
हमेशा 99% वाला साइक्लोस्टाइल जवाब नहीं चलेगा… ECI के वकील को CJI सूर्यकांत ने क्यों हड़काया?
याचिकाकर्ता 'सनातन संसद' ने राज्य में एसआईआर के कामकाज की अवधि के दौरान बीएलओ के लिए केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती की मांग की है और याचिका में घर-घर सत्यापन करने वाले बीएलओ पर कथित हमलों का हवाला दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और उसके बाद मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन तक बूथ स्तर अधिकारियों (BLOs) के लिए सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज़ (CAPF) की तैनाती की मांग वाली याचिका पर चुनाव आयोग और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मंगलवार (9 दिसंबर) को यह आदेश तब दिया, जब ECI ने कहा कि जब तक वह लोकल पुलिस को अपने अंडर में नहीं ले लेता, तब तक हालात में सुधार नहीं हो सकता।
इस पर CJI कांत ने कहा, "हम कानून किसी के हाथ में नहीं लेने दे सकते।" इससे पहले सुनवाई के दौरान पीठ इस बात को लेकर चिंतित दिखी कि सनातनी संसद की याचिका में राज्य में पहले हुई हिंसा के मामलों को भी हाईलाइट किया गया था। CJI कांत ने कहा, "सभी पॉलिटिशियन वगैरह यहां इसलिए आ रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह प्लेटफॉर्म उन्हें हाईलाइट कर रहा है.. इसे पेंडिंग पिटीशन के साथ टैग करें।"
BLOs को प्रोटेक्शन की दरकार
हालांकि, याचिकाकर्ता की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट वीवी गिरी ने कहा कि बूथ-लेवल ऑफिसर्स के लिए कुछ प्रोटेक्शन की ज़रूरत है। इस पर, जस्टिस बागची ने बताया कि ऐसे मामलों पर रिकॉर्ड में सिर्फ़ एक केस है। उन्होंने कहा, "रिकॉर्ड में सिर्फ़ एक FIR है। और कुछ नहीं। बाकी सब हिस्टोरिकल रेफरेंस है।"
याचिका में क्या मांग?
दरअसल, याचिकाकर्ता 'सनातन संसद' ने राज्य में एसआईआर के कामकाज की अवधि के दौरान बीएलओ के लिए केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती की मांग की है और याचिका में घर-घर सत्यापन करने वाले बीएलओ पर कथित हमलों का हवाला दिया है। उन्होंने अदालत से कहा कि पश्चिम बंगाल में बीएलओ को एसआईआर ड्यूटी करते समय हिंसा का सामना करना पड़ रहा है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती आवश्यक है।
इस पर जस्टिस बागची ने कहा इस दलील के समर्थन में महज एक प्राथमिकी का हवाला दिया गया है और बाकी पेश की गयी सामग्री अपर्याप्त और अनुमान के आधार पर है। आयोग ने अपने जवाब में कहा कि कानून-व्यवस्था पुलिस का विषय है और वह उनसे सहयोग की अपेक्षा करता है लेकिन अगर पुलिस पर भरोसा नहीं कर सकते हैं, तो केंद्रीय बलों को लेना होगा। आयोग ने पहले ही राज्य को एक कड़ा पत्र लिख कर बीएलओ और चुनावी अधिकारियों के सुरक्षित कामकाज के लिए कहा है।
अखबारों की खबरों के आधार पर निर्देश नहीं दे सकते
पीठ ने बार-बार जोर दिया कि अखबारों की खबरों और राजनीतिक बयानों के आधार पर निर्देश जारी नहीं किए जा सकते। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “अगर बीएलओ को धमकाया जा रहा है, तो यह एक गंभीर मुद्दा है। अगर चुनाव आयोग हमारे पास आया होता, तो हम इस पर विचार करते लेकिन हम अलग-थलग मामलों पर कार्रवाई नहीं कर सकते।”
99% साइक्लोस्टाइल वाला जवाब क्यों देते हैं?
बार एंड बेंच के मुताबिक, इसी बीच, एक अन्य वकील ने पीठ से कहा कि तमिलनाडु के पहाड़ी आदिवासी इलाकों में बहुत सारे वोटर हैं और SIR की कट ऑफ परसों है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य में 57 लाख लोगों ने अभी तक अपने फॉर्म नहीं जमा किए हैं। वकील ने कहा कि उन इलाकों में जाने में खतरा है। इस पर CJI ने कहा, "अगर पहाड़ी इलाके हैं, और आप नहीं जा सकते तो राज्य से कहें कि वे सुरक्षा बल दें।" तभी चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी बीच में बोलने लगे। उन्होंने कहा, "लेकिन 99 प्लस परसेंट फॉर्म तो मिल गए हैं और अपलोड हो गए हैं।" इस पर CJI ने बिदकते हुए कहा, "आप हमेशा 99 परसेंट के साथ साइक्लोस्टाइल वाला जवाब क्यों देते हैं। इससे कोई मदद नहीं मिलती। प्लीज़ एक नज़र डालें।"
आपको करना ही होगा... वरना
इसके बाद शीर्ष न्यायालय ने नोटिस जारी करते हुए, आयोग को न केवल पश्चिम बंगाल के संबंध में, बल्कि दूसरे राज्यों से मिल रहे सहयोग के स्तर के संबंध में भी अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। CJI सूर्यकांत ने कहा, "आइए हम आयोग से सुनते हैं। हमें केवल पश्चिम बंगाल के बारे में ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से सहयोग, या उसकी कमी के बारे में भी बताएं।" हालांकि, CJI कांत ने कहा कि कोर्ट सुनना चाहेगा कि ECI और केंद्र सरकार का क्या कहना है। CJI कांत ने आदेश दिया, “हम नोटिस जारी करेंगे और देखेंगे कि ECI का क्या कहना है। अटॉर्नी जनरल के ज़रिए ECI और भारत संघ को नोटिस जारी करें।” इसके बाद ECI के वकील ने कहा, "हमारे पास अधिकार हैं और हम कार्रवाई करेंगे।" इस पर, CJI कांत ने कहा, "हां, आपको करना ही होगा... वरना अराजकता हो जाएगी।"





