DU प्रोफेसर मर्डर मिस्ट्री: फर्जी ID, नकली पुलिस बैज... बंगाल के खूंखार दंपति की नकली दुनिया बेनकाब

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दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल की हत्या की जांच अब सिर्फ एक संपत्ति विवाद की हत्या नहीं, बल्कि एक बड़े फर्जीवाड़े और अपराधी गिरोह की ओर इशारा कर रही है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

DU प्रोफेसर मर्डर मिस्ट्री: फर्जी ID, नकली पुलिस बैज... बंगाल के खूंखार दंपति की नकली दुनिया बेनकाब

दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल हत्याकांड की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस ने आरोपी दंपति के बर्धमान स्थित घर से फर्जी पहचान पत्र, पश्चिम बंगाल पुलिस के नकली बैज, जाली नोटों के बंडल और सैकड़ों कपड़ों का जखीरा बरामद किया है। बता दें कि शिवाजी कॉलेज में सहायक प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल ( 48) का शव पिछले सप्ताह वसुंधरा एन्क्लेव के सत्यम अपार्टमेंट्स स्थित उनके फ्लैट में मृत पाया गया था। पुलिस जांच में सामने आया है कि हत्या उनके किरायेदार दंपति रामप्रसाद दास और बनश्री दास ने संपत्ति विवाद को लेकर की थी। दोनों को बर्धमान से गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि उनके नाबालिग बेटे को हिरासत में लिया गया है।

पुलिस के अनुसार, रामप्रसाद दास बर्धमान में सैनिटरीवेयर की दुकान चलाता था और काम के सिलसिले में नियमित रूप से दिल्ली, खासकर करोल बाग आता-जाता था। आरोपी पहले भी पॉल के फ्लैट जा चुका था, इसलिए उसे इलाके, घर की बनावट और आने-जाने की पूरी जानकारी थी।

नकली सामानों का भंडार

छापेमारी के दौरान पुलिस को आरोपी के घर से कई फर्जी आईडी कार्ड, पश्चिम बंगाल पुलिस के बैज से मिलते-जुलते नकली बैज और रेलवे टिकट चेकर का फर्जी बैज बरामद हुआ। इसके अलावा नोटों के गट्ठों जैसे दिखने वाले बंडल मिले, जिनके ऊपर-नीचे असली नोट लगाए गए थे और बीच में साधारण कागज के टुकड़े भरे गए थे। पुलिस को 100 से अधिक कमीजें और कई घड़ियां भी मिली हैं, जिनका कोई वैध स्रोत आरोपी नहीं बता सका। दिल्ली पुलिस ने इस मामले की जानकारी पश्चिम बंगाल पुलिस को दे दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि दंपति पहले भी चोरी, धोखाधड़ी या अन्य अपराधों में शामिल था या नहीं।

सुनियोजित हत्या

जांच से पता चला है कि हत्या अचानक नहीं, बल्कि पूरी तरह से पूर्व नियोजित थी। आरोपी पति के मोबाइल फोन में प्रोफेसर पॉल की गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर और उनके फ्लैट की तस्वीरें मिली हैं। पूछताछ में आरोपी ने जनवरी और मार्च में वसुंधरा एन्क्लेव की रेकी करने और तस्वीरें खींचने की बात स्वीकार की है। 1 जून को आरोपी ने किराए के भुगतान के बहाने प्रोफेसर से व्हाट्सएप कॉल पर बात की थी। इसी दौरान पॉल ने बताया कि वह 3 जून को घर पर रहेंगी। पुलिस को शक है कि इसी जानकारी के आधार पर हत्या की योजना अंतिम रूप दी गई।

पहचान छिपाने की कोशिश

हत्या के बाद आरोपी दंपति ने अपनी पहचान छिपाने के लिए तीन बार कपड़े बदले। बताया जा रहा है कि दिल्ली पहुंचने पर, हत्या के तुरंत बाद और ट्रेन में चढ़ने से पहले आरोपी दंपति ने कपड़े बदले थे। पुलिस के अनुसार, उन्होंने आनंद विहार रेलवे स्टेशन तक टैक्सी ली, फिर नई दिल्ली स्टेशन तक ऑटो लिया और वहां फिर से कपड़े बदले। नाबालिग बेटे के साथ वे ट्रेन से बर्धमान गए, लेकिन सीधा रास्ता नहीं लिया, बल्कि घुमावदार रूट अपनाकर संदेह से बचने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपना स्कूटी घर से 300 मीटर दूर बाजार में खड़ा किया था, जिसका पता पुलिस को 24 घंटे की तलाश के बाद लगा। पुलिस का मानना है कि हत्यारों ने जानबूझकर सबूत मिटाने और पहचान छिपाने की पूरी तैयारी की थी।

पुलिस के अनुसार, प्रोफेसर का मोबाइल फोन आरोपी अपने साथ ले गए थे, ताकि वाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल सबूत नष्ट हो सकें। पुलिस फिलहाल फोन की फॉरेंसिक जांच कर रही है। हत्या में इस्तेमाल हथियार को लेकर पति-पत्नी के बयानों में साफ विरोधाभास है। पति का दावा है कि हथियार बर्धमान से लाया गया, जबकि पत्नी कह रही है कि इसे दिल्ली से खरीदा गया। पुलिस इस विरोधाभास की जांच कर रही है।

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने अब तक 200 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं, जिनके आधार पर आरोपी तक पहुंचा गया। मामले की जांच जारी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दंपति ने अतीत में अन्य अपराध तो नहीं किए हैं।

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Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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