पहले किचेन, अब बेडरूम तक पहुंचा ईरान जंग का असर; कंडोम की किल्लत का खतरा

Mar 31, 2026 10:13 pm ISTDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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ईरान में युद्ध के चलते कई अहम सेक्टर्स पर असर पड़ा है। किचन से लेकर बेडरूम तक इससे प्रभावित हो रहे हैं। एक तरफ होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से एलपीजी गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई पर असर पड़ा है।

पहले किचेन, अब बेडरूम तक पहुंचा ईरान जंग का असर; कंडोम की किल्लत का खतरा

ईरान में युद्ध के चलते कई अहम सेक्टर्स पर असर पड़ा है। किचन से लेकर बेडरूम तक इससे प्रभावित हो रहे हैं। एक तरफ होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से एलपीजी गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई पर असर पड़ा है। वहीं, कई क्रिटिकल पेट्रोकेमिकल्स और लुब्रिकेंट्स की सप्लाई ठप पड़ने से कंडोम इंडस्ट्री भी परेशानी में है। इसका बड़ा नुकसान 860 मिलियन डॉलर वाली भारतीय कंडोम मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री भी प्रभावित हुई है। गौरतलब है कि यह इंडस्ट्री हर साल 400 करोड़ यूनिट से ज्यादा कंडोम बनाती हैं। लेकिन रॉ मटीरियल की कमी के चलते इनकी निर्माण की लागत बढ़ने लगी है। इस समस्या की जद में सरकारी कंडोम निर्माता कंपनी, एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड भी शामिल है। यह कंपनी हर साल करीब 221 करोड़ कंडोम तैयार करती है। वहीं, मैनकाइंड फार्मा लिमिटेड और क्यूपिड लिमिटेड भी सप्लाई चेन प्रभावित होने से परेशान हैं।

ईरान युद्ध का कैसे असर
कंडोम का निर्माण दो महत्वपूर्ण चीजों पर काफी हद तक निर्भर करता है। यह हैं सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया। सिलिकॉन ऑयल एक अत्यंत महत्वपूर्ण लुब्रिकेट है। मिडिल ईस्ट में जंग के चलते इस समय इसी चीज का सबसे ज्यादा कमी है। इससे बाजार में बड़े पैमाने पर अनिश्चितता पैदा हो रही है। अमोनिया कच्चे लेटेक्स को स्थिर रखने के लिए जरूरी है। इसके कीमतों में 40–50 फीसदी इजाफे की उम्मीद है। वहीं, पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती लागत से भी परेशानी बढ़ रही है।

उत्पादन पर पड़ेगा असर
कर्नाटक ड्रग्स और फार्मास्यूटिकल्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के जतिश एन सेठ बताया कि कोई भी सामग्री जिसमें पेट्रोकेमिकल्स शामिल हैं, प्रभावित होगी। उन्होंने कहाकि निश्चित तौर पर हमारे ऊपर असर पड़ा है। अब इस इंडस्ट्री पर पड़ने वाले असर का मूल्यांकन करने की जरूरत है। जतिश ने आगे बताया कि सरकार पहले ही संसाधनों को प्राथमिकता देना शुरू कर चुकी है। 11 मार्च को हुई एक अंतर-मंत्रालयीय बैठक में यह सामने आया कि पेट्रोकेमिकल यूनिट्स के आवंटन में भी कमी आएगी। वजह, इसे उच्च-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए रिजर्व रखा जा रहा है। इसे कंडोम जैसी उत्पादों के निर्माण पर असर पड़ेगा।

बढ़ रही हैं चुनौतियां
इस बारे में कंडोम निर्माता कंपनी के एक अधिकारी ने कहाकि मुख्य इनपुट जैसे पीवीसी फॉइल, एल्युमिनियम फॉइल और पैकेजिंग सामग्री में सप्लाई सीमाओं और कीमतों में अस्थिरता ने उत्पादन को प्रभावित किया है। इसे ऑर्डर भी पूरा करने में मुश्किल आ रही है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अधिकारी ने कहाकि लॉजिस्टिक्स में मुश्किलें आ रही हैं, जिससे चुनौतियां और बढ़ गई हैं। अधिकारी के मुताबिक कंडोम उत्पादन के लिए अमोनिया काफी जरूरी है, इसका दाम 40-50 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। इसके अलावा सिलिकॉन ऑयल का दाम भी काफी बढ़ गया है। इन सारी चीजों से बाजार में अनिश्चितता पैदा हुई है।

फैमिली प्लानिंग पर भी खतरा
इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि इस क्राइसिस से केवल बिजनेस ही प्रभावित नहीं हो रहा है। बल्कि इससे सामाजिक चुनौती भी है। उन्होंने कहाकि पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में कम मार्जिन पर कंडोम तैयार किए जाते हैं। इससे इनकी कीमत काफी कम रखनी पड़ती है, ताकि 140 करोड़ लोगों के लिए कंडोम उपलब्ध कराया जा सके। एक अधिकारी ने कहाकि इसका असर, लाभ पर पड़ता है। हालांकि दाम बढ़ाना एक विकल्प है, लेकिन संभवत: इससे बिक्री में कमी आएगी। लंबे समय में इसका असर यह हो सकता है कि फैमिली प्लानिंग पर नकारात्मक असर पड़ने लगे।

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लेखक के बारे में

Deepak Mishra

मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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