अपना फॉर्म ठीक कर ले चुनाव आयोग, पूर्व नौसेना प्रमुख को भी SIR नोटिस, पूछी गई पहचान
पूर्व नौसेना प्रमुख ऐडमिरल अरुण प्रकाश ने बताया कि एसआईआर का फॉर्म भरे जाने के बाद भी उन्हें और उनकी पत्नी को दफ्तर में पहचान साबित करने के लिए बुलाया गया है। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

देशभर में कई राज्यो में चुनाव आयोग स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) करवा रहा है। प्रक्रिया को लेकर बहुत सारे लोगों ने सवाल भी खड़े किए हैं। कई लोगों का कहना है कि जरूरी फॉर्म भरने के बाद भी उनको अपनी पहचान साबित करने के लिए पेश होने का नोटिस भेजा गया है। भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख ऐमिरल अरुण प्रकाश (रिटायर्ड) ने भी अपनी आपबीती बताते हुए एसआईआर की प्रक्रिया पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा. अगर एसआईआर फॉर्म में लोगों की जानकारी को ठीक से नहीं देखा जा रहा है तो इसमें सुधार की जरूरत है। पूर्व नौसेना प्रमुख ने कहा कि फॉर्म भरने के बाद भी चुनाव आयोग की टीम ने उनको और उनकी पत्नी को दफ्तर में पेश होकर पहचान साबित करने के लिए कहा है।
उन्होंने कहा, मुझे और मेरी पत्नी को अलग-अलग नोटिस मिले हैं और कहा गया है कि दफ्तर में हाजिर होकर अपनी पहचान साबित करें। उन्होंने कहा कि आखिर यह प्रक्रिया किस तरह की है। अगर एसआईआर फॉर्म से सभी जानकारियां नहीं मिल रही हैं तो इसमें बदलाव करें। उन्होंने कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) तीन बार उनके घर आया और अगर किसी अन्य दस्तावेज की जरूरत थी तो उसे तभी मांग लेना चाहिए था।

ऐडमिरल अरुण प्रकाश ने आगे कहा, मेरी उम्र 82 साल और पत्नी की उम्र 78 साल है। दोनों को अलग-अलग तारीख पर अलग-अलग जगह पर पेश होने को कहा गया है। इसके बीच 18 किलोमीटर की दूरी है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐडमिरल अरुण प्रकाश को 17 जनवरी और उनकी पत्नी कुमकुम को 19 जनवरी को बुलाया गया है।
ईसी के अधिकारी नहीं माने तो क्या होगा- ऐडमिरल प्रकाश
ऐडमिरल प्रकाश ने कहा कि वह कोई अलग से स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा, मुझे खास समझकर अलग से सुविधा ना दें। मुझे रिटायर हुए 20 साल से ज्यादा हो गए हैं। मैंने और मेरी पत्नी ने अच्छी तरह फॉर्म भरा था और इस हिसाब से गोवा की निर्वाचन सूची में मेरा नाम होना चाहिए था। बता दें कि ऐडमिरल अरुण प्रकाश ने नौसेना में 4 दशक तक अपनी सेवाएं दीं और वह नौसेना प्रमुख के पद तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि उनकी पहली पोस्टिंग 1968 में गोवा में हुई थी। उन्होंने कहा, दिक्कत यह है कि अगर मैं चुनाव आयोग के अधिकारियों को संतुष्ट नहीं कर पाया तब क्या होगा?
एक अन्य रिटायर्ड अधिकारी को मिला था ऐसा ही नोटिस
दक्षिण गोवा से सांसद और रिटायर्ड नौसेना अधिकारी विरियातो फर्नांडीज को भीइसी तरह का नोटिस मिला था। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने से पहले ही आयोग ने उनकी पूरी जांच पड़ताल की थी। उन्होंने कहा कि 1989 से ही उनका नाम वोटर लिस्ट में था।
क्यों चल रहा है एसआईआर
चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को साफ सुथरी करने और डुप्लीकेट और मृत व्यक्तियों की पहचान करने के लिए यह पूरी प्रक्रिया हो रही है। बिहार में चुनाव से पहले वहां एसआईआर करवाया गया। इसके बाद 12 राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। इनमें से ज्यादातर राज्यों में चुनाव होने हैं।

लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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