इस FIR से बेहतर तो इंस्टाग्राम की स्टोरी, न्यूज चैनल और पूर्व हेड की लड़ाई में SC की पुलिस को फटकार
शीर्ष अदालत ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि प्राथमिकी केवल इसलिए दर्ज की गई क्योंकि शिकायतकर्ता (मीडिया कंपनी) एक प्रभावशाली एजेंसी है। न्यायाधीश ने कहा कि अगर कोई आम नागरिक थाने जाए, तो क्या आप ऐसी FIR दर्ज करेंगे?

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (27 फरवरी) को 'ज़ी राजस्थान' के पूर्व क्षेत्रीय प्रमुख के खिलाफ ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज करने को लेकर राजस्थान पुलिस को फटकार लगाई और कहा कि वह मामला दर्ज करने के तरीके से स्तब्ध है। यह प्राथमिकी 'ज़ी मीडिया' कंपनी की शिकायत पर दर्ज की गई थी। ज़ी राजस्थान के पूर्व क्षेत्रीय प्रमुख आशीष दवे के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी को शिकायत दर्ज करने से पहले पड़ताल करनी चाहिए थी और आरोपों की पुष्टि करनी चाहिए थी।
जस्टिस मेहता ने कहा, ''जिस तरह से प्राथमिकी दर्ज की गई, उससे हम स्तब्ध हैं। प्राथमिकी और शिकायत में जबरन वसूली का कौन सा विशेष आरोप, कंपनी में अपने पद का दुरुपयोग करने का कौन सा विशेष अपराध बताया गया, जिसके आधार पर संबंधित थाने को तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने की आवश्यकता पड़ी? जबकि कोई आरोप ही नहीं था! यह सब मनगढ़ंत कहानी है।'' सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की, “इस FIR से बेहतर तो इंस्टाग्राम की स्टोरीज़ हैं...क्या यह जेम्स बॉन्ड की मूवी है? पहले गोली चलाओ, बाद में सोचो?”
पुलिस को कड़ी फटकार
अदालत ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि प्राथमिकी केवल इसलिए दर्ज की गई क्योंकि शिकायतकर्ता (मीडिया कंपनी) एक प्रभावशाली एजेंसी है। न्यायाधीश ने कहा, ''अगर कोई आम नागरिक थाने जाए, तो क्या आप ऐसी प्राथमिकी दर्ज करेंगे? इस प्राथमिकी में कुछ भी नहीं है। सिर्फ इसलिए कि शिकायतकर्ता एक प्रभावशाली एजेंसी है, आपने यूं ही प्राथमिकी दर्ज कर ली।''
पुलिस ने लाल कालीन बिछाया और प्राथमिकी दर्ज की
उन्होंने कहा, ''अगर आप चाहें तो हम राजस्थान पुलिस के आचरण पर गंभीर टिप्पणी कर रहे हैं। यह क्या प्राथमिकी है? अगर कोई आम नागरिक थाने जाता है, तो उसे ऐसे आरोप लगाने पर बाहर निकाल दिया जाएगा। यह एक ऐसा तथ्य है जिसे आप नकार नहीं सकते। शिकायतकर्ता इतना विशेषाधिकार प्राप्त था कि उसके लिए पुलिस ने लाल कालीन बिछाया और प्राथमिकी दर्ज की।'' दवे ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसमें उनके खिलाफ प्राथमिकी को निरस्त करने से इनकार कर दिया गया था।
निचली अदालत ने नहीं मिली थी राहत
हाई कोर्ट के आदेश में कहा गया था, ''मीडिया पेशेवरों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे धमकी या जबरन वसूली के माध्यम से किसी को भी अनुचित नुकसान पहुंचाने से बचें।'' चैनल प्रबंधन ने धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक कदाचार के आरोपों पर जयपुर के अशोक नगर थाने में अपने तत्कालीन क्षेत्रीय प्रमुख दवे और अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। दवे ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसे न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने राजस्थान उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसने जयपुर पुलिस को छह सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने और सबूत पेश करने का निर्देश दिया था।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


