
हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए; जाइए सरकार से गुहार लगाइए; CJI गवई ने क्यों कहा ऐसा
संक्षेप: याचिका खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई ने दो टूक कहा कि जाइए सरकार के सामने जाकर अपनी बात रखिए। संविधान के अन्य अंग भी काम कर रहे हैं। हर बात के लिए आप अदालत नहीं आ सकते।
देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बी आर गवई अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए चर्चा में रहे हैं। एक बार फिर उन्होंने अपनी बेबाकी से सबका ध्यान खींचा है। दरअसल, उनकी अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सुनवाई के लिए आज (गुरुवार, 16 अक्टूबर को) एक जनहित याचिका (PIL) आई थी, जिसमें सरकारी और निजी बसों में अत्यधिक भीड़भाड़ पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इसके अलावा बसों में भीड़ नियंत्रण के लिए दिशा-निर्देश देने की भी मांग की गई थी लेकिन CJI गवई ने PIL याचिका खारिज कर दी।

याचिका दायर करने वाले वकील ने CJI के सामने तर्क दिया कि यह बहुत अहम मुद्दा है क्योंकि इस वजह से हर साल लाखों लोगों की मौत होती है। याचिका में बसों की ओवरलोडिंग से लोगों के जीवन को हो रहे खतरे के अलावा बसों में सामान की ढुलाई से सरकार को हो रहे राजस्व के नुकसान का भी हवाला दिया गया था। याचिका में मोटर वेहिकल्स एक्ट, 1988 और सेंट्रल मोटर वेहिकल्स रूल्स, 1989 का सख्ती से पालन कराने की मांग की गई थी लेकिन PIL खारिज कर दी गई।
सरकार के कई अंग हैं जो इसकी व्यवस्था देखते हैं
याचिका खारिज करते हुए CJI गवई ने दो टूक कहा, "जाइए सरकार के सामने जाकर अपनी बात रखिए। संविधान के अन्य अंग भी काम कर रहे हैं। हर बात के लिए आप अदालत नहीं आ सकते।" CJI ने स्पष्ट किया कि सरकार के कई अंग हैं जो इसकी व्यवस्था देखते हैं, इसलिए याचिकाकर्ता को सरकार से संपर्क कर इस मुद्दे को उठाना चाहिए।
याचिकाकर्ता का मकसद क्या?
बता दें कि त्योहोरी सीजन में बसों और ट्रेनों में निर्धारित क्षमता और संख्या से बहुत ज्यादा यात्री सफर करते हैं। बसों में 16 से 18 टन वजन ढोने की क्षमता होती है लेकिन इस सीमा से ज्यादा भार ढोया जा रहा है। कई बार बस की छतों पर ज्यादा सामान रखे जाने से भी बसें अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त होती हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB)की रिपोर्ट भी इस बात की तस्दीक करती है कि बस की ओवरलोडिंग के चलते हर साल हजारों लोगों की जान चली जाती है।





