हर स्कूल को देना होगा 'क्लीन चिट' का सर्टिफिकेट, किताबों को लेकर इस सरकार का बड़ा आदेश
जम्मू-कश्मीर सरकार ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों तथा कोचिंग संस्थानों को क्लीन चिट देने का सख्त आदेश जारी किया है। अब हर संस्था को यह प्रमाण-पत्र देना अनिवार्य होगा कि उसके परिसर में लाइब्रेरी, क्लासरूम, स्टाफ रूम या ऑफिस में कहीं भी कोई आपत्तिजनक, गलत या अलगाववाद को बढ़ावा देने वाली किताब नहीं है।

जम्मू-कश्मीर सरकार ने कश्मीर घाटी के सभी सरकारी, निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों को उनके परिसर में उपलब्ध हर किताब की जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्हें यह प्रमाणित करने वाला सर्टिफिकेट जारी करना होगा कि उनकी संस्था में कोई 'आपत्तिजनक या गलत सामग्री' वाली किताब नहीं है। डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन कश्मीर द्वारा 6 जुलाई को जारी आदेश में सभी हेड्स ऑफ इंस्टीट्यूशंस (HOIs) को अपने स्कूलों, लाइब्रेरी, क्लासरूम, स्टाफ रूम और कार्यालयों में रखी सभी किताबों ( चाहे हाल ही में खरीदी गई हों या पुरानी ) की पूरी स्क्रीनिंग करने को कहा गया है।
आदेश के अनुसार, स्क्रीनिंग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पुस्तक में ऐसा कंटेंट न हो जो…
- किसी धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाए
- छात्रों के लिए अनुपयुक्त हो
- देश के कानूनों या राष्ट्रीय हित के विरुद्ध हो
-शैक्षिक मूल्यों को प्रभावित करे
आदेश में क्या है?
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई आपत्तिजनक सामग्री मिलती है तो संस्था प्रमुख को पुस्तक का शीर्षक, लेखक, प्रकाशक, प्रकाशन वर्ष और उपलब्ध प्रतियों की संख्या की विस्तृत जानकारी सात दिनों के अंदर उच्च अधिकारियों को सौंपनी होगी। सभी प्रधानाचार्यों को यह सर्टिफिकेट देना अनिवार्य होगा कि उनके परिसर में कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं है। मुख्य शिक्षा अधिकारियों को इन सर्टिफिकेटों की व्यक्तिगत निगरानी करनी होगी और आठ दिनों के अंदर डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन, कश्मीर को रिपोर्ट जमा करनी होगी। आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि निर्देशों का पालन न करने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
क्यों लिया गया है यह फैसला
बता दें कि इस महीने की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर सरकार ने स्कूल लाइब्रेरियों से दो किताबें वापस ली थीं, जिनमें 'अलगाववाद पर अत्यधिक गलत सामग्री' पाई गई थी। इसके तुरंत बाद पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने एक प्रकाशक के घर पर छापा मारा था। शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने इस मामले को 'दुर्भाग्यपूर्ण साजिश' बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही थी।
भाजपा के विरोध के बाद कार्रवाई
गौरतलब है कि यह कदम भाजपा द्वारा सरकारी स्कूलों में कुछ किताबों की खरीद का विरोध करने के कुछ दिनों बाद उठाया गया है, जिनमें कथित तौर पर अलगाववादी नेताओं का महिमामंडन किया गया था। यह कार्रवाई करीब एक साल पहले अगस्त 2025 में जम्मू-कश्मीर होम डिपार्टमेंट द्वारा 25 किताबों पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद आई है, जिनमें अरुंधति रॉय और एजी नूरानी जैसी हस्तियों की रचनाएं भी शामिल थीं।
इस आदेश पर सियासत भी तेज
इस आदेश पर विभिन्न राजनीतिक दलों ने नाराजगी जताई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने कहा कि कश्मीर यूनिवर्सिटी से इतिहास और पहचान से जुड़ी किताबों को हटाने की रिपोर्ट और शैक्षणिक संस्थानों का चल रहा ऑडिट बेहद चिंताजनक है। लाइब्रेरी ज्ञान को संरक्षित करने के लिए होती हैं, न कि राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने के लिए। किताबें जलाने या हटाने से इतिहास नहीं मिटता, केवल विद्वता कमजोर होती है। रूहुल्लाह ने आगे कहा कि जो समाज विचारों से डरता है, वह सच्चाई से भी डरता है। शैक्षणिक स्वतंत्रता और इतिहास से जुड़ने का अधिकार कभी भी वैचारिक नियंत्रण का शिकार नहीं होना चाहिए।
वहीं, पीडीपी नेता वहीद पारा ने इसे 'सामूहिक स्मृति को फिर से लिखने की कोशिश' बताया। उन्होंने कहा कि यह हमारे इतिहास को पाठ्यक्रम से मिटाने और चयनात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने की साजिश है, जो आने वाली पीढ़ियों की सोचने और सवाल पूछने की क्षमता को छीन लेगी।
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लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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