Hindi NewsIndia NewsDue to a mistake by the High Court staff the accused was granted bail the Supreme Court took this action
गलती से आरोपी को मिली बेल, सुप्रीम कोर्ट ने फिर भी नहीं बदला आदेश; क्या वजह

गलती से आरोपी को मिली बेल, सुप्रीम कोर्ट ने फिर भी नहीं बदला आदेश; क्या वजह

संक्षेप:

यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया और आरोपी की जमानत बहाल कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार जब जज किसी आदेश पर हस्ताक्षर कर देते हैं, तो उसे बदला नहीं जा सकता।

Jan 19, 2026 06:20 am ISTNisarg Dixit हिन्दुस्तान टीम
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सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि कोर्ट हस्ताक्षर किए गए आदेश को रद्द नहीं कर सकते, गलती कितनी भी अजीब क्यों न हो? सुप्रीम कोर्ट ने नारकोटिक्स केस में आरोपी एक व्यक्ति की जमानत फिर से बहाल कर दी है। शीर्ष अदालत ने माना कि पटना हाईकोर्ट ने पहले से दी गई बेल को वापस लेने में शक्तियों से बाहर जाकर काम किया था।

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क्या है मामला?

पटना हाई कोर्ट में एक नशीले पदार्थों के मामले के आरोपी की जमानत पर सुनवाई हुई। कोर्ट के स्टाफ से गलती हो गई। आदेश लिखते समय उसने गलती से 'रिजेक्टेड' की जगह 'अलाउड' लिख दिया। जब हाई कोर्ट को इस गलती का पता चला, तो उन्होंने अपना पिछला आदेश रद्द कर दिया और जमानत वापस ले ली।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

आखिरकार यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया और आरोपी की जमानत बहाल कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार जब जज किसी आदेश पर हस्ताक्षर कर देते हैं, तो उसे बदला नहीं जा सकता।

कानून (सीआरपीसी की धारा 362) कहता है कि कोर्ट अपने ही फैसले की समीक्षा नहीं कर सकता। वह सिर्फ छोटी-मोटी गणितीय या क्लर्क वाली गलतियों को सुधार सकता है, लेकिन पूरे फैसले को पलट नहीं सकता। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह एक अजीब स्थिति है कि एक स्टाफ की गलती से जमानत मिल गई, लेकिन कानून के नियमों का पालन करना ज्यादा जरूरी है। कोर्ट अपनी शक्तियों से बाहर जाकर हस्ताक्षरित आदेश को रद्द नहीं कर सकता।

Nisarg Dixit

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Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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