मोदी के साथ ही बने रहें, क्यों बड़े नेता का नाम ले मंच से बोले धर्मेंद्र प्रधान; क्या मिला जवाब
हाल के घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि BJD पार्टी, INDIA गठबंधन के करीब आ रही है। हालांकि, BJD हमेशा यही कहती आई है कि वह बीजेपी और कांग्रेस, दोनों से ही बराबर दूरी बनाकर रखती है। BJD के बदलते रुख का बड़ा सबूत हाल ही में हुए राज्य सभा चुनावों में दिखा, जब उसने कांग्रेस से हाथ मिला लिया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बीजू जनता दल के प्रमुख नवीन पटनायक से एक अपील की है, जिसके कारण राजनीतिक बहस छिड़ गई है। दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान प्रधान ने अपील कर दी थी कि पटनायक लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बने रहें। करीब एक सप्ताह पहले दिया गया केंद्रीय मंत्री की यह बयान राज्य में बदलते राजनीतिक समीकरणों के संकेतों के बीच आया है।
हाल ही में संबलपुर लोकसभा क्षेत्र में एक कार्यक्रम में प्रधान संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर बोल रहे थे और उन्होंने केंद्र से अलग रुख अपनाने के लिए बीजद की आलोचना की थी। प्रधान ने कहा, 'नवीन बाबू अच्छे इंसान हैं। हालांकि, महिला आरक्षण के मुद्दे पर उनका रुख बदलता रहता है। हम प्रसन्न भाई से नवीन बाबू से मिलने और उन्हें मोदी के साथ बने रहने के लिए समझाने का अनुरोध करेंगे। हम मिलकर महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान करेंगे।'
बीजद का रिप्लाई
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के उपनेता प्रसन्न आचार्य ने कहा, 'नेता अक्सर अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार बयान देते हैं। यह भी देखा गया है कि उनके बयान जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। प्रधान ने ऐसा बयान अपनी पार्टी के हित को ध्यान में रखते हुए दिया।'
हालांकि, आचार्य ने स्पष्ट किया कि बीजद क्षेत्रीय पार्टी है और भाजपा की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और INDIA दोनों से समान दूरी बनाए रखती है। उन्होंने कहा, 'हम एक स्वतंत्र क्षेत्रीय पार्टी हैं जो ओडिशा के हितों की रक्षा के लिए समर्पित है।'
क्या कांग्रेस या INDIA के करीब जा रही है बीजद
हाल के घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि BJD पार्टी, INDIA गठबंधन के करीब आ रही है। हालांकि, BJD हमेशा यही कहती आई है कि वह बीजेपी और कांग्रेस, दोनों से ही बराबर दूरी बनाकर रखती है।
BJD के बदलते तौर तरीकों का सबसे बड़ा सबूत हाल ही में हुए राज्य सभा चुनावों में दिखा, जब उसने कांग्रेस से हाथ मिला लिया। चौथी सीट के लिए किसी भी पार्टी के पास पूरा बहुमत नहीं था। इसलिए, BJD और कांग्रेस ने मिलकर एक डॉक्टर दत्तेश्वर होता का साथ दिया। वे बीजेपी के समर्थन वाले निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के खिलाफ लड़ रहे थे। आखिर में राय चुनाव जीत गए क्योंकि BJD और कांग्रेस के 11 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी।
पटनायक भी कर रहे संसद में विरोध
फिलहाल, बीजद के पास संसद में कोई सदस्य नहीं है, लेकिन पटनायक ने खुलकर 131वें संविधान संशोधन बिल का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने ओडिशा के सांसदों को पत्र लिखकर इस बिल का विरोध करने की अपील की थी। साथ ही मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से भी अपील की थी कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए।
इसके अलावा उन्होंने नीट यूजी परीक्षा के कैंसिल होने के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को घेरा था। वहीं, बीजद ने कई जिलों में प्रदर्शन भी किए थे।
पहले देती रही है भाजपा का साथ
खास बात है कि बीजद को भाजपा का भरोसेमंद माना जाता था। एनडीए से अलग होते हुए भी पार्टी सदन में भाजपा का समर्थन करती रही है। वहीं, पटनायक के पीएम मोदी समेत भाजपा के कई शीर्ष नेताओं से अच्छे संबंध रहे हैं। एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों से लेकर कई अहम फैसलों में बीजद ने खुलकर भाजपा का साथ दिया।
संसद में जब केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के पास जरूरी नंबर नहीं थे, तब बीजद ने ही उनके चुनाव में मदद की थी।
क्यों अहम है प्रधान का बयान
जानकारों का कहना है कि प्रधान ने यह बयान इसलिए दिए है, ताकि बीजद के साथ भाजपा के बातचीत के रास्ते खुले रहे। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अब राजनीति से दूर हो चुके एक वरिष्ठ नेता बताते हैं, 'भले ही BJD चुनाव हार गई हो और उसकी सरकार चली गई हो, लेकिन नवीन पटनायक आज भी ओडिशा में बहुत लोकप्रिय हैं। उनकी पार्टी का संगठन अब भी बहुत मजबूत है। विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद BJD को 40.22% वोट मिले, जो बीजेपी को मिले 40.07% वोटों से थोड़ा सा ज्यादा ही हैं। इसीलिए बीजेपी हमेशा यही चाहेगी कि नवीन बाबू उनसे खुश रहें।'
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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