MVA शासन में सिद्धिविनायक में हुई चंदे की लूट, अयोध्या मंदिर विवाद के बीच एकनाथ शिंदे का दावा
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष पर करारा हमला किया। विधानसभा के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन विधान परिषद में शिंदे ने अतीत में मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर के दान पात्र को लूटे जाने का आरोप लगाया।

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष पर करारा हमला किया। विधानसभा के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन विधान परिषद में शिंदे ने अतीत में मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर के दान पात्र को लूटे जाने का आरोप लगाया। साथ ही जानना चाहा कि उस समय की सरकार ने इसकी जांच का आदेश क्यों नहीं दिया। शिंदे का यह इशारा तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले प्रशासन की ओर था। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में कथित चोरी से श्रद्धालुओं को दुख पहुंचा है। शिंदे ने जोर देकर कहा कि इस मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
तब जांच के लिए आदेश क्यों नहीं
शिंदे ने शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे का नाम लिए बगैर आरोप लगाया कि जो लोग अयोध्या मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी की आलोचना कर रहे हैं, उन्हीं के सहयोगियों ने देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक सिद्धिविनायक मंदिर को लूटने का पाप किया था। शिंदे ने कहाकि जो लोग (राम मंदिर को प्राप्त दान में चोरी की) आलोचना कर रहे हैं...उनके ही साथियों ने सिद्धिविनायक मंदिर का दान-पात्र लूटने का पाप किया था। उस समय की सरकार ने इसकी जांच के आदेश क्यों नहीं दिए?
शिवसेना प्रमुख शिंदे ने जोर देकर कहा कि जिस भव्य राम मंदिर का जनवरी 2024 में उद्घाटन किया गया उसमें प्राप्त दान के प्रबंधन में किसी भी तरह की अनियमितता का समर्थन कोई नहीं कर सकता। विपक्ष द्वारा लाए गए ‘अंतिम सप्ताह प्रस्ताव’ का जवाब देते हुए उन्होंने प्रतिद्वंद्वी शिवसेना (उबाठा) पर निशाना साधा। गौरतलब है कि अयोध्या में बने राम मंदिर में चंदा चोरी का विवाद चरम पर है। इस मामले में एसआईटी का गठन भी हो चुका है। फिलहाल जांच जारी है।
क्या बोले आदेश बांदेकर
विधान परिषद में शिंदे के बयान के बाद, जाने-माने मराठी अभिनेता आदेश बांदेकर (जो पहले श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रह चुके हैं) ने कहाकि अगर वह किसी भी गड़बड़ी के दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें मंदिर के सामने फांसी दी जानी चाहिए। बांदेकर पूर्व में अविभाजित शिवसेना से जुड़े थे। शिंदे ने पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे का नाम लिए बिना कहाकि हिंदुत्व कोई ऐसी टी-शर्ट नहीं है जिसे जब चाहें बदल लिया जाए। क्या आपका हिंदुत्व सिद्धिविनायक को लूटना है? क्या सावरकर को ‘माफी-वीर’ कहने वालों की गोद में बैठना हिंदुत्व है? क्या (शिवसेना संस्थापक) बालासाहेब (ठाकरे) के आदर्शों को छोड़ना हिंदुत्व है?


