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इंडिगो संकट से सबक ले रेलवे, हमारी थकान से खतरा बढ़ रहा है; अब लोको पायलटों ने दी चेतावनी

इंडिगो संकट से सबक ले रेलवे, हमारी थकान से खतरा बढ़ रहा है; अब लोको पायलटों ने दी चेतावनी

संक्षेप:

लोको पायलट काफी समय से भारतीय रेलवे में पेंडिंग लोको पायलट रिक्तियों और श्रम सुधारों में देरी को लेकर विरोध जता रहे हैं। उन्होंने सोमवार को रेलवे प्रशासन को चेताया कि इंडिगो एयरलाइन संकट से सीख लेने की जरूरत है।

Dec 09, 2025 11:13 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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हाल ही में इंडिगो एयरलाइंस में पैदा हुए बड़े संकट ने न केवल विमानन क्षेत्र को हिला दिया है, बल्कि भारतीय रेलवे के लोको पायलटों को भी अपनी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को दोहराने का मौका दे दिया है। ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (एआईएलआरएसए) ने केंद्र सरकार से अपील की है कि एयरलाइन पायलटों के लिए लागू किए गए थकान प्रबंधन नियमों (फटीग रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम) को रेलवे में भी तुरंत अमल में लाया जाए। एसोसिएशन का कहना है कि लोको पायलटों की थकान से रेल दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है और इंडिगो जैसी स्थिति रेलवे में भी आ सकती है।

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लोको पायलट काफी समय से भारतीय रेलवे में पेंडिंग लोको पायलट रिक्तियों और श्रम सुधारों में देरी को लेकर विरोध जता रहे हैं। उन्होंने सोमवार को रेलवे प्रशासन को चेताया कि इंडिगो एयरलाइन संकट से सीख लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चाहे आसमान में हों या पटरियों पर- थका हुआ क्रू सीधे यात्री सुरक्षा को खतरे में डालता है।

ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने रेलवे को सौंपे गए प्रतिनिधित्व पत्र में कहा कि लंबे समय से लंबित क्रू प्रबंधन सुधार, गैर-वैज्ञानिक रोस्टर और थका देने वाली ड्यूटी न सिर्फ कर्मचारियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि सुरक्षा मानकों को भी कमजोर कर रही हैं। AILRSA ने अपने पत्र में लिखा- आधुनिक नींद विज्ञान पर आधारित नियम कोई ड्यूटी से बचने की मांग नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनिवार्यता है।

इंडिगो संकट का उदाहरण देते हुए रेलवे को चेतावनी

AILRSA के केंद्रीय कार्यकारी समिति सदस्य पी.एन. सोमन ने द हिंदू से बातचीत में कहा कि रेलवे को मौजूदा एविएशन संकट से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा- विमानन क्षेत्र की तुलना में रेलवे तकनीकी दृष्टि से बहुत पीछे है, लेकिन यह रोजाना करोड़ों यात्रियों को ढोता है। ऐसे में लोको पायलटों की सतर्कता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

क्या है इंडिगो संकट, समझिए

इंडिगो एयरलाइंस का संकट नवंबर से शुरू हुए नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियमों के कारण भड़का। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने पायलटों के लिए साप्ताहिक आराम को 36 से बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया था, रात की लैंडिंग की संख्या को 6 से घटाकर 2 कर दिया था, और नाइट ड्यूटी को रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक बढ़ा दिया था। इन नियमों का पालन न करने पर इंडिगो को 3-4 दिसंबर को 1,000 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिससे देशभर के हवाई अड्डों पर हाहाकार मच गया। यात्रियों को भारी परेशानी हुई और सरकार ने अस्थायी रूप से कुछ नियमों में ढील दी। डीजीसीए ने इंडिगो के सीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और 8 दिसंबर को 24 घंटे का अतिरिक्त समय दिया गया। इस संकट ने पायलटों की थकान और सुरक्षा को राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया। एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इसे जानबूझकर लापरवाही बताया, जबकि इंडिगो ने क्रू की कमी का हवाला दिया।

दो लगातार नाइट ड्यूटी, वैज्ञानिक रोस्टर और पर्याप्त विश्राम की मांग

रेलवे से जुड़ी समिति के सदस्य सोमन ने बताया कि एसोसिएशन कई वर्षों से विरोध मार्च, धरने और हड़तालें करके मांग उठा रही है ताकि लोको पायलटों के लिए अधिकतम दो लगातार नाइट ड्यूटी की सीमा, मानव शरीर की कार्यप्रणाली के अनुरूप ड्यूटी घंटे, हर ड्यूटी के बाद कम से कम 16 घंटे का विश्राम, साप्ताहिक विश्राम और नींद-विज्ञान पर आधारित वैज्ञानिक रोस्टर अनिवार्य किए जाएं। उन्होंने कहा कि रेलवे ने साप्ताहिक विश्राम की पात्रता 52 से घटाकर 48 कर दी है, जिसमें से 16 घंटे दैनिक विश्राम भी जोड़ दिया गया है। सोमन ने कहा- 2010 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने दैनिक विश्राम में अवैध कटौती पर रोक लगाई थी, लेकिन स्थितियां नहीं बदलीं।

30,000 लोको पायलटों की भारी कमी

भारतीय रेलवे में लोको पायलटों की स्वीकृत संख्या 1.47 लाख है, जबकि वर्तमान में केवल 1.15 लाख लोको पायलट कार्यरत हैं- यानी 30,000 से अधिक पद खाली हैं। हालांकि रेलवे ने हाल में भर्ती प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन इसे पूरा होने में काफी समय लगेगा। लेकिन इस कमी को पूरा करने के लिए पायलटों से 12-16 घंटे तक लगातार ड्यूटी कराई जा रही है, जो संसद द्वारा 2016 में तय 10 घंटे की सीमा का उल्लंघन है। कई रेल दुर्घटनाओं की जांच में लोको पायलटों की थकान को मुख्य कारण बताया गया है। एनील काकोडकर सेफ्टी रिव्यू कमिटी (2012) और त्रिपाठी कमिटी (2013) जैसी उच्च स्तरीय समितियों ने वैज्ञानिक कामकाजी घंटों की सिफारिश की थी, लेकिन अमल नहीं हुआ। कर्नाटक हाईकोर्ट ने 2010 में दैनिक आराम काटने पर रोक लगाई थी, फिर भी उल्लंघन जारी है।

FRMS मॉडल अपनाने की मांग

AILRSA ने कहा कि सरकार ने 2023 में उड्डयन क्षेत्र के लिए फटीग रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम आधारित नियम और नई उड़ान ड्यूटी समय सीमाएं (FDTL) अधिसूचित की थीं, जो नवंबर 2025 से लागू होनी थीं। रेलवे पर भी इसी तरह का मॉडल लागू किया जाना चाहिए, जिसमें- 6 घंटे की अधिकतम दैनिक ड्यूटी सीमा, सर्केडियन साइंस आधारित रोस्टर, दो से अधिक लगातार नाइट ड्यूटी पर रोक, हर ड्यूटी के बाद 16 घंटे का निश्चित विश्राम, साप्ताहिक विश्राम और क्रू शेड्यूलिंग में थकान जोखिम मॉडलिंग शामिल हो। AILRSA ने कहा कि इन सुधारों को श्रम बोझ नहीं बल्कि यात्री सुरक्षा के लिए अनिवार्य कदम माना जाना चाहिए।

Amit Kumar

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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