स्कूलों के नाम में न लगाएं ग्लोबल या इंटरनेशनल, इस राज्य में सरकार ने बना दिया नियम

Dec 20, 2025 10:14 pm ISTDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, मुंबई
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महाराष्ट्र सरकार ने पात्रता के बिना स्कूलों के इंटरनेशनल या ग्लोबल शब्दों के प्रयोग पर रोक लगा दी है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र में स्कूल अब अपने नाम में ‘अंतर्राष्ट्रीय’ या ‘वैश्विक’ जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं कर सकेंगे।

स्कूलों के नाम में न लगाएं ग्लोबल या इंटरनेशनल, इस राज्य में सरकार ने बना दिया नियम

महाराष्ट्र सरकार ने पात्रता के बिना स्कूलों के इंटरनेशनल या ग्लोबल शब्दों के प्रयोग पर रोक लगा दी है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र में स्कूल अब अपने नाम में ‘अंतर्राष्ट्रीय’ या ‘वैश्विक’ जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं कर सकेंगे। जब तक कि वे विदेशों में परिसर का होना अथवा अंतर्राष्ट्रीय पाठ्यक्रम प्रदान करना जैसे कुछ विशिष्ट पात्रता मानदंडों को पूरा न करें । इस निर्णय का उद्देश्य अभिभावकों के बीच भ्रम को रोकना और शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

महाराष्ट्र सरकार ने भ्रामक या गुमराह करने वाले नामों को रोकने के लिए स्कूलों के नामों की समीक्षा का निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बताया कि यह कदम तब उठाया गया, जब यह देखा गया कि कई विद्यालय निर्धारित मानदंडों को पूरा किए बिना अपने नामों में ‘इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय)’, ‘ग्लोबल (वैश्विक)’ और यहां तक ​​कि ‘सीबीएसई’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने 15 दिसंबर को इस संबंध में एक परिपत्र जारी किया। इस परिपत्र में कहा गया है कि विद्यालयों के नामों में व्यापक भिन्नता है तथा राज्य बोर्ड, आईसीएसई और सीबीएसई से संबद्ध कुछ स्कूल ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो अभिभावकों, विद्यार्थियों और आम जनता के बीच भ्रम पैदा कर सकते हैं।

अधिकारी ने कहाकि इस तरह के नामों वाले वर्तमान विद्यालयों की भी समीक्षा की जाएगी। जब तक विद्यालय की दो या दो से अधिक देशों में शाखाएं न हों, वे खुद को ग्लोबल नहीं कह सकते। इसके अलावा, कैम्ब्रिज इंटरनेशनल एजुकेशन या इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (आईबी) से संबद्ध न होने वाले विद्यालय को इंटरनेशनल शब्द का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

परिपत्र में कहा गया है कि भविष्य में स्कूलों की मान्यता के लिए नए प्रस्तावों की जांच करते समय स्कूल के नाम, उसके बोर्ड से संबद्धता और माध्यम के साथ-साथ यह भी देखा जाना चाहिए कि संबंधित संस्था राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य स्कूलों का संचालन करती है या नहीं। इसमें कहा गया है कि यदि कोई नाम भ्रामक पाया जाता है, तो प्रस्ताव को राज्य प्रशासन को भेजने से पहले स्कूलों को इसे बदलने के लिए कहा जाएगा।

Deepak Mishra

लेखक के बारे में

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दीपक मिश्र मीडिया इंडस्ट्री में करीब 17 साल का अनुभव रखते हैं। खेल, सिनेमा और राजनीति पर प्रमुखता से काम किया है। खासतौर पर खेल की खबरों से जुनून की हद तक मोहब्बत है। 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप और 2014 में फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप प्रमुखता से कवर कर चुके हैं। फोटोग्राफी और मोबाइल वीडियो स्टोरी के साथ-साथ पॉडकास्ट में विशेष रुचि रखते हैं। दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट के साथ काम करते हुए कई वीडियो स्टोरीज पर काम किया। इसी दौरान आईपीएल पर पॉडकास्ट के साथ एक अन्य पॉडकास्ट ‘शहर का किस्सा’ भी कर चुके हैं। पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद आज अखबार के साथ पत्रकारिता की शुरुआत हुई। इसके बाद दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट और पत्रिका अखबार में काम किया है। आई नेक्स्ट की डिजिटल विंग में काम करते हुए कई नए और रोचक प्रयोग किए। लाइव हिन्दुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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