फलता में करारी हार के बाद फायर हुए अभिषेक बनर्जी, शुभेंदु अधिकारी ने भी दिया जवाब
फलता में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद टीएमसी और बीजेपी एक बार फिर आमने-सामने आ गए। अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया तो वहीं सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यही टीएमसी की हार का मॉडल है।

पश्चिम बंगाल की फलता सीट पर हुए चुनाव में बीजेपी के देबांग्शु पांडा ने अपने प्रतिद्वंद्वी माकपा के शंभु नाथ कुर्मी के खिलाफ कम से कम 1,09,021 वोटों से जीत हासिल की है। इस सीट पर कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मुल्ला मात्र 10 हजार वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे। वहीं टीएमसी के जहांगीर खान चौथे नंबर पर खिसक गए। चुनाव परिणाम के बाद डायमंड हार्बर सीट से टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा है कि इस चुनाव में बहुत सारी विसंगतियां पाई गई हैं। उन्होंने कहा कि पहली बार चुनाव के बाद तीन बजे तक केवल 2 से 4 राउंड की गिनती पूरी हो पाई थी। जबकि इस बार 3 बजे तक 21 राउंड की गिनती पूरी हो गई।
बता दें कि इस सीट पर कथित गड़बड़ियों के बाद चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को रीपोलिंग का ऐलान कर दिया था। यहां कई बूथों पर ईवीएम पर इत्र जैसी चीज छिड़कने, चुनाव चिह्न को ढकने और बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगे थे। इसके बाद चुनाव आयोग ने इस सीट पर दोबारा मतदान करवाने का आदेश दे दिया था। रीपोलिंग के दौरान सभी 285 सीटों पर किसी प्रकार के तनाव की खबर नहीं मिली। यहां दोबारा हुए मतदान में शाम 5 बजे तक 86 फीसदी लोगों ने वोट डाल दिया था।
टीएमसी उम्मीदवार ने छोड़ दिया था मैदान
टीएमसी के प्रत्याशी जहांगीर खान ने पहले ही मैदान छोड़ने हुए चुनाव ना लड़ने का ऐलान कर दिया था। हालांकि ईवीएम पर उनका नाम दिखाई दे रहा था। अभिषेक बनर्जी ने कहा, फलता से टीएमसी के 1000 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को भगा दिया गया। वहीं चुनाव आयोग आंखों पर पट्टी बांधे रहा। दिन दहाड़े पार्टी कार्यालयों पर हमला किया गया और आचार संहिता का खुले-आम उल्लंघन किया गया।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि लोगों के नाम डिलीट करवाने वाले निर्वाचन अधिकारी को बंगाल का मुख्य सचिव बना दिया गया है। सबसे चिंता की बात है कि बीजेपी को छोड़कर बाकी दलों के पोलिंग एजेंट्स को भी भगा दिया गया। यह देश में निष्पक्ष चुनावों पर बहुत बड़ा हमला है।
क्या बोले शुभेंदु अधिकारी
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि 15 साल बाद लोगों को वोट डालने की आजादी मिली है तो सारा सच सामने आ गया है। टीएमसी माफिया कंपनी बन चुकी थी। राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल करके जनता का पैसा खब लूटा गया। उन्होंने कहा कि डायमंड हार्बर मॉडल ही टीएमसी की हार का मॉडल बन गया।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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