Hindi NewsIndia NewsExplained ISI plots a major conspiracy in Punjab as arms smuggling increases 5 fold
पंजाब में बड़ी साजिश रच रही ISI, हथियारों की तस्करी में 5 गुना वृद्धि; पाकिस्तान की बौखलाहट समझिए

पंजाब में बड़ी साजिश रच रही ISI, हथियारों की तस्करी में 5 गुना वृद्धि; पाकिस्तान की बौखलाहट समझिए

संक्षेप: गैंगस्टरों को ISI और खालिस्तानी गुटों से भारी रकम दी जा रही है ताकि वे हमले करें, भर्ती करें और ड्रग्स-हथियारों की तस्करी में मदद करें। जट्टू भगवानपुरिया जैसे गैंगस्टरों का नेक्सस इस साजिश का प्रमुख हिस्सा है।

Thu, 16 Oct 2025 09:12 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, अमृतसर
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भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव के बीच पंजाब में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) एक बड़ी साजिश रच रही है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान से हथियारों की तस्करी में पिछले साल की तुलना में पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इस साल अब तक 362 हथियार जब्त किए जा चुके हैं जिनमें AK-47 राइफलें, ग्रेनेड और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेस (IEDs) शामिल हैं। वहीं 2024 में यह संख्या महज 81 थी।

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पाकिस्तान की बौखलाहट का नतीजा

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह उछाल भारत की 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता से उपजी पाकिस्तान की बौखलाहट का नतीजा है, जिसमें भारत ने पाकिस्तान और PoK में स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। बताया जा रहा है कि कुल बरामद हथियारों में से करीब एक-तिहाई ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब्त किए गए हैं।

पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की सतर्कता से कई ISI-समर्थित तस्करी नेटवर्क्स को ध्वस्त किया गया है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स की तस्करी में भी इजाफा देखा जा रहा है, जो पंजाब को अस्थिर करने की पाकिस्तानी कोशिशों का हिस्सा लगता है।

अब तक 50 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से कुछ को ड्रोन के जरिए गिराए गए हथियार इकट्ठा करते समय पकड़ा गया, जबकि अन्य लोग आतंकी हमलों की साजिश रचने वाले प्राप्तकर्ता थे। तीन साल बाद पहली बार तीन AK-47 राइफलों की बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले अक्तूबर 2022 में छह AK-47 राइफलें बरामद की गई थीं।

पाक की साजिश में शामिल खालिस्तानी

पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने द ट्रिब्यून से बातचीत में कहा, “हमने सीमा पार से भेजे जा रहे अत्याधुनिक हथियारों की तस्करी को नाकाम किया है और कई आतंकी साजिशों को समय रहते विफल किया है।” उन्होंने बताया कि यह सफलता पंजाब पुलिस, काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट, स्पेशल सर्विस ऑपरेशन सेल, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और केंद्रीय एजेंसियों के समन्वित प्रयासों से संभव हुई है।

जांच में खुलासा हुआ है कि अमेरिका, कनाडा और अन्य देशों में सक्रिय गैंगस्टर और आतंकी संगठन न केवल बब्बर खालसा इंटरनेशनल जैसे समूहों के सदस्यों को हथियार उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि संगठित अपराध को भी बढ़ावा दे रहे हैं। एक अधिकारी के अनुसार, “ISI गैंगस्टरों, ड्रग तस्करों और आतंकियों के गठजोड़ का इस्तेमाल पंजाब में अराजकता फैलाने के लिए कर रही है। बरामद हथियारों का संबंध रंगदारी, टारगेट किलिंग और गिरोहों की हिंसक लड़ाइयों से जुड़ा पाया गया है।”

हथियारबंद गैंग आतंकी गतिविधियों के “फुट सोल्जर”

उन्होंने कहा कि यह ISI की बड़ी साजिश का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था को अस्थिर कर ‘खालिस्तान’ जैसी अलगाववादी विचारधारा को हवा देना है। अधिकारी ने चेतावनी दी कि हथियारबंद गैंग भविष्य में आतंकी गतिविधियों के “फुट सोल्जर” बन सकते हैं। इस साल की जब्तियां 2021 से 2024 के बीच के कुल आंकड़ों से भी अधिक हैं।

