
SIR की लड़ाई अमर्त्य सेन पर आई, अभिषेक बनर्जी के दावे पर EC को क्यों देनी पड़ी सफाई
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि एसआईआर का विरोध करने पर चुनाव आयोग ने अमर्त्य सेन को सुनवाई के लिए बुलाया है। लेकिन कुछ ही देर बाद अभिषेक बनर्जी के इस दावे पर चुनाव आयोग की सफाई आ गई।
बंगाल में मंगलवार को गजब की गलतफहमी फैली। इस गलतफहमी की जड़ में रहे एसआईआर और मशहूर अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन। असल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि एसआईआर का विरोध करने पर चुनाव आयोग ने अमर्त्य सेन को सुनवाई के लिए बुलाया है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को दावा किया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को एसआईआर संबंधी सुनवाई से जुड़ा नोटिस भेजा गया है। हालांकि, सेन के परिवार के एक सदस्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उन्हें निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ी सुनवाई के संबंध में अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है। कुछ ही देर बाद अभिषेक बनर्जी के इस दावे पर चुनाव आयोग की सफाई आ गई। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि अमर्त्य सेन को सुनवाई के लिए नहीं बुलाया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इस गलतफहमी की जड़ में स्पेलिंग मिस्टेक थी।
रैली में किया दावा
अभिषेक बनर्जी अमर्त्य सेन के गृह जिले बीरभूम में एक रैली को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने दावा किया कि एसआईआर को लेकर अमर्त्य सेन को चुनाव आयोग ने सुनवाई के लिए बुलाया है। एनडीटीवी ने भरोसेमंद सूत्रों के हवाले से कहा है कि नोबल विजेता के बोलपुर स्थित आवास पर फिलहाल कोई नोटिस नहीं पहुंची है। अभिषेक ने बीरभूम जिले के रामपुरहाट में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार बंगाल की जनता का जानबूझकर बार-बार अपमान कर रही है और अब उसने एसआईआर की कवायद के नाम पर राज्य को निशाना बनाने के लिए निर्वाचन आयोग के साथ सांठगांठ कर ली है।
क्या बोला चुनाव आयोग
उन्होंने कहा कि यहां आते समय मुझे बताया गया कि वैश्विक स्तर पर हमारे देश का कद बढ़ाने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर अमर्त्य सेन को एसआईआर संबंधी सुनवाई से जुड़ा नोटिस भेजा गया है। अभिनेता देव और क्रिकेटर मोहम्मद शमी जैसे कई प्रतिष्ठित लोगों को भी नोटिस भेजे गए हैं, जो क्रिकेट विश्व कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा थे। अभिषेक के इस दावे पर चुनाव आयोग ने तत्काल मामले को स्पष्ट किया। सूत्रों के मुताबिक मिसमैच के चलते कंप्यूटर जनरेटेड नोटिस अमर्त्य सेन के पास पहुंच गई।
आयोग ने संबंधित बीएलओ से स्पेलिंग की गलती सुधारने के लिए कहा है। वहीं, इस बीच, सेन के परिवार के एक सदस्य ने बताया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री का गणना फॉर्म विधिवत भरा और जमा किया गया था। उक्त सदस्य ने कहा कि सेन की मां का नाम भी 2002 की मतदाता सूची में था और उन्होंने (सेन ने) पहले संपन्न एक चुनाव में अपना वोट भी डाला था। हम जिले के निर्वाचन अधिकारियों से इस संबंध में पता करेंगे।
तृणमूल नेता ने पात्र मतदाताओं को भरोसा दिलाया कि उनके नाम मतदाता सूची से नहीं हटाए जाएंगे। अभिषेक ने उन मतदाताओं को फॉर्म भरने और अपने नाम दोबारा शामिल करवाने की सलाह दी, जिनके नाम मसौदा मतदाता सूची से गलत तरीके से हटा दिए गए हैं।





