
पत्रकारों से कैसे पेश आएं? जब मंच से ही उप राष्ट्रपति केंद्रीय मंत्री को पढ़ाने लगे 'इमोशन' वाला पाठ
संक्षेप: मनोरमा न्यूज न्यूज़मेकर अवार्ड 2024 समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपराष्ट्रपति ने सिनेमा और राजनीति की अनूठी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला और दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्ट सफलता के लिए सुरेश गोपी की प्रशंसा की।
उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री और केरल से लोकसभा के एकमात्र भाजपा सांसद सुरेश गोपी को सलाह दी है कि पत्रकारों के साथ भावुकता के साथ पेश आएं। दरअसल, रविवार को राजधानी में आयोजित एक समारोह में केंद्रीय मंत्री गोपी को 'न्यूजमेकर ऑफ द ईयर' का पुरस्कार दिया गया। उस समारोह में उपराष्ट्रपति मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल थे। उन्होंने ही अपने हाथों से अभिनेता से नेता बने केंद्रीय मंत्री गोपी को यह सम्मान दिया।

इस मौके पर अपने संबोधन में उप राष्ट्रपति राधाकृष्णन ने गोपी सुरेश कोभाई जैसा दोस्त और मार्गदर्शक बताया। इसके साथ ही उन्होंने मंच से सार्वजनिक तौर पर मंत्री गोपी को सार्वजनिक जीवन में शांत रहने की सलाह दी। मीडिया से बात करते समय गोपी के भावुक हो जाने का स्पष्ट रूप से ज़िक्र करते हुए, राधाकृष्णन ने कहा, "जब लोग सवाल पूछें, तो भावुक न हों। अगर आप जवाब देना चाहते हैं, तो दें। वरना, चले जाएँ।" बता दें कि कई मौकों पर सुरेश गोपी और पत्रकारों के बीच तीखी नोकझोक की खबरें आती रही हैं। उनके और पत्रकारों के बीच खट्टे-मीठे अनुभव रहे हैं।
राज्यमंत्री की तारीफ भी
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित कॉलम 'डेल्ही कॉन्फिडेंशियल' के मुताबिक, जब उप राष्ट्रपति केंद्रीय मंत्री को ये सलाह दे रहे थे, तब गोपी मुस्कुराते हुए सिर हिला रहे थे। मनोरमा न्यूज न्यूज़मेकर अवार्ड 2024 समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपराष्ट्रपति ने सिनेमा और राजनीति की अनूठी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला और दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्ट सफलता के लिए सुरेश गोपी की प्रशंसा की। उपराष्ट्रपति ने कॉलेज के पूर्व छात्र सुरेश गोपी के निमंत्रण पर हाल ही में कोल्लम स्थित फातिमा माता कॉलेज की अपनी यात्रा को भी याद किया। उन्होंने कहा कि यह भाव मंत्री जी के अपनी जड़ों से अटूट जुड़ाव को दर्शाता है।
मीडिया की भूमिका पर जोर
उन्होंने युवाओं को प्रेरित करने के लिए देश में सकारात्मक विकास को उजागर करने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और बेज़ुबानों को आवाज़ देने में पत्रकारिता की ज़िम्मेदारी की भी वकालत की। उन्होंने जागरूकता फैलाकर और ज़िम्मेदार सार्वजनिक संवाद को आकार देकर नशामुक्त समाज बनाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक के इस युग में, सच और फर्जी खबरों में अंतर करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रेस और मीडिया को हमारे लोकतंत्र में एक बहुत ही ज़िम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने तमिल कवि तिरुवल्लुवर के अमर शब्दों को याद किया, "यदि कोई व्यक्ति शुद्ध हृदय से सत्य बोलता है, तो वह उन लोगों से भी ऊँचा होता है जो आजीवन तपस्या करते हैं या अरबों का दान करते हैं। उन्होंने प्रेस से तिरुवल्लुवर के शाश्वत ज्ञान के शब्दों का अनुसरण करने का आग्रह किया।"