बरामद हथियारों में 9mm Glock, PX5 पिस्तौल, .30 बोर, .32 बोर और .315 कैलिबर के हथियार शामिल हैं, जिनके साथ मैगजीन और जिंदा कारतूस भी मिले हैं। 2022 से अब तक जब्त किए गए अधिकतर Glock और PX5 हथियार सीधे पाकिस्तान से भेजे गए पाए गए हैं, जो आतंकी और आपराधिक गतिविधियों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए हैं।

बरसात के मौसम में नदी मार्ग का इस्तेमाल

तस्करी के तौर-तरीकों में भी बदलाव आया है। पहले जमीनी रास्तों, बॉर्डर एजेंटों और नदी मार्गों से हथियार भेजे जाते थे, लेकिन अब ड्रोन के जरिए हथियार गिराने की प्रवृत्ति बढ़ी है। यह तरीका 2019 में पहली बार सामने आया था। बरसात के मौसम में नदी मार्ग का इस्तेमाल अधिक होता है, क्योंकि उस समय पानी का स्तर ऊंचा होता है और दृश्यता कम रहती है, जिससे निगरानी कठिन हो जाती है।

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, तस्करी का जाल अमृतसर, तरन तारन, फिरोजपुर, फाजिल्का और बटाला जैसे सीमावर्ती जिलों में सबसे ज्यादा फैला हुआ है। इन्हें ISI निर्देशित मॉड्यूलों के प्रमुख प्रवेश बिंदु माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां अब इन इलाकों में ड्रोन मूवमेंट ट्रैकिंग, नाइट सर्विलांस और स्पेशल इंटेलिजेंस ऑपरेशन को और सख्त करने की दिशा में काम कर रही हैं ताकि पंजाब की धरती पर किसी भी आतंकी योजना को सफल होने से पहले ही नाकाम किया जा सके।

ISI की साजिश: खालिस्तान आंदोलन को फिर से जिंदा करने की कोशिश

सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) के बाद पाकिस्तान थोड़ा शांत पड़ा था, लेकिन अब ISI ने खालिस्तान आंदोलन को पुनर्जीवित करने के लिए कमर कस ली है। इस साजिश का केंद्र पंजाब की 532 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जहां ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ गया है। एक वरिष्ठ पंजाब पुलिस अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तानी ड्रोन अब 'फेल-सेफ' मैकेनिज्म से लैस हैं, जो सिग्नल जाम होने पर खुद-ब-खुद लौट जाते हैं। फिर भी, भारतीय एंटी-ड्रोन सिस्टम्स (ADS) की वजह से 8 में से 10 प्रयास नाकाम हो जाते हैं। पिछले कुछ हफ्तों में ड्रोन साइटिंग्स में भारी इजाफा हुआ है- कभी 8-10, तो कभी 15 प्रतिदिन। इन ड्रोन्स के जरिए AK-47, ग्रेनेड, IEDs के साथ-साथ हेरोइन और ICE जैसे ड्रग्स तस्करी की जा रही है।

पाकिस्तान की बौखलाहट: ऑपरेशन सिंदूर का बदला

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह साजिश पाकिस्तान की हताशा का प्रतीक है। मई 2025 में भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' ने PoK और पाकिस्तान में आतंकी कैंप्स को नेस्तनाबूद कर दिया, जिससे ISI को करारा झटका लगा। इसके जवाब में ISI ने पंजाब को निशाना बनाया, क्योंकि यहां खालिस्तान का पुराना इतिहास है। एक सुरक्षा विशेषज्ञ ने कहा, "ISI बदले का कैंपेन चला रही है- पंजाब को अस्थिर करके भारत को बदनाम करने की कोशिश है। लेकिन हमारी ADS और इंटेलिजेंस ने 80-90% प्रयासों को विफल कर दिया है।"

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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