
गगनयान मिशन के लिए इसरो को एक और कामयाबी, क्या है ड्रॉग पैराशूट; कैसे करेगा काम
गगनयान मिशन को लेकर इसरो को एक और अहम कामयाबी मिली है। इसरो के गगनयान चालक दल मॉड्यूल के वास्ते गति-मंदन प्रणाली विकसित करने के लिए ड्रोग पैराशूट का श्रृंखलाबद्ध मानक परीक्षण सफल रहा है।
गगनयान मिशन को लेकर इसरो को एक और अहम कामयाबी मिली है। इसरो के गगनयान चालक दल मॉड्यूल के वास्ते गति-मंदन प्रणाली विकसित करने के लिए ड्रोग पैराशूट का श्रृंखलाबद्ध मानक परीक्षण सफल रहा है। यह जानकारी अंतरिक्ष एजेंसी ने शनिवार को दी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि ये परीक्षण 18 और 19 दिसंबर को चंडीगढ़ में टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (टीबीआरएल) की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (आरटीआरएस) इकाई में पूरे किए गए। एजेंसी ने एक बयान में कहा कि गगनयान क्रू मॉड्यूल के गति-मंदन प्रणाली में चार तरह के कुल 10 पैराशूट शामिल हैं।
इसरो के अनुसार, अवरोहण क्रम की शुरुआत दो एपेक्स कवर सेपरेशन पैराशूट्स के अलग होने से होती है, जो पैराशूट कक्ष से सुरक्षात्मक आवरण को हटाते हैं। इसके बाद दो ड्रोग पैराशूट खुलते हैं, जो मॉड्यूल को स्थिर करने और उसकी गति को कम करने का कार्य करते हैं। इसरो ने कहाकि ड्रोग पैराशूट खुलने के बाद तीन पायलट पैराशूट्स खुलते हैं, जो तीन मुख्य पैराशूट को बाहर निकालते हैं। ये मुख्य पैराशूट क्रू मॉड्यूल की गति को और कम करते हैं, जिससे सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित होती है।

इसरो के मुताबिक ड्रॉग पैराशूट एक महत्वपूर्ण घटक हैं। इससे पुनः प्रवेश के दौरान गति को सुरक्षित स्तर तक कम करके क्रू मॉड्यूल को स्थिर करने में सहायता करते हैं। इस विशेष परीक्षण श्रृंखला के उद्देश्य के बारे में, इसरो ने कहा कि इन्हें चरम परिस्थितियों में ड्रॉग पैराशूट की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता का मूल्यांकन करने के लिए किया गया था।
इसरो ने कहाकि इन परीक्षणों की सफलतापूर्वक पूर्णता मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए पैराशूट प्रणाली को योग्य बनाने की ओर एक और महत्वपूर्ण कदम है। इसमें विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, इसरो, एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट, डीआरडीओ और टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लैबोरेटरी, डीआरडीओ की सक्रिय सहायता और भागीदारी शामिल है।





