ड्रोन, यूएएस अब आसमान में बाज के पंजों की तरह, क्या बोले वायुसेना प्रमुख ए पी सिंह

Madan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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वायु सेना प्रमुख ने पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान हुई हालिया घटना का जिक्र करते हुए कहा कि हमने देखा है कि क्या होता है... अगर आपके पास उक्त क्षेत्र की जानकारी नहीं है, तो आपको पता नहीं होता कि आपके लोग कहां हैं और दूसरे कहां हैं।

ड्रोन, यूएएस अब आसमान में बाज के पंजों की तरह, क्या बोले वायुसेना प्रमुख ए पी सिंह

भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने शुक्रवार को कहा कि ड्रोन और अन्य मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) से हवाई ताकत बढ़ी है और अब ये केवल आकाश में निगरानी करने वाले उपकरण ही नहीं हैं, बल्कि 'आसमान में बाज के पंजों' की तरह हैं। वायुसेना अध्यक्ष ने मानवरहित हवाई प्रणालियों और यूएएस रोधी प्रणालियों पर एक रक्षा संगोष्ठी को संबोधित करते हुए रेखांकित किया कि किसी भी आधुनिक हवाई खतरे से निपटने के लिए उस क्षेत्र की पूरी जानकारी अति महत्वपूर्ण है, और एक ही हवाई क्षेत्र में काम करने वाली तीनों सेवाओं के बीच 'पूर्ण समन्वय' होना चाहिए।

वायु सेना प्रमुख ने पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान हुई हालिया घटना का जिक्र करते हुए कहा, ''हमने देखा है कि क्या होता है... अगर आपके पास उक्त क्षेत्र की जानकारी नहीं है, तो आपको पता नहीं होता कि आपके लोग कहां हैं और दूसरे कहां हैं। हमने देखा है कि कुवैत में एफ-15 विमानों के साथ क्या हुआ। आपसी संघर्ष। इसलिए हम ऐसी घटनाओं को सह नहीं कर सकते।'' अमेरिका की मध्य कमान ने दो मार्च को एक बयान में कहा था कि एक मार्च को कुवैत के ऊपर तीन अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल विमान कथित तौर पर गलती से मित्र राष्ट्र की ओर से की गई गोलेबारी की वजह से दुर्घटनाग्रस्त हो गए।

यह संगोष्ठी थिंक-टैंक सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज (सीएपीएसएस) और इंडियन मिलिट्री रिव्यू (आईएमआर) प्रकाशन द्वारा संयुक्त रूप से भारतीय वायु सेना के सुब्रतो पार्क में आयोजित की जा रही है। वायु सेनाध्यक्ष ने कहा कि ड्रोन, मानवरहित हवाई प्रणालियां (यूएएस) और यूएएस रोधी प्रणालियां आज के समय में बेहद प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि यह एक वास्तविकता है, यह भविष्य की बात नहीं है।

उन्होंने कहा, ''इसलिए, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि युद्धक्षेत्र बदल गया है। हम पूरी तरह से केंद्रित हवाई शक्ति से हटकर एक प्रकार के विकेंद्रीकृत और स्वायत्त तरीके की ओर बढ़ रहे हैं।'' वायु सेना प्रमुख ने रेखांकित किया कि यूएएस ''वायु शक्ति का विस्तार'' है। उन्होंने कहा, ''इसलिए, यूएएस प्रणालियों का उपयोग करते समय हवाई शक्ति के सभी नियम लागू होंगे, बस इसे याद रखें। और, वे अब आसमान में आंखें नहीं रहे, बल्कि आसमान में बाज के पंजों की तरह हैं। यह हमने हाल के संघर्षों में देखा है। हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इसे महसूस किया था, और इस पहलू को भुलाया नहीं जा सकता।''

वायुसेना प्रमुख ने कहा, ''और, जब बात यूएएस रोधी प्रणाली की आती है, तो यह चूहे-बिल्ली के खेल जैसा है। आप एक क्षेत्र में तकनीक विकसित करते हैं, तो उसके साथ-साथ प्रतिरोधी तकनीक भी विकसित होनी चाहिए। क्योंकि खेल इसी तरह खेला जा सकता है, अन्यथा एक पक्ष को पूर्ण लाभ होगा।''उन्होंने कहा, ''हमेशा बल बनाम बल की लड़ाई नहीं हो सकती। यह बल बनाम रक्षा और अन्य का मुकाबला होना चाहिए।'' वायुसेना के शीर्ष अधिकारी ने पिछले वर्ष मई में भारत द्वारा की गई निर्णायक सैन्य कार्रवाई, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना की अहम भूमिका को भी याद किया।

उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि हमने ऑपरेशन सिंदूर में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। ऐसा इसलिए संभव हुआ क्योंकि इसमें समन्वय था। समन्वय के बिना, केंद्रीय एजेंसी के समन्वय के बिना, और एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली (आईएसीसीएस) के एक तंत्रिका केंद्र के रूप में काम किए बिना, चाहे वह यूएएस रोधी कार्रवाई हो, हथियार या विमान रोधी कार्रवाई हो, यह संभव नहीं होता।'' एयर चीफ मार्शल ने कहा, ''हम सफल रहे... उनका कोई भी हथियार लक्ष्य पर नहीं गिरा। उनकी कोई भी यूएएस प्रणाली लक्ष्य को भेद नहीं सकी, क्योंकि हम उसी तरह से काम कर रहे थे जो सही तरीका है।''

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ पिछले साल लगभग चार दिनों तक चले सैन्य संघर्ष के दौरान दुश्मन ने कई चरणों में ड्रोन हमले करने की कोशिश की, जिसका भारतीय सेना ने प्रभावी ढंग से मुकाबला किया। सिंह ने एकीकृत हवाई रक्षा प्रणाली के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसी संरचनाएं स्थापित की गई हैं ताकि ''हर बार, हम उस तरीके से उनका मुकाबला करने में सक्षम हों''। वायुसेना प्रमुख ने युद्धक्षेत्र में ड्रोन के इस्तेमाल से लागत विषमता को लेकर हो रही चर्चा पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि हमें यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि ''लागत उस हथियार प्रणाली की नहीं है जो हमला करने आ रही है, बल्कि उस प्रणाली की लागत है जिस पर वह हमला करने वाली है''।

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लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
परिचय, अनुभव एवं शिक्षा
वर्तमान में मदन हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। कुल एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।

यूपी-बिहार की पॉलिटिक्स से लेकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक खबरों को कवर करने का लंबा अनुभव है। पॉलिटिकल न्यूज में ज्यादा रुचि है और पिछले एक दशक में देशभर में हुए विभिन्न विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों को भी कवर किया है। लाइव हिन्दुस्तान के लिए मदन देश-विदेश में रोजाना घटित होने वाली खबरों के साथ-साथ पॉलिटिकल खबरों का एनालिसिस, विभिन्न अहम विषयों पर एक्सप्लेनर, ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज आदि कवर करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से लेकर मिडिल ईस्ट में असली वॉर तक की इंटरनेशनल खबरों पर लिखते-पढ़ते रहते हैं। पिछले एक दशक में पत्रकारिता क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

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मदन ने लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर, मंथली अवॉर्ड्स, पॉपुलर च्वॉइस, एचटी स्टार अवॉर्ड्स समेत एक दर्जन से ज्यादा पुरस्कार जीते हैं।

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