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फ्री हेल्थ चेकअप, सोशल सिक्योरिटी और ग्रैच्युटी... देश में आज से लागू चार नए श्रम कानूनों में क्या?

फ्री हेल्थ चेकअप, सोशल सिक्योरिटी और ग्रैच्युटी... देश में आज से लागू चार नए श्रम कानूनों में क्या?

संक्षेप:

प्रधानमंत्री ने लिखा है कि आज, हमारी सरकार ने चार लेबर कोड लागू कर दिए हैं। यह आज़ादी के बाद से सबसे बड़े और आगे बढ़ने वाले लेबर-ओरिएंटेड सुधारों में से एक है। यह हमारे वर्कर्स को बहुत मज़बूत बनाता है।

Nov 21, 2025 05:04 pm ISTPramod Praveen पीटीआई, नई दिल्ली
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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने आज (शुक्रवार, 21 नवंबर को) एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए चार श्रम संहिताओं (कानूनों) को तत्काल प्रभाव से लागू करने की घोषणा की है। इनके जरिये 29 मौजूदा श्रम कानूनों को तर्कसंगत बनाया गया है। ये चार श्रम संहिताएं हैं- वेतन संहिता, 2019, औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता, 2020।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने इसे आजादी के बाद का सबसे बड़ा श्रम कानून सुधार कहा है। उन्होंने लिखा है, “श्रमेव जयते! आज, हमारी सरकार ने चार लेबर कोड लागू कर दिए हैं। यह आज़ादी के बाद से सबसे बड़े और आगे बढ़ने वाले लेबर-ओरिएंटेड सुधारों में से एक है। यह हमारे वर्कर्स को बहुत मज़बूत बनाता है। यह कम्प्लायंस को भी काफी आसान बनाता है और ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ को बढ़ावा देता है।”

श्रम सुधारों को गति मिलेगी

दूसरी तरफ, केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''चारों श्रम संहिताओं को अधिसूचित कर दिया गया है और अब ये देश का कानून हैं।'' मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि श्रम नियमन को आधुनिक बनाकर, श्रमिकों के कल्याण को बढ़ाकर तथा श्रम परिवेश को बदलते कार्य जगत के साथ जोड़कर यह कदम भविष्य के लिए तैयार कार्यबल और मजबूत उद्योगों की नींव रखता है। बयान में कहा गया कि इससे आत्मनिर्भर भारत के लिए श्रम सुधारों को गति मिलेगी।

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मंत्रालय ने कहा कि भारत के कई श्रम कानून आजादी से पहले और आजादी के शुरुआती दौर (1930 से 1950 के दशक तक) में बनाए गए थे। उस समय अर्थव्यवस्था और कार्य जगत बहुत अलग थे। बयान में आगे कहा गया कि अधिकांश बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने हाल के दशकों में अपने श्रम नियमन को समय के अनुसार बदला है, लेकिन भारत 29 केंद्रीय श्रम कानूनों में बिखरे हुए खंडित, जटिल और पुराने प्रावधानों के साथ काम रहा था।

सोशल सिक्योरिटी की गारंटी

सरकार का दावा है कि ये सिर्फ कानूनी अपडेट नहीं, बल्कि भारत के 40 करोड़ से ज्यादा कामगारों के जीवन में एक ऐतिहासिक क्रांति है। नई श्रम संहिताएं श्रमिकों को ग्रैच्युटी,जॉब लेटर,समय पर न्यूनतम वेतन की गारंटी देती हैं। इसके अलावा श्रमिकों को सोशल सिक्योरिटी और फ्री हेल्थ चेकअप की भी गारंटी देती है। मंत्रालय की विज्ञप्ति में कहा गया है कि नए कानूनों के मुताबिक सभी वर्कर्स को PF, ESIC, इंश्योरेंस और दूसरे सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स मिलेंगे।

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सैलरी देने में न देरी, न मनमानी चलेगी

नए कानूनों के मुताबिक नियोक्ता अब सैलरी देने में देरी और मनमानी नहीं कर पाएंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रमिकों के शोषण की गुंजाइश अब खत्म होगी। युवाओं के लिए जॉब में नियुक्ति पत्र अनिवार्य कर दिया गया है ताकि नौकरी शुरू होते ही उनके अधिकार पक्के हो सकें। नए कानूनों में महिला श्रमिकों के लिए समान वेतन की बात कही गई है।इसके अलावा कार्यस्थलों पर जेंडर बेस्ड भेदभाव पर लगाम लगाने के भी प्रावधान किए गए हैं।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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