शहीद भगत सिंह के रिश्तेदार का भी अपहरण कर चुका था खालड़ा केस का दोषी DSP, कैसे हुआ गायब
जसवंत सिंह खालड़ा मामले में दोषी पूर्व डीएसपी के गायब होने के बाद कई अन्य कड़ियां भी खुलकर सामने आ रही हैं। पूर्व डीएसपी जसवंत सिंह शहीद भगत सिंह के एक रिश्तेदार की हत्या में भी शामिल था। उसे एक हत्या के मामले में माफी भी मिली थी।

दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' के ओटीटी पर रिलीज होने और फिर बैन होने के बाद से 1995 के जसवंत सिंह खालड़ा मामला की नई-नई कड़ियां निकलकर सामने आ रही हैं। खालड़ा के अपहरण और हत्या मामले का एक दोषी पूर्व डीएसपी जसवंत सिंह बीते दिनों फरार हो गया है। 2023 में उसे जमानत पर रिहा किया गया था। वह खालड़ा मामले में ही उम्रकैद का सजायाफ्ता था। अब जसवंत सिंह की तलाश जारी है। गौर करने वाली बात यह है कि जसवंत सिंह केवल खालड़ा मामले में ही दोषी नहीं था बल्कि और भी कई हाई प्रोफाइल मर्डर में उसका नाम आ चुका था। एक मामले में उसे बाद में माफी भी मिल गई।
कई हाई प्रोफाइल मर्डर मामलों में आ चुका है नाम
'द ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब के तत्कालीन गवर्नर जनरल एसएफ रोड्रिग्स ने पंजाब सरकार की सिफारिश पर जसवंत सिंह की सजा माफ की थी। उसे अमरीक सिंह के अपहरण और हत्या मामले में सात साल कैद की सजा सुनाई गई थी। उसका नाम 1989 में कुलजीत सिंह धत्त के अपहरण और गायब होने के मामले में भी आया था। धत्त होशियारपुर के प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। वह भगत सिंह के रिश्तेदार लगते थे। कुलजीत सिंह धत्त भगत सिंह की बहन के दामाद के भाई थे। वह अंबाला जाटन गांव के सरपंच भी रहे थे।
शहीद भगत सिंह के रिश्तेदार की हत्या में भी नाम
भगत सिंह के भतीजे प्रोफेसर जगमो सिंह (रिटायर्ड) ने बताया, अंग्रेजी राज में जिस तरह से पुलिस लोगों को प्रताड़ित करती थी, उससे अलग स्थिति आज भी नहीं है। आज भी कई बार मासूम लोगों का एनकाउंट कर दिया जाता है। 90 के दशक में पंजाब में जो कुछ भी हुआ वह रूह कंपाने वाला है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपराध करते हैं, उन्हें ही बाद में बड़े पद भी मिल जाते हैं। उन्होंने कहा कि होशियारपुर की कोर्ट ने डीआईजी एपीएस बासरा और जसपाल सिंह को आईपीसी की धारा 364, 120 बी और 218 के तहत पांच साल की सजा सुनाई थी। धत्त परिवार ने बाद में पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया और मांग की कि उसके मामले में हत्या की धारा भी जोड़ी जाए।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 26 जुलाई 1989 को धत्त को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने दावा किया कि छिपाए गए हथियारों की बरामदगी के लिए उन्हें ब्यास नदी के पास ले जाया गया और वह नदी में कूदकर गायब हो गए। इस घटना के बाद काफी विरोध प्रदर्शन हुए और 1990 में रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का आदेश दिया। 1993 में रिपोर्ट सौंपी गई और बताया गया कि धत्त को पुलिस ने मार डाला है। इसमें अजित सिंह संधू, जसपाल सिंह, सरदूर सिंह और बासरा का नाम था। संधू ने खुदकुशी कर ली थी। सरदूर सिंह की 2008 में मौत हुई है।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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