
डोनाल्ड ट्रंप और नोबेल विजेता मचाडो एक बीच है एक समानता, जानिए किस बात पर मिलते हैं दोनों के सुर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी। ट्रंप ने लगातार यह दावा किया था कि उन्होंने वैश्विक स्तर पर 7 बड़े जंग रुकवाए जिसके लिए उन्हें यह पुरस्कार दिया जाना चाहिए। हालांकि ट्रंप को निराशा हाथ लगी है।
2025 के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के विजेता का ऐलान शुक्रवार को कर दिया गया है। वेनेजुएला की विपक्ष की नेता और इंजीनियर मारिया कोरिना को इस साल इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इस बार यह पुरस्कार एक अन्य वजह से भी चर्चा में था, और वह है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बार-बार इस पुरस्कार के लिए खुद की दावेदारी पेश करना। ट्रंप कई बार कह चुके थे कि 7 वैश्विक युद्धों को रुकवाने के लिए उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाना चाहिए। ऐसे में वेनेजुएला की नेता को नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा से डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। इन सब के बीच आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि डोनाल्ड ट्रंप और मारिया के बीच एक समानता भी है।

गौरतलब है कि माचाडो को लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला लिया गया है। मचाडो को वेनेज़ुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के उनके अथक प्रयासों के लिए जाना जाता है। अब आपके मन में यह सवाल उठ रहे होंगे कि उनमें और ट्रंप दोनों में आखिर समान क्या है? दरअसल दोनों ही वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के मुखर विरोधी रहे हैं।
मारिया मचाडो की बात की जाए तो पिछले एक साल में मादुरो की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी मचाडो को अपनी जान बचाने के लिए छिपने के लिए मजबूर होना पड़ा था और विरोध प्रदर्शनों के दौरान उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में भी रखा गया। वहीं मारिया ने देश में हुए चुनावों का विरोध करते हुए राष्ट्रपति मादुरो पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था और मादुरो को तीसरी बार मिली जीत का पुरजोर विरोध किया था।
वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बात की जाए तो मादुरो के लिए उनकी नाराजगी जगजाहिर है। ट्रंप की टीम मादुरो को एक नाजायज नेता तक कह चुकी है और उन्होंने मादुरो की जगह मचाडो को लाने का समर्थन भी किया था। जानकारी के मुताबिक ट्रंप के कुछ शीर्ष सहयोगियों, जिनमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन रैटक्लिफ, उनके मुख्य आंतरिक सुरक्षा नीति सलाहकार, स्टीफन मिलर ने कथित तौर पर मादुरो को सत्ता से हटाने के लिए एक सैन्य अभियान पर भी विचार कर रहे हैं।
मचाडो की भूमिका क्यों अहम?
बता दें कि मचाडो को कभी उनके ही सहयोगियों ने दरकिनार कर दिया था। तब उन्होंने वेनेजुएला के विभाजित विपक्ष को एकजुट किया है और बड़े पैमाने पर सरकारी सुधारों के वादों के साथ व्यापक जन समर्थन हासिल किया। यहां तक कि पूर्व आलोचक भी मानते हैं कि मादुरो के गुरु और देश की 25 साल पुरानी समाजवादी परियोजना के निर्माता ह्यूगो शावेज़ के बाद से मचाडो का आंदोलन वेनेजुएला में सबसे महत्वपूर्ण है। इससे पहले मचाडो ने 2002 में राजनीति में प्रवेश किया था और मतदाता अधिकार समूह सुमाते की सह-स्थापना की। इसके बाद जल्द ही उन्हें अमेरिका में भी पसंद किया जाने लगा।



