Hindi NewsIndia NewsElection commission SIR notice explained sent to the former Navy Chief What to do
चुनाव आयोग का 'SIR' नोटिस क्या है? पूर्व नेवी चीफ को भी भेजा गया, क्या आपको डरने की जरूरत?

चुनाव आयोग का 'SIR' नोटिस क्या है? पूर्व नेवी चीफ को भी भेजा गया, क्या आपको डरने की जरूरत?

संक्षेप:

यह प्रक्रिया 2025 से शुरू हुई, खासकर बिहार से, और अब पश्चिम बंगाल, गोवा, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल समेत कई राज्यों में चल रही है। फाइनल वोटर लिस्ट फरवरी 2026 में प्रकाशित होगी। जानिए विवाद क्या है?

Jan 12, 2026 08:13 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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पिछले साल से ही देश भर में चुनाव आयोग की एक बड़ी मुहिम चर्चा में है- विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR। यह मतदाता सूची को पूरी तरह से साफ-सुथरा, सटीक और अपडेट करने की एक असाधारण प्रक्रिया है। इसी SIR के दौरान कई बड़े-बड़े नामों को भी नोटिस मिले हैं। हाल ही में पूर्व नेवी चीफ एडमिरल अरुण प्रकाश (रिटायर्ड) को भी चुनाव आयोग की तरफ से एक नोटिस मिला, जिसमें उनसे अपनी और अपनी पत्नी की पहचान साबित करने को कहा गया। जब इतने बड़े पद पर रहे व्यक्ति को अपनी नागरिकता/पहचान साबित करने का नोटिस मिल सकता है, तो आम जनता के मन में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर यह नोटिस क्या होता है और क्या हर किसी को परेशान होने की जरूरत है?

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1. आखिर क्या है SIR (एसआईआर)?

SIR का मतलब है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन। यह चुनाव आयोग द्वारा चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान है। इसका मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) को पूरी तरह से 'शुद्ध' और 'अपडेट' करना है।

मकसद: वोटर लिस्ट से उन लोगों के नाम हटाना जो अब वहां नहीं रहते, जिनका निधन हो चुका है, या जिनके नाम दो जगह हैं। साथ ही, नए पात्र वोटरों को जोड़ना।

प्रक्रिया: इसमें बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर सर्वे करते हैं। अगर सर्वे के दौरान किसी वोटर की जानकारी में गड़बड़ी मिलती है या वह घर पर नहीं मिलता, तो उसे 'सत्यापन' की श्रेणी में डाल दिया जाता है।

2. पूर्व नेवी चीफ के साथ क्या हुआ?

गोवा में रहने वाले 82 वर्षीय पूर्व नेवी चीफ एडमिरल अरुण प्रकाश और उनकी पत्नी को चुनाव आयोग का नोटिस मिला।

नोटिस में क्या था: उन्हें कहा गया कि वे अपनी पहचान साबित करने के लिए तय तारीख पर अधिकारियों के सामने पेश हों, वरना उनका नाम वोटर लिस्ट से कट सकता है।

विवाद क्यों?

भारत-पाकिस्तान के 1971 के युद्ध में अपनी भूमिका के लिए वीर चक्र से सम्मानित एडमिरल प्रकाश को एसआईआर ‘सुनवाई नोटिस’ के तहत अपनी पहचान स्थापित करने के लिए निर्वाचन अधिकारी के समक्ष उपस्थित रहने को कहा गया है। एडमिरल प्रकाश ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई कि BLO उनके घर तीन बार आए थे, फिर भी उन्हें बुजुर्ग अवस्था में 18 किमी दूर जाकर पहचान साबित करने को कहा गया। यह सिस्टम की खामी को दिखाता है।

