बांग्लादेश और भारत के समझौते पर बिहार में क्यों संग्राम, फरक्का पर उलझे JDU-RJD

हिन्दुस्तान टीम, पटना ब्यूरो
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फरक्का संधि का मतलब भारत और पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश के बीच हुए एक जल समझौते से है। जिस पर 12 दिसंबर 1996 को दस्तखत किए गए थे। अब यह मुद्दा बिहार की राजनीति में तूल पकड़ रहा है और दो बड़े दल राजद और जदयू उलझे नजर आ रहे हैं।

Bangladesh
फरक्का जल संधि भारत और बांग्लादेश के बीच साल 1996 में हुई थी। (File Photo)

बिहार में बांग्लादेश से फरक्का जल संधि पर सियासी तकरार शुरू हो गई है। जदयू- राजद आमने-सामने है। जदयू संधि के नवीनीकरण के खिलाफ है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा व उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी मजबूती से इसे लगातार उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यह जल संधि बिहार और देश के हित में नहीं है। जदयू का यह भी आरोप है कि सत्ता में रहते लालू प्रसाद इस संधि पर मौन रहे। इस मुद्दे पर तकरार की शुरुआत राजद के पलटवार से हुई।

लालू प्रसाद ने शनिवार को वक्तव्य जारी कर कहा कि नीतीश कुमार ने संसद में इस विषय पर कभी एक शब्द नहीं बोला। हमने संसद में और राज्य में हमारी सरकार ने हर मंच पर हमेशा फरक्का बांध का कड़ा विरोध किया, क्योंकि हमारी दूरदृष्टि ने गंभीरता से इससे बिहार को होने वाले नुकसान और खतरे को पहचान लिया था। फरक्का बैराज के विषय पर नीतीश कुमार के नौसिखिए बोल रहे है, जिन्हें इस मुद्दे और विषय का कोई इतिहास- भूगोल मालूम नहीं है।

लालू प्रसाद यादव के गंभीर आरोप

लालू प्रसाद ने यहां तक कह दिया कि नीतीश कुमार के खेवनहार बने नौसिखियों को ज्ञानार्जन के लिए जल संसाधनविभाग, गंगा नदी में जल उपलब्धता की कमी, बांग्लादेश के साथ अन्तरराष्ट्रीय संधि के दुष्प्रभाव और तत्कालीन राज्य सरकार के प्रयास एवं तत्कालीन सिंचाई मंत्री जगदा भाई के केंद्र सरकार के साथ पत्राचार को पढ़ना चाहिए।

उधर, पार्टी के वरिष्ठ नेता आलोक मेहता ने रविवार को जदयू के आरोपों पर पलटवार किया कि फरक्का कोई आज का मुद्दा नहीं है। राजद तो शुरू से विरोध कर रहा है। केन्द्र और राज्य में पिछले 12 साल से इनकी सरकार है, इतने दिनों से ये क्या कर रहे थे।

ये हैं महत्वपूर्ण तथ्य

1. यूपी में गंगा के पानी का इस्तेमाल कई प्रोजेक्ट में हो रहा है पर बिहार में इस पर रोक लग जाती है। यही वजह है 1995 से बिहार सरकार आग्रह कर रही है कि गंगा के पानी का बंटवारा कर हिस्सा तय हो।

2. वर्ष 2012 में तत्कालीन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री पवन कुमार बंसल ने चौसा से फरक्का तक गंगा का हवाई सर्वेक्षण के बाद गंगा के पानी बंटवारे पर कार्रवाई की बात कही। उस समय से अब तक कई बार पत्राचार हो चुका है पर नतीजा सिफर है।

3. बिहार में गंगा बक्सर जिले के चौसा से भागलपुर के कहलगांव तक बहती है। नदी में जमी गाद, बाढ़ से ये बसावटें प्रभावित होती हैं।

क्या है संधि

12 दिसंबर 1996 को भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि हुई थी, जिसे फरक्का संधि भी कहा जाता है। फरक्का बैराज में जमे गाद से बरसात में विनाशकारी बाढ़ आती है। दूसरी तरफ, बांग्लादेश को अतिरिक्त पानी देने से गर्मी में बिहार को जलसंकट झेलना पड़ता है। यहां तक कि कोसी व गंडक का पानी भी गंगा से होते हुए बांग्लादेश चला जाता है। इस जल का बिहार में उपयोग नहीं हो पाता।

किसने क्या कहा

एनडीए सरकार ठोस पहल करती तो बिहार की बाढ़ का समाधान निकल जाता। राजद ने शुरू से ही फरक्का संधि का विरोध किया है। बिहार के हक में आगे भी इसका विरोध जारी रहेगा। -आलोक मेहता , राजद नेता

फरक्का का मुद्दा केवल पानी के बंटवारे तक सीमित नहीं है, इसलिए संधि के नवीनीकरण के समय राज्य की वर्तमान व भविष्य की जरूरतों को मजबूती से रखना आवश्यक है। -संजय सरावग, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

1996 में हुई फरक्का संधि के दौरान लालू केंद्र की संयुक्त मोर्चा सरकार में प्रभावशाली नेता थे। बिहार के सीएम भी थे। बावजूद इस संधि के विरोध में आवाज नहीं उठाई।

-नीरज कुमार, प्रदेश मुख्य प्रवक्ता, जदयू

Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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