइबर अपराधी ग्राहक की पहले से ही लीक हो चुकी जानकारी का इस्तेमाल करते हैं। बात करने के दौरान उन जानकारियों का जिक्र किया जाता है, जिससे पीड़ित को लगता है कि वह किसी अधिकृत व्यक्ति से ही बात कर रहे हैं। पुलिस ने इसके खिलाफ ऑपरेशन डिजिटल कवच की शुरुआत की है।


