पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे... ऑपरेशन सिंदूर पर कांग्रेसी पूर्व CM का विवादित बयान
चव्हाण ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन अगर ग्वालियर, बठिंडा या सिरसा से कोई विमान उड़ान भरता, तो पाकिस्तान द्वारा उसे मार गिराए जाने की बहुत ज़्यादा संभावना थी, इसीलिए एयर फोर्स पूरी तरह से ग्राउंडेड थी।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय वायु सेना को पूरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। चव्हाण ने कहा, “7 मई को पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे। उस, दिन आधे घंटे की हवाई लड़ाई हुई, उसमें हम पूरी तरह हार गए, चाहे लोग इसे मानें या न मानें। भारतीय विमानों को मार गिराया गया। एयर फोर्स पूरी तरह से ग्राउंडेड थी और एक भी विमान नहीं उड़ सका।"
चव्हाण ने पुणे में संवाददाताओं से बात करते हुए आगे कहा, "अगर ग्वालियर, बठिंडा या सिरसा से कोई विमान उड़ान भरता, तो पाकिस्तान द्वारा उसे मार गिराए जाने की बहुत ज़्यादा संभावना थी, इसीलिए एयर फोर्स पूरी तरह से ग्राउंडेड थी।”
मराठी नेता देश का प्रधानमंत्री बनेगा
चव्हाण ने आज अपने इस दावे को फिर दोहराया कि जल्द ही एक मराठी नेता देश के प्रधानमंत्री का पद संभाल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 19 दिसंबर को भारत के प्रधानमंत्री बदल जाएंगे। चव्हाण, जो पहले प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री रह चुके हैं और नई दिल्ली में अपने मजबूत संपर्कों के लिए जाने जाते हैं, ने कहा कि उनके अनुभव और संपर्कों को देखते हुए उनके इस बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उन्होंने अमेरिका में एक व्यक्ति के बारे में सनसनीखेज दावा भी किया, जो कथित तौर पर इजरायली खुफिया एजेंट है। उनके अनुसार, इस व्यक्ति ने कई प्रभावशाली हस्तियों के बंगलों में कैमरे लगाए थे और एक स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया था। उन्होंने दावा किया कि यह व्यक्ति जल्द ही प्रमुख वैश्विक नेताओं का पर्दाफाश कर सकता है, जिससे अमेरिका में एक बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हो सकता है।
19 दिसंबर की फिर की चर्चा
चव्हाण ने कहा कि अमेरिका में एक नया कानून लागू किया जा रहा है, जिसके बाद 19 दिसंबर को इन प्रमुख हस्तियों के नाम सामने आने की संभावना है। हालांकि चव्हाण ने स्पष्ट किया कि उन्हें नहीं पता कि ये नेता कौन हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस कथित स्टिंग ऑपरेशन का असर भारत में भी महसूस होगा और संभवतः इससे भारत के प्रधानमंत्री में बदलाव हो सकता है। इससे पहले उन्होंने सांगली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी ऐसा ही बयान दिया था, जहां उन्होंने कहा था कि जल्द ही एक मराठी नेता अगला प्रधानमंत्री बनेगा।
इस बार चव्हाण ने अपने दावे को अमेरिका में हो रहे राजनीतिक घटनाक्रमों से जोड़ते हुए कहा कि जेफरी एपस्टीन फाइलों ने वहां भारी उथल-पुथल मचा दी है और यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कुर्सी भी खतरे में दिख रही है। इस बीच, भाजपा नेताओं ने चव्हाण के दावों पर कड़ा सवाल उठाते हुए पूछा है कि अमेरिकी दस्तावेजों पर आधारित राजनीतिक उथल-पुथल से भारत के प्रधानमंत्री में बदलाव कैसे हो सकता है। उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया है कि एक मराठी नेता प्रधानमंत्री बनेगा और नेतृत्व परिवर्तन की किसी भी संभावना को नकार दिया है।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ गलत सूचना फैलाने के लिए जानबूझकर ऐसे बयान दिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ दिनों से भ्रम और अशांति पैदा करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय साजिश चल रही है।

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




