भारत की आंतरिक सुरक्षा करेगा 'प्रज्ञा'! गृह मंत्रालय को मिला AI से लैस सैटेलाइट सिस्टम
DRDO ने देश की आंतरिक और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करते हुए गृह मंत्रालय को AI आधारित 'प्रज्ञा' (Prajna) सैटेलाइट सिस्टम सौंपा है। इसके साथ ही, भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी एयर ड्रॉपेबल कंटेनर ADC-150 का भी सफल परीक्षण किया गया है।

भारत की आंतरिक और समुद्री सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने दो अहम उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके तहत गृह मंत्रालय को एक आधुनिक सैटेलाइट सिस्टम सौंपा गया है, जबकि भारतीय नौसेना के लिए एक खास एयर ड्रॉपेबल कंटेनर का सफल परीक्षण किया गया है।
गृह मंत्रालय को मिला 'प्रज्ञा' सैटेलाइट इमेजिंग सिस्टम
देश की आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक चुस्त और आधुनिक बनाने के लिए गृह मंत्रालय (MHA) को 'प्रज्ञा' (Prajna) नामक स्वदेशी सैटेलाइट इमेजिंग सिस्टम सौंपा गया है। सोमवार को गृह मंत्रालय के 'कर्तव्य भवन-3' में आयोजित एक समारोह के दौरान DRDO के सचिव समीर वी. कामत ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को यह सिस्टम सौंपा।
किसने बनाया है और क्या फीचर्स हैं?
इस अत्याधुनिक सिस्टम को DRDO की प्रयोगशाला सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (CAIR) द्वारा पूरी तरह से भारत में विकसित किया गया है। इसकी खासियत की बात करें तो यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित है। यह सुरक्षा एजेंसियों को रीयल-टाइम (तत्काल) निर्णय लेने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करेगा। देश के संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी करने और आतंकवाद विरोधी अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में यह सिस्टम गेम-चेंजर साबित होगा।
भारतीय नौसेना के लिए 'ADC-150' का सफल परीक्षण
आंतरिक सुरक्षा के साथ-साथ समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और राहत कार्यों को तेज करने के लिए DRDO और भारतीय नौसेना ने संयुक्त रूप से स्वदेशी एयर ड्रॉपेबल कंटेनर 'ADC-150' के चार सफल इन-फ्लाइट परीक्षण किए हैं। यह परीक्षण 21 फरवरी से 1 मार्च के बीच गोवा के तट पर विभिन्न कठिन परिस्थितियों में भारतीय नौसेना के P8I विमान से किया गया।
क्षमता और उद्देश्य:
यह कंटेनर 150 किलोग्राम तक का पेलोड (सामान/राहत सामग्री) हवा से गिराने (एयर-ड्रॉप) में सक्षम है। इसका मुख्य उद्देश्य तट से दूर गहरे समुद्र में संकट में फँसे नौसैनिक जहाजों तक त्वरित प्रतिक्रिया के तहत तत्काल चिकित्सा सहायता, जरूरी उपकरण या राशन पहुंचाना है। इस प्रोजेक्ट को कम समय में पूरा करने के लिए कई संस्थानों ने मिलकर काम किया:
नोडल लैब: नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला (NSTL), विशाखापत्तनम।
पैराशूट सिस्टम का निर्माण: एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADRDE), आगरा।
उड़ान मंजूरी और प्रमाणन: सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थिनेस एंड सर्टिफिकेशन (CEMILAC), बेंगलुरु।
उपकरण/इंस्ट्रूमेंटेशन सपोर्ट: रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL), हैदराबाद।
वर्तमान स्थिति: इसके सभी विकासात्मक उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं और उम्मीद है कि इसे जल्द ही भारतीय नौसेना के बेड़े में आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया जाएगा।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भारत की प्रमुख रक्षा शोध एजेंसी है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की सैन्य शक्ति को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना और रक्षा उपकरणों के मामले में भारत को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाना है। 'प्रज्ञा' और 'ADC-150' इसी आत्मनिर्भरता के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
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लेखक के बारे में
Amit Kumarडिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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