सरकार और वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वे दरकिनार कर दिया, बजट पर बोले चिदंबरम
P. Chidambaram criticized Union Budget: पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वित्त मंत्री का भाषण सुनने के बाद ऐसा लगता है कि जैसे की उन्होंने आर्थिक सर्वे को ध्यान से पढ़ा ही नहीं है। अगर पढ़ा भी है, तो ऐसा लगा जैसे उन्होंने उसे पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है।

P. Chidambaram: पू्र्व केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिंदबरम ने केंद्रीय बजट को लेकर वित्त मंत्री पर निशाना साधा है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि सीमारमण ने या तो आर्थिक सर्वेक्षण को ढंग से पढ़ा नहीं है या फिर उसे जानबूझकर दरकिनार कर दिया है। चिदंबरम यहीं नहीं रुके उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री का भाषण और बजट की आर्थिक नीति में दूरदर्शिता की बेहद कमी है।
केंद्रीय बजट को लेकर मीडिया से बात कर रहे चिंदबरम ने सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा, “आज संसद में वित्त मंत्री के भाषण में जो कुछ सुनने को मिला उससे अर्थशास्त्र का हर छात्र अवश्य ही स्तब्ध रह गया होगा। बजट केवल वार्षिक राजस्व और व्यय का बयान भर नहीं होता। मौजूदा परिस्थितियों में बजट भाषण को उन प्रमुख चुनौतियों पर एक स्पष्ट दृष्टिकोण पेश करना चाहिए, जिनका ज़िक्र कुछ दिन पहले जारी किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में किया गया था।” उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण पर चुटकी लेते हुए कहा,"मुझे शक है कि सरकार और वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण पढ़ा भी है या नहीं अगर उन्होंने पढ़ा है, तो ऐसा लगता है कि उन्होंने उसे पूरी तरह से दरकिनार करने का फैसला कर लिया है।"
भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां: चिंदबरम
पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय तमाम चुनौतियों से जूझ रही है, लेकिन वित्त मंत्री ने अपने भाषण में किसी भी चुनौती पर बात नहीं की। उन्होंने कहा, "अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, सकल स्थिर पूंजी निर्माण (लगभग 30 प्रतिशत) का कम स्तर और निजी क्षेत्र की पैसा लगाने में निवेशकों की हिचकिचाहट, भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रवाह को लेकर अनिश्चितता और पिछले कई महीनों से विदेशी निवेश का बाहर जाना, राजकोषीय घाटा बढ़ना, लाखों एमएसएमई का बंद होना, युवाओं में बेरोजगारी, बढ़ता शहरीकरण और शहरी क्षेत्रों (नगरपालिकाओं और नगर निगमों) में बिगड़ता बुनियादी ढांचे जैसी कई चुनौतियां हैं। लेकिन उन्होंने इनमें से किसी पर भी बात नहीं की।"
योजनाओं, कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाती जा रहीं वित्तमंत्री: चिंदबरम
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, "बजट भाषण की सबसे गंभीर आलोचना यह है कि वित्त मंत्री योजनाओं, कार्यक्रमों, मिशन, संस्थानों, पहल, कोष, समितियों आदि की संख्या बढ़ाते जाने से थकती नहीं हैं। मैंने इसको लेकर कम से कम 24 की गिनती की है। मैं आपकी कल्पना पर छोड़ता हूं कि इनमें से कितने अगले साल तक भुला दिए जाएंगे और गायब हो जाएंगे।"
इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बजट में तमिलनाडु को ज्यादा फायदा न मिलने की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने बार-बार तमिलनाडु को खारिज किया है और राज्य में भाजपा की कोई हैसियत भी नहीं है।

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Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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