फतह-3 बनाम ब्रह्मोस, मिसाइल पावर के मामले में भारत की बराबरी क्यों नहीं कर सकता पाकिस्तान
ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस ने पाकिस्तानी एयरबेस और कमांड सेंटरों पर सटीक हमले किए, जबकि पाकिस्तान के चीनी एयर डिफेंस सिस्टम नाकाम रहे। भारत की बहुस्तरीय एयर डिफेंस (S-400, आकाश, बराक-8) ने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोन्स को रोक लिया।

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल का दक्षिण एशिया में सैन्य संतुलन के मामले में बड़ा रोल रहा है। इसकी गति, सटीकता और इंटरसेप्ट करने में कठिनाई ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को बढ़त दिलाई। पाकिस्तान पारंपरिक रूप से बैलिस्टिक मिसाइलों, सबसोनिक क्रूज सिस्टम और न्यूक्लियर डिटरेंस पर निर्भर रहा। अब पाकिस्तान ने फतह-3 मिसाइल का परीक्षण कर ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक प्रिसीजन स्ट्राइक क्षमता हासिल करने का दावा किया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह दावा सतही है। असल में यह चीन की तकनीकी मदद का नतीजा है, न कि पाकिस्तान की स्वदेशी उपलब्धि। फतह-3 की अस्पष्टता और चीन से जुड़ाव इसे ब्रह्मोस की तुलना में कमजोर बनाते हैं।
भारत-रूस संयुक्त परियोजना ब्रह्मोस की गति वाली दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है। इसे जमीन, समुद्र, हवाई जहाज और पनडुब्बी से लॉन्च किया जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस ने पाकिस्तानी एयरबेस और कमांड सेंटरों पर सटीक हमले किए, जबकि पाकिस्तान के चीनी एयर डिफेंस सिस्टम नाकाम रहे। भारत की बहुस्तरीय एयर डिफेंस (S-400, आकाश, बराक-8) ने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोन्स को रोक लिया।
ब्रह्मोस की रेंज अब 800 किमी तक बढ़ाई जा चुकी है और इसमें उन्नत सीकर, सैटेलाइट टारगेटिंग व मल्टी-प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन शामिल है। यह सिर्फ मिसाइल नहीं, बल्कि पूर्ण युद्ध प्रणाली का हिस्सा है। पाकिस्तान फतह-3 को ब्रह्मोस का जवाब बता रहा है, लेकिन इसमें कई कमियां हैं। यह संभवतः चीन के HD-1 मिसाइल से प्रेरित है और मुख्य रूप से ग्राउंड-बेस्ड लॉन्चर पर निर्भर है। ब्रह्मोस की तरह यह मल्टी-प्लेटफॉर्म नहीं है। पाकिस्तान का मिसाइल प्रोग्राम लगभग पूरी तरह चीन और उत्तर कोरिया पर निर्भर है। शाहीन सीरीज चीन की M-9/M-11 से, गौरी नोडोंग से जुड़ी हुई है।
फतह-3 की प्रोडक्शन स्केल, गाइडेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक जामिंग प्रतिरोध और ऑपरेशनल मैच्योरिटी पर सवाल बाकी हैं। रिटायर्ड ब्रिगेडियर एसके चटर्जी के अनुसार, ब्रह्मोस का ऑपरेशनल रिकॉर्ड और इंटीग्रेशन फतह-3 से कहीं बेहतर है। पाकिस्तान की रक्षा व्यवस्था चीन की निर्यात पर निर्भर है, जो इसे स्वतंत्र विकास से दूर रखती है। ऑपरेशन सिंदूर में चीनी सिस्टम्स की नाकामी ने इस निर्भरता को उजागर किया। भारत ने ब्रह्मोस को स्वदेशीकरण, बड़े पैमाने पर उत्पादन और निरंतर अपग्रेड के जरिए मजबूत किया है। फतह-3 भले ही सुपरसोनिक हो, लेकिन भारत की लेयर्ड एयर डिफेंस और पूर्ण युद्ध इकोसिस्टम इसे प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम है।
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लेखक के बारे में
Niteesh Kumarपत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।
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