
एमके स्टालिन की डीएमके में पहली बार टॉप पोजीशन पर ब्राह्मण चेहरा, जानें कौन हैं वी मैत्रेयन
संक्षेप: शायद पहली बार है कि डीएमके के इतने शीर्ष पद पर किसी ब्राह्मण चेहरे को बैठाया गया है। डीएमके हिंदुत्व और ब्राह्मणों के खिलाफ ही रहती है और नास्तिकता की विचारधारा पर चलती है। वी मैत्रेयन ने इसी साल डीएमके जॉइन की थी।
डीएमके ने पहली बार किसी ब्राह्मण चेहरे को पार्टी में बड़ा पद दिया ह। एमके स्टालिन की पार्टी में डॉ. वी मैत्रेयन को वाइस प्रेसिडेंट बनाया गया है। वी मैत्रेयन राज्यसभा के पू्र्व सांसद हैं और इसी साल डीएमके में शमिल हुए थे। बता दें कि डीएमके की विचारधारा नास्तिक और ब्राह्मणविरोधी मानी जाती है। इसलिए ऐसे बहुत कम ही ब्राह्मण हैं जो कि डीएमके में किसी पद पर हैं।

मैत्रेयन के अलावा वीपी रमन ऐसे शख्स थे जो कि डीएमके में शीर्ष पदाधिकारियों में शामिल रहे। वीपी रमन तमिलनाडु में एमजी रामचंद्रन के कार्यकाल में ऐडवोकेट जनरल थे। वह 1957 से चार साल डीएमके के भी सदस्य थे। बता दें कि मैत्रेयन ने अपना राजनीतिक सफर बीजेपी से शुरू किया था। इसके बाद जयललिता के समय में एआईएडीएमके में शामिल हो गए। जयललिता के निधन के बाद मैत्रेयन और पूर्व डीजीपी नटराजन जैसे चेहर एक बार फिर एआईएडीएमके से अलग हो गए।
डॉ. मैत्रेयन एक ऑन्कोलॉजिस्ट हैं। मैत्रेयन ने कहा कि 2026 में एमके स्टालिन की जीत के लिए वह अथक मेहनत करेंगे। बता दें कि डीएमके के संविधान में ऐसा कोई नियम नहीं है कि ब्राह्मण चेहरे को बड़ा पद ना दिया जा सके। डीएमके का मानना है कि ब्राह्मण उन्हें वोट नहीं देते और इसलिए वे ब्राह्मण चेहरे को पार्टीा में भी वरीयता नहीं देते थे।
बता दें कि अगले साल तमिलनाडु में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। डीएमके की इस नीति से लगता है कि वह ब्राह्मण चेहरे को पार्टी में शामिल करके सवर्णों के वोट हासिल करने में भी सफल हो जाएंगे और एंटीइनकंबेंसी का प्रभाव कम हो जाएगा। वहीं बीजेपी तमिलनाडु प्रदेश प्रमुख नैनार नागेन्द्रन ने शनिवार को दावा किया कि बिहार के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) 2026 के विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करेगा।
नैनार ने कहा कि बिहार चुनाव के परिणाम केंद्र की भाजपा सरकार और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के सुशासन की मान्यता है तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर गलत सूचना फैलाने वालों को खारिज किया गया है।





