कांग्रेस के संकटमोचक शिवकुमार, कई ऑपरेशन लोटस कर चुके फेल; गुजरात तक दिखाया है दम

लाइव हिन्दुस्तान, बेंगलुरु
Follow us on Google News
share

डीके शिवकुमार कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। वह न सिर्फ सोनिया गांधी के भरोसेमंद माने जाते हैं, बल्कि कई मौकों पर कांग्रेस को संकट से उबारा है। इसी वजह से उन्हें पार्टी का संकटमोचक भी कहा जाता है। वह कर्नाटक से गुजरात तक अपना दम दिखा चुके हैं।

कांग्रेस के संकटमोचक शिवकुमार, कई ऑपरेशन लोटस कर चुके फेल; गुजरात तक दिखाया है दम

राजनीतिक गलियारों में अक्सर यह चर्चा होती है कि जो रणनीतिक और 'फ्लोर मैनेजमेंट' की भूमिका भाजपा के लिए अमित शाह निभाते हैं, कांग्रेस के लिए वही काम डीके शिवकुमार करते हैं। डीके शिवकुमार अब केवल कर्नाटक तक सीमित नेता नहीं रह गए हैं, बल्कि वे कांग्रेस के 'पैन-इंडिया ट्रबलशूटर' (संकटमोचक) बन चुके हैं। देश के किसी भी हिस्से में जब भी 'ऑपरेशन लोटस' (विधायकों की खरीद-फरोख्त या तोड़फोड़) की आहट हुई, कांग्रेस आलाकमान की सबसे पहली कॉल डीके शिवकुमार को ही गई। उन्होंने गुजरात, हिमाचल प्रदेश समेत कई जगह ऑपरेशन लोटस फेल किया है। 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' और माइक्रो-मैनेजमेंट के उस्ताद शिवकुमार ने कई बार कांग्रेस की डूबती नाव को किनारे लगाया है। अब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार के लिए कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। सिद्धारमैया के आधिकारिक आवास पर हुई एक अहम 'ब्रेकफास्ट मीटिंग' में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया और सिद्धारमैया ने औपचारिक रूप से शिवकुमार को कमान सौंपने की बात कही। डीके शिवकुमार का यह सफर रातों-रात तय नहीं हुआ है। आइए समझते हैं कि कैसे एक छात्र नेता के तौर पर शुरुआत करने वाले डीके शिवकुमार, कांग्रेस पार्टी के सबसे बड़े 'ट्रबलशूटर' और सोनिया गांधी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार बने।

2017 गुजरात राज्यसभा चुनाव

डीके शिवकुमार ने कई मौकों पर रिजॉर्ट पॉलिटिक्स के जरिए कांग्रेस को संकट से उबारा है और कांग्रेसी विधायकों को टूटने से बचाया। साल 2017 का सबसे मशहूर वाक्या तब का है, जब कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता अहमद पटेल गुजरात से राज्यसभा चुनाव लड़ रहे थे। पटेल पांचवीं बार राज्यसभा जाने के लिए चुनावी मैदान में थे। कुल तीन सीटों के लिए चुनाव था, जिसमें पहली दो सीटों पर अमित शाह और स्मृति ईरानी की जीत तय थी। राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के तत्कालीन दिग्गज नेता शंकरसिंह वाघेला ने पार्टी छोड़ दी और छह विधायकों ने इस्तीफा दिया व भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद, बाकी बचे 44 विधायकों को बचाने की तैयारी शुरू हुई। तब डीके शिवकुमार काम आए और बेंगलुरु के ईगलटन रिजॉर्ट में विधायकों को शिफ्ट किया गया। इसकी जिम्मेदारी शिवकुमार को मिली। वहां उन्होंने खुद डेरा डाला और विधायकों के मोबाइल फोन तक जमा करवा लिए, ताकि बाहरी दुनिया से संपर्क न हो। इस बीच, उनके ठिकानों पर आईटी की रेड भी हुई, लेकिन वह पीछे नहीं हटे और रिजॉर्ट में ही डटे रहे। इसके बाद वोटिंग वाले दिन कांग्रेस के सभी विधायक कड़ी सुरक्षा में गुजरात वापस आए। कई घंटों के हाई ड्रामे के बाद आखिरकार अहमद पटेल की जीत हुई। इसका बड़ा क्रेडिट शिवकुमार की रणनीति को भी गया।

2019 में कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिरने से बचाई

शिवकुमार ने एक बार फिर से साल जनवरी 2019 में अपनी रणनीति दिखाते हुए जेडीएस-कांग्रेस की सरकार को गिरने से बचाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कांग्रेस के विधायकों को मुंबई ले जाकर कर्नाटक की सरकार गिराना चाहती है। इसके बाद वह खुद मुंबई गए और विधायकों को वापस लाने की कोशिश की। होटल के बाहर काफी लंबी बहस हुई। हालांकि, वह कुछ महीनों के लिए ही सरकार बचा सके और फिर जुलाई में तत्कालीन कांग्रेस सरकार गिर गई।

