जिल बाइडेन को हीरे देने तक ही रह गई कूटनीति, असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी पर कसा तंज
- असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा है कि अब उनकी कूटनीति सिर्फ जो बाइडेन की पत्नी को महंगे हीरे गिफ्ट करने तक रह गई है। वहीं चीन हमारी जमीन पर कब्जा कर रहा है।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने चीन नीति को लेकर केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत NDA सरकार पर मंगलवार को निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या पूर्वी लद्दाख के गलवान में गश्त के अधिकार को ‘बहाल’ करने की कोई योजना है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की कूटनीति केवल जिल बाइडेन को महंगे हीरे गिफ्ट करने तक रह गई है।
उन्होंने दावा किया कि दो काउंटी के गठन को लेकर चीन के समक्ष भारत सरकार का हालिया विरोध तथा ब्रह्मपुत्र पर नये बांध पर ‘पुनर्विचार करने के अनुरोध’ का असर पड़ोसी देश पर नहीं होगा। ओवैसी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में कहा, ‘क्या हमारे पास गलवान, हॉट स्प्रिंग, गोगरा, पैंगोंग और कैलाश रेंज में अपने सैनिकों के लिए गश्त के अधिकार बहाल कराने की कोई योजना है? क्या हमने पूर्वी लद्दाख में अप्रैल 2020 की यथास्थिति बहाल करने की उम्मीद पूरी तरह छोड़ दी है।’
उन्होंने आरोप लगाया कि न केवल भारत की आंतरिक सुरक्षा पूरी तरह से कुप्रबंधन का शिकार है, विशेष रूप से मणिपुर और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में, बल्कि समान रूप से चिंताजनक बात यह भी है कि ‘भारत की बाह्य सुरक्षा का भी कुप्रबंधन हो रहा है’, जहां सशस्त्र बलों के राजनीतिकरण के निरंतर प्रयासों से स्थिति और खराब होने की आशंका है।
हैदराबाद से लोकसभा सदस्य ओवैसी ने आरोप लगाया कि (प्रधानमंत्री नरेन्द्र)मोदी सरकार संसद में इन गंभीर मुद्दों पर बहस की अनुमति नहीं देती। भारत ने तीन जनवरी को कहा कि उसने होतान प्रांत में दो नए काउंटी के गठन को लेकर चीन के समक्ष ‘‘कड़ा विरोध’’ दर्ज कराया है और इस बात पर जोर दिया है कि इस तरह के कदम क्षेत्र में पड़ोसी देश के ‘अवैध और जबरन’ कब्जे को वैधता प्रदान नहीं करेंगे।
एआईएमआईएम अध्यक्ष ने कहा कि देश की कूटनीति ‘‘मोदी द्वारा श्रीमती जिल बाइडन को महंगे हीरे उपहार में देने’’ तक सीमित हो गई है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अमेरिका की प्रथम महिला जिल बाइडन को भेंट किया गया 20,000 अमेरिकी डॉलर का हीरा 2023 में किसी भी विश्व नेता द्वारा बाइडन परिवार को दिया गया सबसे महंगा उपहार है।
इस खबर पर आपकी क्या राय है?
लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
और पढ़ें

