
अगले हफ्ते फैसला लीजिए या सजा के लिए तैयार रहिए… दक्षिणी राज्य के स्पीकर पर क्यों भड़के CJI
पीठ ने विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय की ओर से दायर एक अलग याचिका पर भी नोटिस जारी किया जिसमें अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने के लिए आठ सप्ताह का और समय बढ़ाने का अनुरोध किया गया था।
देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष द्वारा भारत राष्ट्र समिति (BRS) के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए 10 विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिकाओं पर अभी तक फैसला नहीं लेने पर कड़ी आपत्ति जताई है। मामले की सुनवाई के दौरान CJI गवई ने स्पीकर द्वारा इस मामले में की जा रही लेट-लतीफी पर मौखिक रूप से कहा कि तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष के आचरण से न्यायालय की घोर अवमानना जाहिर होती है।
CJI गवई, जस्टिस विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने बीआरएस विधायक कौशिक रेड्डी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की। रेड्डी ने बीआरएस से कांग्रेस पार्टी में शामिल होने वाले 10 विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
स्पीकर को CJI की दो टूक
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा,"तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष ने न्यायालय की घोर अवमानना की है।" CJI ने दो टूक कहा, “या तो अगले हफ्ते तक फैसला सुनाना होगा या अवमानना का सामना करना होगा। हम पहले ही कह चुके हैं कि उन्हें संवैधानिक छूट प्राप्त नहीं है... यह उन्हें तय करना है कि वे अपना नया साल कहाँ बिताना चाहते हैं।”
बता दें कि इससे पहले, 31 जुलाई, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष को अयोग्यता याचिकाओं पर 3 महीने के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया था। आज कोर्ट ने स्पीकर को अवमानना का नोटिस भी थमा दिया। हालांकि, कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष और अन्य को अगले आदेश तक व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी।
स्पीकर ने मांगा था और आठ सप्ताह का समय
पीठ ने विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय की ओर से दायर एक अलग याचिका पर भी नोटिस जारी किया जिसमें अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने के लिए आठ सप्ताह का और समय बढ़ाने का अनुरोध किया गया था। विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर से वकील श्रवण कुमार के साथ उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अभिषेक सिंघवी ने कहा कि उन्होंने समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है।
एक वकील ने बताया कि चार अयोग्यता याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और तीन मामलों में साक्ष्य दर्ज करने का काम पूरा हो चुका है। इस पर CJI गवई ने कहा, ‘‘यह पूरी हो जानी चाहिए थी... यह घोर अवमानना है... यह उन्हें तय करना है कि वे नया साल कहां मनाना चाहते हैं।’’ इसके बाद पीठ ने मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय कर दिया। रोहतगी ने पीठ को आश्वासन दिया कि वह व्यक्तिगत रूप से विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय को न्यायालय की भावनाओं से अवगत कराएंगे और उम्मीद है कि चार हफ्ते में फैसला ले लिया जाएगा।
BRS नेताओं ने दायर की थी अवमानना याचिका
शीर्ष अदालत ने 10 नवंबर को तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अवमानना कार्रवाई के अनुरोध वाली याचिका पर 17 नवंबर को सुनवाई करने पर सहमति जताई थी। यह अवमानना याचिका बीआरएस नेताओं केटी रामाराव, पाडी कौशिक रेड्डी और केओ विवेकानंद द्वारा दायर कई रिट याचिकाओं पर प्रधान न्यायाधीश एवं जस्टिस एजी मसीह की पीठ की ओर से दिए गए 31 जुलाई के फैसले से सामने आई है।
शीर्ष अदालत ने दोहराया कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करते समय विधानसभा अध्यक्ष एक न्यायाधिकरण के रूप में कार्य करते हैं और इसलिए उन्हें ‘संविधान के तहत प्राप्त छूट’ नहीं मिलती है। दसवीं अनुसूची दलबदल के आधार पर अयोग्यता के प्रावधानों से संबंधित है। (भाषा इनपुट्स के साथ)

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




