हमारे धैर्य की परीक्षा न लें... मंदिर और दरगाह विवाद में क्यों भड़क गए मीलॉर्ड? संसद से SC तक मामला गरम
जस्टिस जयचंद्रन ने कहा कि हम कुछ हद तक ही बर्दाश्त कर सकते हैं। अगर हद पार हुई, तो हम कड़ा एक्शन लेंगे। आप जानते हैं कि उन्होंने हद पार कर दी है। वे उकसाते नहीं रह सकते। ऐसी टिप्पणी नहीं कर सकते।
तमिलनाडु के तिरुपरमकुंद्रम में एक दरगाह के निकट स्थित सुब्रमणिय स्वामी मंदिर में ‘कार्तिगई दीपम’ से जुड़ा मुद्दा सुर्खियों में आ गया है। राज्य सरकार जहां मद्रास हाई कोर्ट के दीप जलाने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची है, और सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई के लिए अपनी सहमति दी है, वहीं गुरुवार को यह मामला संसद में भी उठा, जब द्रमुक के वरिष्ठ नेता टी आर बालू ने हाई कोर्ट के जज के खिलाफ टिप्पणी की। बालू ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान यह विषय उठाया और भारतीय जनता पार्टी का नाम लिए बिना आरोप लगाया कि एक दल द्वारा सांप्रदायिक टकराव की स्थित पैदा की जा रही है।
उन्होंने इस मामले में फैसला देने वाले जज को एक संगठन से जोड़कर उनका उल्लेख भी किया। इस पर सदन में हंगाना शुरू हो गया। शुक्रवार को मद्रास हाई कोर्ट ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया और कहा कि वह न्यायपालिका के खिलाफ ऐसी टिप्पणी बर्दाश्त नहीं करेगा। जस्टिस जी जयचंद्रन और जस्टिस केके रामकृष्णन की बेंच ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि जज खुलकर रिएक्ट नहीं कर सकते, लोगों को कोर्ट को नहीं उकसाना चाहिए। पीठ ने कहा कि अगर लिमिट पार हुई तो सख्त एक्शन लिया जाएगा।
हम कुछ हद तक ही बर्दाश्त कर सकते
जस्टिस जयचंद्रन ने कहा, “हम कुछ हद तक ही बर्दाश्त कर सकते हैं। अगर हद पार हुई, तो हम कड़ा एक्शन लेंगे। आप जानते हैं कि उन्होंने हद पार कर दी है। वे उकसाते नहीं रह सकते। ऐसी टिप्पणी नहीं कर सकते। सिर्फ इसलिए कि कोर्ट और जजों को रिएक्ट नहीं करना चाहिए, वे इसका फायदा नहीं उठा सकते।” पीठ ने ये बातें सिंगल जज के उस आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए कही, जिसमें अरुलमिगु सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के मैनेजमेंट को 3 दिसंबर को शाम 6 बजे ‘कार्तिगई दीपम' का दीया जलाने को कहा गया था। कोर्ट ने सिंगल जज के आदेश के खिलाफ सभी अपीलों पर 12 दिसंबर (शुक्रवार) को सुनवाई करने का फैसला किया है।
हमारे धैर्य का इम्तिहान न लें
आज (शुक्रवार, 5 दिसंबर) जब इन अपीलों पर सुनवाई हुई, तो एडवोकेट एमआर वेंकटेश (रिट पिटीशन का प्रतिनिधित्व कर रहे) ने बेंच को बताया कि सिंगल जज (जस्टिस जीआर स्वामीनाथन) पर जाति के आधार पर पर्सनल अटैक किए जा रहे हैं। यह सुनकर जस्टिस जयचंद्रन ने कहा, "हमारे धैर्य का इम्तिहान न लें।" उन्होंने आगे कहा कि लोगों को याद रखना चाहिए कि वे कोर्ट के सब्र का टेस्ट न लें और ज्यूडिशियरी को नीचा दिखाने की कोशिश ना करें।
ज्यूडिशियरी को नीचा न दिखाएं
कोर्ट ने कहा, "कानून तोड़ने वाले लोग सोचते हैं कि कोई रिएक्शन नहीं होगा। कृपया अपने क्लाइंट्स को बताएं कि वे कोर्ट के सब्र का टेस्ट न लें और ज्यूडिशियरी को नीचा न दिखाएं।" कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि यह सभी के लिए आखिरी रास्ता है और चाहे कोई भी व्यक्ति हो, अगर वे ज्यूडिशियरी इंस्टीट्यूशन का हौसला गिराते रहेंगे, तो एक्शन लिया जाएगा।
क्या है मामला?
बता दें कि मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने बृहस्पतिवार को मदुरै जिला कलेक्टर और शहर के पुलिस आयुक्त द्वारा दायर एक अंतर-न्यायालयी अपील खारिज कर दी और एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें श्रद्धालुओं को दीपथून में ‘कार्तिगई दीपम’ दीप जलाने की अनुमति दी गई थी। एक दिसंबर को जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन की एकल पीठ ने कहा था कि अरुलमिघु सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर, उचि पिल्लैयार मंडपम के पास परंपरागत प्रकाश स्तंभ के अलावा, दीपथून पर भी दीप प्रज्वलित करने के लिए बाध्य है।
न्यायालय ने कहा था कि ऐसा करने से निकटवर्ती दरगाह या मुस्लिम समुदाय के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे। जब आदेश का क्रियान्वयन नहीं हुआ तो एकल न्यायाधीश ने तीन दिसंबर को एक और आदेश पारित कर श्रद्धालुओं को स्वयं दीप जलाने की अनुमति दे दी तथा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके बाद राज्य सरकार को शीर्ष न्यायालय का रुख करना पड़ा।

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




