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ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार ऐसा, भारत-पाक ने न्यूक्लियर ठिकानों की लिस्ट एक-दूसरे को क्यों सौंपी?

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार ऐसा, भारत-पाक ने न्यूक्लियर ठिकानों की लिस्ट एक-दूसरे को क्यों सौंपी?

संक्षेप:

पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों ने पहली बार परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची साझा की है।

Jan 01, 2026 03:34 pm ISTPramod Praveen वार्ता, नई दिल्ली
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तीन दशक से ज़्यादा पुरानी परंपरा को जारी रखते हुए नए साल के मौके पर भारत और पाकिस्तान ने गुरुवार (1 जनवरी, 2026 को) अपने-अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान किया है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों देशों के बीच सूचियों का आदान-प्रदान नई दिल्ली और इस्लामाबाद में कूटनीतिक माध्यमों से किया गया। इस सूची में भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले के निषेध संबंधी समझौते के अंतर्गत शामिल प्रतिष्ठानों को शामिल किया जाता है। पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों ने पहली बार परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची साझा की है।

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यह लिस्ट ऐसे समय में बदली गई है जब पिछले मई में चार दिनों की सैन्य दुश्मनी के बाद दोनों देशों के बीच संबंध अभी भी बहुत खराब हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि लिस्ट का आदान-प्रदान परमाणु ठिकानों और सुविधाओं पर हमले पर रोक लगाने वाले समझौते के प्रावधानों के तहत हुआ।

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क्यों सौंपी लिस्ट, किस समझौते में प्रावधान

दोनों देशों ने 31 दिसंबर 1988 को इस समझौते पर हस्ताक्षर किये थे और यह 27 जनवरी 1991 से लागू है। इसके अंतर्गत यह प्रावधान है कि भारत और पाकिस्तान प्रत्येक कैलेंडर वर्ष की पहली जनवरी को एक-दूसरे को उन परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं की जानकारी देंगे जो इस समझौते के अंतर्गत आती हैं। यह दोनों देशों के बीच इस तरह की सूचियों का 35वां लगातार आदान-प्रदान है। दोनों देशों ने पहली बार 1 जनवरी 1992 को ये सूची साझा की थी।

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क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखना मकसद

बता दें कि 1988 में हुए ये समझौता दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि दोनों देश एक-दूसरे के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला नहीं करेंगे। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों और प्रतिष्ठानों के संभावित उपयोग से बचाव करना और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखना है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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