
'शाहीन ने कभी बुर्का नहीं पहना', मुजम्मिल से मिलते ही बदल गई सोच? आतंक की आरोपी पर खुलासे
एनआईए ने जांच संभाल ली है। यह साजिश 26/11 जैसी सीरीज हमलों की योजना का हिस्सा बताई जा रही है। शाहीन की कहानी साबित करती है कि आतंक अब पढ़े-लिखों के बीच भी घुसपैठ कर रहा है।
दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए भयानक कार बम धमाके ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। 13 लोगों की मौत और दो दर्जन से अधिक घायलों के बीच यह विस्फोट न सिर्फ एक आतंकी हमला था, बल्कि एक 'वाइट-कॉलर' आतंकी मॉड्यूल की साजिश का हिस्सा साबित हुआ। इस मॉड्यूल के केंद्र में थी एक पढ़ी-लिखी महिला डॉक्टर। इसका नाम डॉ. शाहीन सईद है। हमले के बाद लखनऊ के डालीगंज इलाके की एक संकरी गली में स्थित सैयद अहमद अंसारी का घर अचानक सुर्खियों में आ गया है। वजह- उनकी बेटी, डॉ. शाहीन सईद की गिरफ्तारी। दिल्ली से करीब 550 किलोमीटर दूर हुई इस गिरफ्तारी ने इलाके में हलचल मचा दी है। आरोप है कि डॉ. सईद का पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की महिला विंग से संबंध है और वह भारत में उसके महिला भर्ती मॉड्यूल को सक्रिय करने की कोशिश कर रही थी।
2,900 किलो विस्फोटक बरामद, साथी डॉक्टर भी गिरफ्तार
एनआईए और एटीएस की जांच के अनुसार, डॉ. सईद को तब गिरफ्तार किया गया जब फरीदाबाद के दो किराए के कमरों से 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। ये कमरे अल-फलाह यूनिवर्सिटी के एक अन्य डॉक्टर, डॉ. मुजम्मिल गनई उर्फ मुसैब, के नाम पर किराए पर लिए गए थे। बताया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला डॉ. गनई जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का हिस्सा था।
सूत्रों के मुताबिक, डॉ. शाहीन सईद की फरीदाबाद में रजिस्टर्ड मारुति स्विफ्ट कार से एक असॉल्ट राइफल, पिस्तौल और गोला-बारूद भी बरामद हुआ। जांच एजेंसियों का दावा है कि डॉ. सईद को पाकिस्तान में जैश प्रमुख मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर द्वारा संचालित महिला इकाई जमात-उल-मोमिनात की भारत शाखा की जिम्मेदारी दी गई थी।
परिवार को नहीं हो रहा यकीन
लखनऊ में उसके घर पर पहुंचे पुलिस और एटीएस अधिकारियों ने परिवार से पूछताछ की। डॉ. सईद के बड़े भाई मो. शोएब अंसारी ने कहा कि पुलिस ने सम्मानपूर्वक व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सामान्य तरीके से पूछताछ की। कोई जोर-जबरदस्ती नहीं हुई। सिर्फ यह पूछा कि मेरी बहन कब से घर नहीं आई थी।
शोएब ने बताया कि पिछले चार साल से उनका अपनी बहन से कोई संपर्क नहीं था। उन्होंने कहा कि हम चार साल से बात नहीं कर रहे हैं। मां-पिता कभी-कभी उसका हाल पूछ लेते थे, लेकिन हमारा आपसी संपर्क खत्म हो गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी अपनी बहन के लखनऊ स्थित घर को नहीं देखा। शोएब ने कहा कि मुझे बस इतना पता है कि वह आईआईएम रोड के पास रहती थी। कभी वहां गया नहीं।
पिता बोले- मेरी बेटी ऐसा नहीं कर सकती
डॉ. सईद के पिता सैयद अहमद अंसारी ने कहा- मुझे यकीन नहीं होता कि मेरी बेटी किसी आतंकी गतिविधि में शामिल हो सकती है। वह इलाहाबाद में पढ़ी, फिर फरीदाबाद में नौकरी की। उन्होंने बताया कि डॉ. सईद की शादी महाराष्ट्र के एक डॉक्टर से हुई थी, लेकिन बाद में तलाक हो गया।
पूर्व पति ने भी जताई हैरानी
करीब 90 किलोमीटर दूर कानपुर में क्राइम ब्रांच ने डॉ. शाहीन सईद के पूर्व पति डॉ. जफर हयात से पूछताछ की। डॉ. हयात ने बताया कि उन्हें शाहीन की गिरफ्तारी की खबर मंगलवार शाम को मिली। उन्होंने कहा कि हमारी शादी 2003 में हुई थी और 2012 में तलाक हो गया। हमारे बीच कभी झगड़ा नहीं हुआ। वह हमेशा परिवार और बच्चों से बहुत प्यार करती थी। मुझे कभी शक नहीं हुआ कि वह ऐसी किसी गतिविधि में शामिल हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि शाहीन ने कभी बुर्का नहीं पहना था, सिवाय शादी के समय के। उन्होंने कहा कि वह पढ़ी-लिखी, आत्मनिर्भर महिला थी। एक बार उसने ऑस्ट्रेलिया या यूरोप में बसने की बात कही थी, लेकिन मैंने मना कर दिया। हमें यहां सब कुछ अच्छा चल रहा था।
शिक्षण संस्थान से गायब, फिर बर्खास्त
जांच में सामने आया है कि 2013 में डॉ. सईद बिना सूचना दिए कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से गायब हो गई थी, जिसके बाद 2021 में उसे औपचारिक रूप से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
फरीदाबाद पहुंचते ही शाहीन की जिंदगी में आया डॉ. मुजम्मिल गनाई उर्फ मुसाइब। कश्मीर के पुलवामा जिले के रहना वाला मुजम्मिल भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी में फैकल्टी सदस्य था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों के बीच निजी रिश्ता था, जो आतंकी गतिविधियों का केंद्र बना। अल-फलाह यूनिवर्सिटी में नौकरी के दौरान ही उसकी मुलाकात डॉ. मुजम्मिल के अलावा, अन्य दो डॉक्टरों से हुई, जिन्हें अब विस्फोटक बरामदगी मामले में गिरफ्तार किया गया है।
जैश के पुनर्गठन से जुड़ा बताया जा रहा मॉड्यूल
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह मॉड्यूल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद जैश-ए-मोहम्मद के पुनर्गठन की कोशिश का हिस्सा है। इस ऑपरेशन के दौरान मसूद अजहर की बहन सादिया का पति यूसुफ अजहर समेत जैश के कई शीर्ष सदस्य मारे गए थे। पाकिस्तान के बहावलपुर में अक्टूबर में जैश ने औपचारिक रूप से अपनी महिला इकाई जमात-उल-मोमिनात की घोषणा की थी, जिसके बाद पाकिस्तान के कई शहरों- बहावलपुर, कराची, मुजफ्फराबाद, कोटली, हरीपुर और मंसेहरा में भर्ती की खबरें सामने आईं। जांच एजेंसियां कह रही हैं कि डॉ. सईद भारत में उसी मॉडल को दोहराने की कोशिश कर रही थी।





