जहांगीर खान चुनाव में नहीं, पर EVM पर रहेगा नाम; गढ़ में ही ममता बनर्जी के पास उम्मीदवार नहीं

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साल 2011 से ही इस सीट पर लगातार तृणमूल कांग्रेस जीतती आ रही है। यही नहीं उसकी जीत का अंतर भी लगातार बढ़ रहा है। 2016 में जहां टीएमसी 13% वोटों से जीती थी, वहीं 2021 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 20% तक पहुंच गया।

जहांगीर खान चुनाव में नहीं, पर EVM पर रहेगा नाम; गढ़ में ही ममता बनर्जी के पास उम्मीदवार नहीं

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सबसे मजबूत सीटों में से एक मानी जाने वाली फलता पर अब पार्टी के पास उम्मीदवार ही नहीं है। चुनाव से ठीक पहले यहां जहांगीर खान ने नाम वापस ले लिया है। अब खास बात है कि भले ही खान इस सीट से उम्मीदवारी पेश न कर रहे हों, लेकिन EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर उनका नाम रहेगा ही। आइए इसकी वजह जानते हैं।

TMC के लिए क्यों खास है फलता सीट

साल 2011 से ही इस सीट पर लगातार टीएमसी जीतती आ रही है। यही नहीं उसकी जीत का अंतर भी लगातार बढ़ रहा है। 2016 में जहां टीएमसी 13% वोटों से जीती थी, वहीं 2021 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 20% तक पहुंच गया। फलता विधानसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के तहत आने वाले सात हिस्सों में से एक है। अब खास बात है कि यहां से अभिषेक बनर्जी हैं। साल 2024 में बनर्जी ने इस सीट पर 7.1 लाख वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी, जो पूरे राज्य में सबसे बड़ी जीत थी।

EVM पर क्यों रहेगा नाम

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि नामांकन वापस लेने का समय खत्म हो चुका है और ऐसे में EVM मशीन पर टीएमसी उम्मीदवार का नाम बना रहेगा। एक अधिकारी ने कहा, 'फलता उपचुनाव के लिए नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 13 अप्रैल थी। बैलेट पेपर और ईवीएम के पैनल पहले ही फाइनल किए जा चुके हैं।'

चुनाव से क्यों हटे पीछे

बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली के आरोपों के बाद फलता विधानसभा क्षेत्र में फिर से मतदान कराए जाने का आदेश दिया गया था। खान ने कहा कि उन्होंने फलता के हितों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने क्षेत्र के विकास के लिए विशेष पैकेज देने का वादा किया है, जिसके चलते वह यह निर्णय लेने को प्रेरित हुए।

उन्होंने कहा, 'मैं फलता का बेटा हूं और मैं चाहता हूं कि यह क्षेत्र शांतिपूर्ण रहे तथा इसका विकास हो।' उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री ने फलता के विकास के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणा की है, इसीलिए मैंने इस निर्वाचन क्षेत्र में पुनर्मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का निर्णय लिया है।'

भाजपा ने क्या वजह बताई

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में कहा था, 'खुद को 'पुष्पा' कहने वाले कहां है? उनके पास कोई और रास्ता नहीं था, क्योंकि उन्हें कोई मतदान एजेंट नहीं मिला, इसलिए उन्होंने चुनाव मैदान से भागने का फैसला किया।'

TMC ने बताया निजी फैसला

तृणमूल कांग्रेस ने खान के फैसले से दूरी बनाते हुए कहा कि फलता विधानसभा क्षेत्र में फिर से होने वाले चुनाव से पीछे हटना जहांगीर खान का निजी फैसला है, न कि पार्टी का। तृणमूल कांग्रेस ने एक बयान में आरोप लगाया कि चार मई को विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद निर्वाचन क्षेत्र में भय का माहौल है।

पुष्पा फैक्टर

पूरे चुनाव प्रचार अभियान के दौरान खान ने 'पुष्पा' के किरदार के दबंग अंदाज को अपनाया था और इस फिल्म का मशहूर डायलॉग 'पुष्पा झुकेगा नहीं' बोला था। मतदान से पहले, खान ने पुलिस पर्यवेक्षक अजयपाल शर्मा को सार्वजनिक रूप से चुनौती भी दी थी और कहा था कि 'पुष्पा' की तरह वह भी कभी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।

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Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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