महाराष्ट्र से झारखंड तक की पार्टी की मदद

इसके अलावा, महाराष्ट्र, हरियाणा जैसे राज्यों में भी वह विधायकों को एकजुट करने और ऑपरेशन लोटस को फेल करने में अहम भूमिका निभाई। जब 2019 महाराष्ट्र चुनाव में कांग्रेस अपने विधायकों को टूट से बचाने के लिए राजस्थान शिफ्ट किया, तब डीके शिवकुमार ने अहम रोल निभाया। उन्होंने रिजॉर्ट पॉलिटिक्स करते हुए कई दिनों तक विधायकों को महाराष्ट्र से दूर रखा। बाद में कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना का गठबंधन बना और उद्धव ठाकरे सीएम बनाए गए। वहीं, हरियाणा में भी साल 2024-26 के बीच राज्यसभा चुनाव और अन्य मामलों में भी शिवकुमार ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने जेएमएम और कांग्रेस सरकार के विधायकों से लगातार संपर्क बनाए रखा और एकजुट रखा।

हिमाचल संकट में फिर संकटमोचक बने शिवकुमार

फरवरी, 2024 की बात है, जब डीके शिवकुमार ने एक बार फिर से कांग्रेस में संकटमोचक की भूमिका निभाई और कांग्रेस की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की मदद की। दरअसल, इसकी शुरुआत राज्यसभा चुनाव से हुई। दरअसल, कांग्रेस सरकार के पास 40 विधायक थे, लेकिन छह विधायकों ने भाजपा को वोट दे दिया। इसकी वजह से अभिषेक मनु सिंघवी चुनाव हार गए और सुक्खू सरकार के गिरने की नौबत आ गई। इस पर कांग्रेस हाईकमांड ने एक बार फिर से डीके शिवकुमार पर भरोसा जताया और भूपिंदर सिंह हुड्डा के साथ हिमाचल प्रदेश भेज दिया। उन्होंने प्रतिभा सिंह और विक्रमादित्य सिंह समेत तमाम नेताओं से बात की और नाराजगी को दूर करने के लिए कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन करवाया। भाजपा लगातार फ्लोर टेस्ट करवाने की मांग कर रही थी। इस बीच, बजट पास करवाने के लिए विधानसभा स्पीकर ने छह बाकी कांग्रेसी विधायकों के साथ भाजपा के 15 विधायकों को निलंबित कर दिया, जिससे सदन में कुल संख्या घट गई और बजट पास हो गया। डीके शिवकुमार के तुरंत ऐक्शन लेने की वजह से कांग्रेस की सुक्खू सरकार बच गई और विक्रमादित्य सिंह जैसे नेताओं की नाराजगी भी दूर हुई।

इस खबर पर आपकी क्या राय है?

Madan Tiwari

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
परिचय, अनुभव एवं शिक्षा
वर्तमान में मदन हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। कुल एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।

यूपी-बिहार की पॉलिटिक्स से लेकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक खबरों को कवर करने का लंबा अनुभव है। पॉलिटिकल न्यूज में ज्यादा रुचि है और पिछले एक दशक में देशभर में हुए विभिन्न विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों को भी कवर किया है। लाइव हिन्दुस्तान के लिए मदन देश-विदेश में रोजाना घटित होने वाली खबरों के साथ-साथ पॉलिटिकल खबरों का एनालिसिस, विभिन्न अहम विषयों पर एक्सप्लेनर, ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज आदि कवर करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से लेकर मिडिल ईस्ट में असली वॉर तक की इंटरनेशनल खबरों पर लिखते-पढ़ते रहते हैं। पिछले एक दशक में पत्रकारिता क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

मीडिया में अवॉर्ड्स.
मदन ने लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर, मंथली अवॉर्ड्स, पॉपुलर च्वॉइस, एचटी स्टार अवॉर्ड्स समेत एक दर्जन से ज्यादा पुरस्कार जीते हैं।

विशेषज्ञता
देश-विदेश की राजनीति पर गहरी पकड़
यूपी-बिहार समेत सभी राज्यों की खबरों को कवर करने का व्यापक अनुभव
विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव, संसद की कार्यवाही को लंबे समय से कवर किया
ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज, एनालिसिस स्टोरीज, एशिया, मिडिल ईस्ट, पश्चिमी देशों की खबरों को कवर करने का एक दशक से ज्यादा का एक्सपीरियंस

और पढ़ें