एडमिरल प्रकाश ने एक्स पर लिखा- 'मुझे न तो किसी विशेष सुविधा की जरूरत है, न ही मैंने 20 साल पहले सेवानिवृत्ति के बाद कभी ऐसी कोई मांग की है। मैंने और मेरी पत्नी ने आवश्यकतानुसार एसआईआर प्रपत्र भरे थे और ईसी वेबसाइट पर गोवा की प्रारूप मतदाता सूची 2026 में अपने नाम देखकर प्रसन्न थे। हालांकि, हम ईसी नोटिस का पालन करेंगे।’ उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा- ‘क्या मैं निर्वाचन आयोग को यह इंगित कर सकता हूं कि (क) यदि एसआईआर प्रपत्र आवश्यक जानकारी नहीं जुटा रहे हैं तो उन्हें संशोधित किया जाना चाहिए; (ख) बीएलओ (बूथ स्तर अधिकारी) ने हमसे तीन बार मुलाकात की और वे अतिरिक्त जानकारी मांग सकते थे; (ग) हम 82 एवं 78 वर्ष के हैं और हमें 18 किलोमीटर दूर दो अलग-अलग तिथियों पर उपस्थित होने को कहा गया है।’

3. यह नोटिस क्यों भेजा जा रहा है?

चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट (कच्ची सूची) के बाद उन लोगों को नोटिस भेजा है जिनका वेरिफिकेशन पूरी तरह नहीं हो पाया है। इसके कुछ मुख्य कारण हैं:

लिगेसी डेटा मैच न होना: कई राज्यों में (जैसे गोवा, यूपी) आयोग यह चेक कर रहा है कि क्या वोटर पुराने रिकॉर्ड (जैसे 2002 या उससे पहले की लिस्ट) से जुड़ा है। अगर डेटा मैच नहीं होता, तो नोटिस भेजा जाता है।

दस्तावेजों की कमी: अगर फॉर्म भरते समय कोई कागज कम रह गया हो।

BLO से चूक: कभी-कभी अधिकारी द्वारा सही से वेरिफिकेशन न कर पाने पर सिस्टम अपने आप नोटिस भेज देता है।

4. क्या आपको डरने की जरूरत है?

जवाब है: नहीं, डरने की नहीं, बस 'सतर्क' रहने की जरूरत है। यह नोटिस हर किसी को नहीं भेजा जा रहा है। यह सिर्फ उन्हीं को मिल रहा है जिनके वोटर रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी पाई गई है।

चेक करें: अगर आपके राज्य में SIR चल रहा है (जैसे यूपी, गोवा, बिहार, पश्चिम बंगाल आदि में खबरें हैं), तो आपको अपना नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में चेक करना चाहिए।

अगर नोटिस मिले तो: इसे नजरअंदाज न करें। यह आपकी नागरिकता पर सवाल नहीं है, बल्कि वोटर लिस्ट में नाम बनाए रखने की प्रक्रिया है। दिए गए समय पर अपने आईडी प्रूफ (आधार, पासपोर्ट, पुराने वोटर कार्ड आदि) के साथ अधिकारी से मिलें।

Election commission SIR notice explained

5. अभी आपको क्या करना चाहिए?

लिस्ट में नाम देखें: चुनाव आयोग की वेबसाइट या 'Voter Helpline App' पर जाकर अपना नाम सर्च करें।

नोटिस का जवाब दें: अगर घर पर कोई नोटिस आया है, तो उसमें लिखी तारीख पर जाकर दस्तावेज जमा करें।

अफवाहों से बचें: यह NRC (एनआरसी) नहीं है, यह सिर्फ वोटर लिस्ट को अपडेट करने की एक सामान्य (लेकिन सख्त) प्रक्रिया है।

SIR नोटिस एक रूटीन प्रक्रिया का हिस्सा है जिसे चुनाव आयोग पारदर्शी चुनाव के लिए कर रहा है। पूर्व नेवी चीफ का मामला यह दिखाता है कि सिस्टम में कुछ कमियां हैं जिससे बुजुर्गों और प्रतिष्ठित नागरिकों को परेशानी हो रही है, लेकिन आम जनता के लिए यह सिर्फ अपना रिकॉर्ड सही करवाने का एक मौका है।

Amit Kumar

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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