कांग्रेस ने वैसा काम नहीं किया जैसी उम्मीद थी, INDIA गठबंधन से नाराज दिग्गज नेता

Nisarg Dixit भाषा
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तीन बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे अब्दुल्ला ने कहा कि INDIA गठबंधन की नियमित बैठकें होना 'बहुत जरूरी' है। उन्होंने कहा, 'यह गठबंधन सिर्फ चुनावों के लिए नहीं है। यह देश के भविष्य के लिए है। इस बात को कई बार नजरअंदाज किया जा चुका है। यह कहते हुए मुझे बहुत दुख हो रहा है।

कांग्रेस ने वैसा काम नहीं किया जैसी उम्मीद थी, INDIA गठबंधन से नाराज दिग्गज नेता

नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल कराने के मामले में 'उम्मीदों के मुताबिक जोरदार समर्थन' न मिलने पर INDIA गठबंधन और विशेषकर कांग्रेस के प्रति गहरी निराशा जताई है। फारूक अब्दुल्ला ने विपक्षी गठबंधन INDIA के बारे में कहा कि उनकी पार्टी इस गठबंधन की प्रतिबद्ध सदस्य बनी हुई है, लेकिन यह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाया है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर मजबूत और एकजुट रणनीति के अभाव को गठबंधन में विवाद का मुख्य कारण भी बताया।

क्यों है INDIA गठबंधन से नाराजगी

अब्दुल्ला ने 'पीटीआई-भाषा' को दिए साक्षात्कार में कहा, 'देखिए, इस राष्ट्रीय गठबंधन से हमारी यही सबसे बड़ी नाराजगी रही है... हमें उम्मीद थी कि वे हमारे मुद्दे के लिए कहीं ज्यादा जोरदार तरीके से लड़ेंगे। ऐसा नहीं हुआ। यह वास्तव में बहुत दुखद है कि प्रमुख पार्टी कांग्रेस ने वह भूमिका नहीं निभाई, जिसकी हम उससे अपेक्षा करते हैं।' अब्दुल्ला ने गठबंधन से अपील की कि वह केवल चुनावी समझौते तक सीमित न रहे, बल्कि 'नजरअंदाज' किए जा रहे देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए अधिक बैठकें करे।

भाजपा के साथ जाने से इनकार

उन्होंने कहा, 'यह बिल्कुल स्पष्ट है कि हम भारतीय जनता पार्टी के साथ नहीं हैं और कभी नहीं होंगे। हम INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं। मुझे उम्मीद है कि चुनाव के बाद यह गठबंधन फिर से एकजुट होगा और न केवल राष्ट्रीय मुद्दों, बल्कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने के मुद्दे को भी कहीं ज्यादा मजबूती से उठाएगा।'

तीन बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे अब्दुल्ला ने कहा कि INDIA गठबंधन की नियमित बैठकें होना 'बहुत जरूरी' है। उन्होंने कहा, 'यह गठबंधन सिर्फ चुनावों के लिए नहीं है। यह देश के भविष्य के लिए है। इस बात को कई बार नजरअंदाज किया जा चुका है। यह कहते हुए मुझे बहुत दुख हो रहा है।

राज्य का दर्जा मिलने के मामले पर क्या बोले

अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने पर फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र सरकार संसद के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय में भी जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रति प्रतिबद्ध हैं।

अब्दुल्ला ने कहा, 'अब वे इसमें कितना समय लेंगे, यह कहना मुश्किल है। लेकिन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को आश्वासन दिया गया है। गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करने वाले हमारे सांसदों को भी भरोसा दिया गया है। हमें उम्मीद है कि इन राज्य चुनावों के खत्म होने के बाद वे राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर आगे बढ़ेंगे।'

पांच दशक से अधिक समय से राजनीति में सक्रिय अब्दुल्ला से जब जम्मू-कश्मीर में उभरते युवा नेताओं को सलाह देने के लिए कहा गया, तो उन्होंने कहा, 'मैं अपने लोगों और आज के नेताओं से कहना चाहूंगा कि वे जो करना चाहते हैं, ईमानदारी से करें और स्पष्टता रखें। जनता को धोखा न दें। जितना हम समझते हैं, जनता उससे कहीं अधिक समझदार होती है।'

उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे 'हर दिशा में मौजूद चुनौतियों' के बावजूद गरीबी और अज्ञानता को दूर करने पर ध्यान केंद्रित रखें और अपने लक्ष्य से भटकें नहीं।

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लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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