Hindi NewsIndia NewsElection Commission has no legal basis for SIR will have to return to ballot paper said manish tewari
चुनाव आयोग के पास SIR का कानूनी अधार नहीं, बैलेट पेपर की ओर लौटना होगा; LS में बोली कांग्रेस

चुनाव आयोग के पास SIR का कानूनी अधार नहीं, बैलेट पेपर की ओर लौटना होगा; LS में बोली कांग्रेस

संक्षेप:

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने लोकसभा में कहा कि चुनाव आयोग के पास एसआईआर कराने का कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि अब बैलेट पेपर की ओर लौटना जरूरी हो गया है। 

Dec 09, 2025 01:32 pm ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने मंगलवार को लोकसभा में दावा किया कि निर्वाचन आयोग के पास विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने का कोई कानूनी आधार नहीं है और इस प्रक्रिया को बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने सदन में चुनाव सुधारों पर चर्चा की शुरुआत करते हुए यह भी कहा कि 2023 के निर्वाचन कानून में बदलाव कर मुख्य निर्वाचन आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की चयन समिति में राज्यसभा में विपक्ष के नेता और प्रधान न्यायाधीश को शामिल किया जाए, फिर से मतपत्रों से चुनाव कराए जाएं तथा चुनावों से पहले लोगों के खातों में नकदी भेजने के चलन पर अंकुश लगाया जाए।

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मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन में शामिल हों CJI और राज्यसभा में विपक्ष का नेता

चंडीगढ़ से लोकसभा सदस्य ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि बहुत सारे लोगों को निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने की जरूरत पड़ रही है। उन्होंने कहा, ‘‘2023 में जो निर्वाचन कानून बना था, उसमें संशोधन होना चाहिए। चयन समिति में दो और लोग जोड़े जाएं। राज्यसभा में विपक्ष के नेता और प्रधान न्यायाधीश को इसमें शामिल किया जाए।’’

उनका कहना था कि अगर ऐसी समिति बनेगी तो लोगों के मन में जो संदेह है, उसका समाधान करने में मदद मिलेगी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा-शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के तहत तीन सदस्यीय चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और एक कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।

किस आधार पर हो रहा एसआईआर?

तिवारी ने दावा किया, ‘‘कई प्रदेशों में एसआईआर हो रहा है, लेकिन निर्वाचन आयोग के पास यह कवायद कराने का कोई कानूनी आधार नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि सरकार को सदन के पटल पर रखना चाहिए कि किन निर्वाचन क्षेत्रों में गड़बड़ी है और एसआईआर किन कारणों से हो रहा है। उनका कहना था, ‘‘देश को यह जानने का हक है कि यह एसआईआर किस आधार पर हो रहा है।’’

तिवारी ने कहा कि एसआईआर को बंद कराने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर पहले कुछ गलत हुआ है तो उसके आधार पर आज की गलती को सही नहीं ठहराया जा सकता। कांग्रेस नेता ने कहा कि निर्वाचन आयोग को एसआईआर कराने का अधिकार है या नहीं, इस बुनियादी सवाल पर चर्चा नहीं हो रही। तिवारी का कहना था, ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण है कि न्यायपालिका में इस सवाल पर विचार नहीं हुआ।’’

बैलेट पेपर से वोटिंग की ओर लौटा जाए

उनका कहना था कि आयोग को मतदाता सूची से संबंधित मशीन से पढ़ने योग्य डेटा उपलब्ध कराना चाहिए। ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) से जुड़ा विषय उठाते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मैं नहीं कर रहा हूं कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ हो रही है, लेकिन लोगों में यह चिंता है कि ईवीएम से छेड़छाड़ हो सकती है।’’ कांग्रेस नेता ने इस बात पर जोर दिया कि या तो 100 फीसदी वीवीपैट की गणना हो या फिर से मतपत्र से मतदान की ओर लौटा जाए।

उन्होंने कहा कि कानून में संशोधन करके यह प्रावधान शामिल करना चाहिए कि कर्ज लेने की एक निश्चित सीमा को पार करने वाले प्रदेश चुनावों से पहले नकदी का हस्तांतरण नहीं कर सकते। तिवारी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘राष्ट्रीय खजाने से आप चुनाव नहीं जीत सकते, आप लोकतंत्र को दिवालिया नहीं बना सकते।’’ उन्होंने कहा कि भारत में उस वक्त सभी लोगों को मताधिकार दिया गया जब कई प्रमुख देशों में कुछ चुनिंदा लोगों को ही वोट देने का अधिकार था।

तिवारी ने यह भी कहा कि आजाद भारत में सबसे बड़ा चुनाव सुधार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय हुआ था जब मतदान की आयुसीमा 21 साल से घटाकर 18 वर्ष की गई। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने कहा था कि देश में अलग-अलग समय पर अलग-अलग चुनाव हो सकते हैं, ऐसे में ‘एक देश, एक चुनाव’ का कोई औचित्य नहीं बचता।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha
अंकित ओझा पिछले 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अंकित ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से स्नातक के बाद IIMC नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है। इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है। राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर कार्य करने का उनके पास अनुभव है। इसके अलावा बिजनेस और अन्य क्षेत्रों की भी समझ रखते हैं। हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही पंजाबी और उर्दू का भी ज्ञान है। डिजिटल के साथ ही रेडियो और टीवी के लिए भी काम कर चुके हैं। और पढ़ें
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