पहले शुभेंदु अधिकारी की तारीफ, फिर सफाई…ममता बनर्जी की MP महुआ मोइत्रा के दिमाग में चल क्या रहा?

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Mahua Moitra: टीएमसी में जारी सियासी संकट के बीच सांसद महुआ मोइत्रा ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का खुलकर समर्थन किया है। साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के प्रति अपना सम्मान जताया। इस दौरान उन्होंने बागी नेताओं पर जमकर हमला बोला...

West Bengal Politics

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रहे भारी विद्रोह के बीच पार्टी की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति अपना अटूट समर्थन जताते हुए बागी नेताओं पर जोरदार हमला बोला है। बीबीसी से बात करते हुए महुआ ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का खुलकर सम्मान किया, अपने पुराने भावनात्मक संबंधों को याद किया और बागियों पर पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के समय ममता-अभिषेक की लोकप्रियता का फायदा उठाने वाले नेता अब उन्हें ही निशाना बना रहे हैं।

इस दौरान महुआ मोइत्रा ने स्पष्ट किया कि उनके बयानों के कुछ 'अंशों' को गलत संदर्भ में पेश कर सनसनी फैलाई जा रही है, जबकि उन्होंने हमेशा पार्टी के प्रति वफादारी और ममता बनर्जी के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त किया है। कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र की सांसद मोइत्रा ने अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए बताया कि 2014 में जब उन्हें लोकसभा टिकट नहीं मिला तो वह पूरी रात रोई थीं। उस वक्त शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें 'बहन, रो मत, हम तुम्हारे साथ हैं' कहकर सांत्वना दी थी।

अभिषेक को नंबर दो बनाने से शुभेंदु थे नाराज

महुआ मोइत्रा ने कहा कि शुभेंदु अधिकारी की समस्या मूल रूप से यही थी कि ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी को पार्टी में नंबर दो बना दिया था। शुभेंदु समझते थे कि जब तक अभिषेक पार्टी में हैं, पार्टी की बागडोर कभी उनके हाथ में नहीं आएगी। उन्होंने अपना रुख साफ कर दिया था। इसमें कुछ सच्चाई भी है और उनके इस दृष्टिकोण का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया और पांच साल तक अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ी। उन्होंने आगे पूछा कि जब पश्चिम बंगाल में टीएमसी जीत रही थी, तब डायमंड हार्बर सांसद से जुड़ी समस्याओं पर ये बागी नेता चुप क्यों रहे? आज जो लोग आरोप लगा रहे हैं, उन्होंने महज एक-डेढ़ महीने पहले टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा था।

बागियों पर पाखंड का आरोप

महुआ मोइत्रा ने बागी नेताओं पर पाखंड उजागर करते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी को आज पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नहीं बनाया गया है, उन्होंने 2021 में भी यही पद संभाला था। पार्टी ने 2021 का चुनाव उनके नेतृत्व में जीता था। शुभेंदु अधिकारी ने भी पार्टी छोड़ने से पहले अभिषेक के नेतृत्व में काम किया था। तो आज बगावत करने वाले नेताओं ने तब क्यों नहीं कहा कि वे अभिषेक के कामकाज के तरीके से असहमत हैं या पार्टी जनता से कट गई है? उन्होंने पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने से इनकार क्यों नहीं किया? उस समय उन्हें टिकट, पद और अवसर चाहिए थे। इसीलिए मैं उनके पाखंड को उजागर कर रही हूं।

इस दौरान मोइत्रा ने जोर देकर कहा कि ममता बनर्जी या अभिषेक बनर्जी से असहमति जताने के लिए पार्टी के भीतर हमेशा गुंजाइश रही है। मैंने खुद 2024 का चुनाव आई-पैक को शामिल किए बिना लड़ा था। इसलिए समस्या कभी यह नहीं थी कि पार्टी के भीतर चर्चा की कोई गुंजाइश नहीं थी। अगर किसी को कामकाज का तरीका पसंद नहीं है, तो वे जाने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन आप ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के चेहरों और लोकप्रियता का इस्तेमाल करके चुनाव नहीं जीत सकते और फिर पलटकर उन पर हमला नहीं कर सकते।

सायोनी घोष का जाना सबसे बड़ा झटका

इस दौरान महुआ मोइत्रा ने खुद को भावुक राजनेता बताते हुए कहा कि हो सकता है एक साल बाद, जब मैं और अधिक अनुभवी हो जाऊं, तो मुझे कोई भी बात आश्चर्यचकित न करे। लेकिन अभी भी कुछ बातें मुझे आश्चर्यचकित कर देती हैं। मैं भावुक इंसान हूं। राकेश इतने भावुक राजनेता नहीं हैं। पुराने जमाने के राजनेता कहते थे कि लोग आते-जाते रहते हैं। लेकिन मैं आज भी बहुत भावुक राजनेता हूं। उन्होंने पार्टी को परिवार मानने की बात दोहराई और कहा कि मेरे लिए भावनात्मक संबंध मायने रखते हैं। मैं पार्टी को एक परिवार मानती हूं। जब आप किसी के साथ चौबीसों घंटे राजनीति करते हैं, तो व्यक्तिगत बंधन बन जाते हैं।

सायोनी घोष के बागी खेमे में शामिल होने पर महुआ ने सबसे ज्यादा दुख जताया। उन्होंने कहा कि मेरा पूरा विश्वास है कि पार्टी से उन्हें जो कुछ भी मिला, वह इसलिए मिला क्योंकि वह इसकी हकदार थीं। वह सक्षम और योग्य थीं। उनकी यात्रा पर गौर कीजिए, फरवरी 2021 में पार्टी में शामिल हुईं, मार्च-अप्रैल तक टिकट मिल गया, बेहद शानदार चुनाव लड़ा और सिर्फ 4000 वोटों से हारीं। अगर उन्होंने अब पार्टी छोड़ने का फैसला किया है, तो इस फैसले का स्पष्टीकरण उन्हें खुद देना चाहिए।

टीएमसी में संकट बरकरार

बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा से करारी हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी में विद्रोह का संकट गहरा गया है। विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष रथेंद्र नाथ बोस ने 3 जून को टीएमसी के 58 बागी विधायकों को सदन में प्रमुख विपक्षी दल के रूप में मान्यता दे दी। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने 1 जून को जिन ऋतब्रता बनर्जी और संदीपान साहा को निष्कासित किया था और वे विपक्ष के नेता और उपनेता बन गए।

इस प्रकरण के कुछ दिनों बाद ही टीएमसी से 20 सांसदों का एक और बागी गुट सामने आ गया। इस गुट में सायोनी घोष, यूसुफ पठान, रचना बनर्जी, काकोली घोष समेत कई दिग्गज नेता शामिल हैं। इस गुट ने त्रिपुरा की छोटी पार्टी NCPI के साथ विलय का प्रस्ताव रखकर संसद में भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने की तैयारी की है। अगर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस विलय को मंजूरी दे देते हैं, तो लोकसभा में एनडीए की सीटें 294 से बढ़कर 314 हो जाएंगी।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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