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हथियार छोड़ने को तैयार नक्सली, खुद ही बताने लगे तारीख; तीन राज्यों से क्या गुजारिश?

हथियार छोड़ने को तैयार नक्सली, खुद ही बताने लगे तारीख; तीन राज्यों से क्या गुजारिश?

संक्षेप:

माओवादियों के प्रवक्ता ने तीनों राज्य सरकारों से अपील की है कि माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में संचालन अस्थायी रूप से निलंबित कर दें, जबकि एमएमसी कैडर भी इस अवधि में सभी सशस्त्र और संगठनात्मक गतिविधियां बंद रखेंगे।

Nov 29, 2025 07:04 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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मध्य भारत के माओवादी गढ़ में एक महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) की महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) स्पेशल जोनल कमेटी ने घोषणा की है कि उसके कैडर 1 जनवरी 2026 तक हथियार डालने और मुख्यधारा में शामिल होने को तैयार हैं, बशर्ते तीनों राज्य सरकारें स्पष्ट सुरक्षा गारंटी दें और पारदर्शी पुनर्वास प्रक्रिया सुनिश्चित करें। यह पेशकश एक पत्र के माध्यम से की गई है, जो एमएमसी प्रवक्ता अनंत द्वारा जारी किया गया और महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को संबोधित है।

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यह घोषणा उस समय आई है जब केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हाल के वर्षों में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सुरक्षा बलों ने 270 से अधिक माओवादियों को मार गिराया है, जबकि 1225 ने आत्मसमर्पण किया है और 680 गिरफ्तार हुए हैं जिनमें शीर्ष नेता भी शामिल हैं। इसी बीच रायपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी में DGP/IGP सम्मेलन (60वां) भी आयोजित हुआ।

सामूहिक ‘सम्मानजनक वापसी’ की पेशकश, बिखरे हुए सरेंडर का विरोध

MMC कमेटी ने कहा कि उसका संगठन व्यक्तिगत या बिखरे हुए आत्मसमर्पण के बजाय एक संगठित, सामूहिक और सम्मानजनक पुनर्मिलन को प्राथमिकता देता है। पत्र में उल्लेख है कि सरकारों की पिछली पुनर्वास योजनाएं कागजों तक सीमित रही हैं और सरेंडर कर चुके कई कैडरों तथा उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाई।

अनंत ने अपने संदेश में लिखा कि 1 जनवरी 2026 संगठन की अंतिम और गैर-परक्राम्य तारीख होगी। उन्होंने कहा- हम अपने साथियों को एक-एक करके हथियार छोड़ने को नहीं कह रहे हैं। हम सभी एक ही दिन साथ चलेंगे, ताकि एकता बनी रहे और हम सम्मानजनक स्थिति से बातचीत कर सकें।

दोनों पक्षों द्वारा ऑपरेशन रोकने की अपील

संगठन ने सरकारों से 1 जनवरी 2026 तक आपसी हमला बंद करने की अपील की है। MMC का दावा है कि यदि सरकारें कार्रवाई रोकेंगी तो उनके कैडर भी सभी सशस्त्र गतिविधियाँ और संगठनात्मक गतिविधियां रोक देंगे। संगठन का कहना है कि यह प्रस्ताव एक सामूहिक पार्टी रणनीति है और इसे किसी तरह की बगावत या कमजोरी के रूप में न देखा जाए।

‘संघर्ष लोगों के खिलाफ नहीं था’- नेताओं के हवाले से बयान

पत्र में कहा गया है कि: हमारी लड़ाई हमेशा लोगों के लिए रही है, उनके खिलाफ नहीं। बदले हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालात में हथियार छोड़ना कायरता नहीं, बल्कि संगठन और जनता के हित में एक सामरिक निर्णय है। पत्र में यह भी बताया गया है कि केंद्रीय समिति के कई वरिष्ठ नेता पहले ही छत्तीसगढ़ सरकार की ‘पोना मार्गेम’ पुनर्वास पहल स्वीकार कर चुके हैं, और MMC भी इस दिशा में आगे बढ़ने को तैयार है।

पत्रकारों और जनमत निर्माताओं से सहयोग की अपील

MMC ने मीडिया से अपील की है कि वे इस संवेदनशील प्रक्रिया पर ऐसी रिपोर्टिंग करें जो विश्वास का माहौल बनाए, न कि किसी प्रकार के अविश्वास या भय को जन्म दे। आंतरिक संदेश में MMC नेतृत्व ने अपने कैडरों से कहा है कि वे नेतृत्व से लगातार संपर्क में रहें, किसी भी तरह का भावनात्मक या जल्दबाजी भरा फैसला न लें और संगठन के सामूहिक निर्देशों का इंतजार करें।

संपर्क का विशेष रेडियो फ्रीक्वेंसी जारी

MMC के प्रवक्ता ने बताया कि आने वाले एक महीने तक संगठन से संपर्क के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी 435.715 पर सुबह 11 से 11:15 बजे तक बात की जा सकती है। इसके अलावा, बीजापुर में जारी एक अलग बयान में MMC ने दोहराया कि वे छत्तीसगढ़ सरकार की ‘पोना मार्गेम’ योजना को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।

तीनों राज्यों की सरकारें अभी इस पेशकश पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं कर पाई हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सामूहिक आत्मसमर्पण सफल होता है, तो यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा समन्वित प्रयास होगा और मध्य भारत में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को निर्णायक झटका लगेगा। केंद्र सरकार के 31 मार्च 2026 के लक्ष्य के मद्देनजर यह कदम सकारात्मक माना जा रहा है।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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