यूं ही नहीं होने जा रहा 3 दिनों का विस्तारित संसद सत्र, महिला आरक्षण समेत सरकार के एजेंडे में कितने बिल?
महिला आरक्षण विधेयक के अलावा और भी कुछ अहम विधेयक हैं, जिसे सरकार इस सत्र में पारित कराने की योजना पर काम कर रही है। इनमें सबसे प्रमुख सशस्त्र पुलिस बल विधेयक 2026 है, जो राज्यसभा में तो पास हो गया है लेकिन लोकसभा में लटका हुआ है।

राज्यसभा की बैठक बृहस्पतिवार को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किए जाने के बजाय 16 अप्रैल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। इससे यह साफ हो गया है कि सरकार मौजूदा संसद के बजट सत्र में ही महिला आरक्षण वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन विधेयक लाएगी। इससे पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेण रिजिजू ने भी गुरुवार को राज्य सभा में संकेत दिया कि सरकार महिला आरक्षण विधेयक-2023 को लागू करने का संकल्प पारित कराने के लिए दो-तीन सप्ताह के अंदर ही संसद की बैठक बुला सकती है। हालांकि, विपक्ष चाहता है कि इस मुद्दे पर संसद की कार्यवाही अब कुछ राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में चल रहे विधान सभा चुनाव के बाद हो।
राज्यसभा के स्थगन कार्यक्रम के मुताबिक अब 16 अप्रैल को फिर से सदन का कार्यवाही शुरू होगी। कहा जा रहा है कि सरकार 16 से 18 अप्रैल यानी तीन दिनों के दौरान कुछ अहम विधेयकों को संसद से पारित करा सकती है। इनमें सबसे प्रमुख महिला आरक्षणसे जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक है जिसके जरिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर आम सहमति बनाने के लिए पिछले दिनों NDA के घटक दलों और विपक्ष के कुछ क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कीं थीं।
महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर जोर
बता दें कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान के लिए 2023 में संविधान संशोधन विधेयक (नारी शक्ति वंदन विधेयक) पारित किया गया था, हालांकि उसमें ऐसा प्रावधान है कि परिसीमन की प्रक्रिया के बाद ही लागू किया जा सकता है लेकिन अब सरकार ने उसमें संशोधन करने की योजना बनाई है। सूत्रों का कहना है कि जिस रूपरेखा को लेकर चर्चा जारी है, उसके अनुसार लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी, जिसमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पारित 'नारी शक्ति वंदन विधेयक-2023' के 2029 के आम चुनाव में लागू किये जाने की संभावना है। विधानसभा चुनावों के बीच सरकार इस पहल को एक मास्टरकार्ड के रूप में इस्तेमाल करना चाह रही है।
और कौन से बिल एजेंडे में
नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के अलावा और भी कुछ अहम विधेयक हैं, जिसे सरकार संसद के इस विस्तारित बजट सत्र में पारित कराने की योजना पर काम कर रही है। इनमें सबसे प्रमुख सशस्त्र पुलिस बल विधेयक 2026 है, जो राज्यसभा में तो पास हो गया है लेकिन लोकसभा में लटका हुआ है। लोकसभा में विपक्ष ने कहा है कि सशस्त्र पुलिस बल विधेयक सरकार जल्दबाजी में लायी है और इसमें गहनता से विचार करने की आवश्यकता है इसलिए विधेयक को संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) को भेजा जाना चाहिए। दूसरी तरफ सरकार इसे पास कराने का रणनीति बना रही है।
एफसीआरए विधेयक भी अटका हुआ है
इसके अलावा सरकार के एजेंडे में विदेशी अंशदान विनियमन (संशोधन) विधेयक (एफसीआरए) 2026 भी है। इस विधेयक को बुधवार को लोकसभा के आधिकारिक एजेंडा में चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन इस पर सदन में चर्चा नहीं हुई। जहां भाजपा ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए आवश्यक बता रही है, वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि इससे अल्पसंख्यकों के अधिकारों में कटौती होगी और गैर-सरकारी संगठनों पर सरकार का नियंत्रण सख्त होगा। इनके अलावा अन्य अहम विधेयकों में कॉरपोरेट लॉ संशोधन विधेयक, जनविश्वास बिल 2026 भी है। हालांकि, राज्यसभा ने आज आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अधिनियम 2026 पारित कर दिया।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


