मणिपुर में बीजेपी को भारी पड़ सकती है नाराजगी, यूपी-उत्तराखंड में भी आसान नहीं चुनाव
अगले साल पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इनमें से मणिपुर में बीजेपी को नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं यूपी और उत्तराखंड में दो बार से बीजेपी की सरकार है। ऐसे में चुनौतियां बढ़ेंगी।

अगले साल की शुरुआत में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा को चार राज्यों में अपनी सरकार बरकरार रखने की चुनौती है। पार्टी अपनी सफलता के सिलसिले को बरकरार रखने के लिए लगातार जमीनी स्तर पर काम को महत्व दे रही है। केंद्रीय नेतृत्व संगठन स्तर पर फीडबैक भी हासिल करता रहता है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा के लिए बाकी दो राज्यों मणिपुर व गोवा से स्थिति बेहतर मानी जा रही है, फिर भी व्यापक तैयारियों पर पार्टी का जोर है। पंजाब में भी पार्टी को अपनी ताकत बढ़ने के आसार हैं। इसी को ध्यान में रखकर जमीनी स्तर पर काम किया जा रहा है।
नई केंद्रीय टीम ने कामकाज संभालना शुरू किया
भाजपा के संगठन की नई केंद्रीय टीम ने कामकाज संभालना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश के लिए तो संगठन प्रभारी भी तय हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार भाजपा नेतृत्व को संगठन से जो फीडबैक मिल रहा है, उसमें उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में लगातार दो कार्यकाल को पूरा कर चुकी भाजपा की सरकारों को इस बार पिछले बार के मुकाबले ज्यादा चुनौती मिल सकती है। इसी को देखते हुए पार्टी इन राज्यों पिछली बार से अधिक ध्यान देने की रणनीति बना रही है। जमीनी स्तर पर संगठन को और मजबूत किया जाएगा।
तीसरी बार सरकार बनाने का प्रयास कर रही बीजेपी
पार्टी सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार दो कार्यकाल के बाद पार्टी के लिए इस बार मुकाबला पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण होने की संभावना भी जताई गई है। इसकी वजह मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य, विपक्षी दलों से बढ़ती चुनौती और दस साल के बाद सत्ताविरोधी माहौल को माना जा रहा है। हालांकि, इसके बावजूद फीडबैक में तीसरी बार सरकार बरकरार रहने को लेकर पूरी उम्मीद भी जताई गई है।
गोवा में समर्थकों पर भरोसा
वहीं, गोवा में गोवा में सरकार के कामकाज से ज्यादा नेताओं की व्यक्तिगत छवि व स्थानीय समीकरण ज्यादा असर डालती है। इन दोनों छोटे राज्यों में विपक्ष भले ही कमजोर हो, लेकिन भाजपा के अपने समर्थक वर्ग का संभावित रुख काफी असर डाल सकता है।
मणिपुर में भारी पड़ सकती है नाराजगी
दूसरी ओर, मणिपुर को लेकर आ रहे फीडबैक चिंता बढ़ा रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मणिपुर में बीते वर्षों में जो हालात रहे हैं, उनमें सही आकलन कर पाना मुश्किल है। भाजपा को समर्थन करने वाले कुछ जातीय समूहों में नाराजगी है। हालांकि नेतृत्व परिवर्तन के बाद स्थितियां कुछ संभली हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि छोटे राज्यों में हालात ऐसे ही रहते हैं।


