धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा PM मोदी की सोची समझी रणनीति, जानें इनसाइड स्टोरी

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली।
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सरकार का यह कदम जंतर-मंतर जैसे प्रमुख स्थानों पर जारी विरोध-प्रदर्शनों को शांत करने और असंतुष्ट गुटों द्वारा भड़काए जा रहे भारत-विरोधी बयानों पर विराम लगाने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक प्रयास माना जा रहा है।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा PM मोदी की सोची समझी रणनीति, जानें इनसाइड स्टोरी
केंद्र सरकार ने स्वीकार किया धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। (फोटो- PTI)

Dharmendra Pradhan Resign: NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में भड़के छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो चुका है। आंदोलन की शुरुआत से ही छात्र इसकी मांग कर रहे थे। अपने फैसलों पर अडिग रहने के लिए मशहूर नरेंद्र मोदी सरकार को इस मामले पर बैकफुट पर जाना पड़ा। सूत्रों का कहना है कि केंद्र के इस कदम के पीछे एक सोची समझी रणनीति है। शीर्ष सरकारी सूत्रों से मिली विशेष जानकारी के अनुसार, सरकार का मुख्य उद्देश्य छात्रों के असंतोष और गुस्से को देश विरोधी या राजनीतिक ताकतों द्वारा भुनाए जाने से रोकना था।

सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार ने प्रमुख राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में हुईं अनियमितताओं को अपनी विफलता के रूप में स्वीकार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट मानना था कि प्रभावित छात्रों द्वारा उठाई गई चिंताएं और मांगें पूरी तरह से जायज थीं और इसी जवाबदेही को तय करने के लिए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किया गया।

प्रधान का भावुक बयान

अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने एक भावुक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि बीते 10 दिनों में हुए घटनाक्रमों ने उन्हें गहराई से दुखी किया है और यह मुद्दा उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने बयान में कहा, "मैं नहीं चाहता कि कोई भी देश-विरोधी ताकतें इस संवेदनशील स्थिति का फायदा उठाएं। देश की एकता अक्षुण्ण रहनी चाहिए और किसी भी मासूम छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में नहीं फंसना चाहिए। छात्र अपना बहुमूल्य समय पढ़ाई और अपना करियर बनाने में लगाएं। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री को सौंपा है।"

छात्रों को सॉफ्ट टारगेट बनने से रोकना था उद्देश्य

सीएनएन न्यूज-18 ने अपनी एक रिपोर्ट में एक शीर्ष सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा है कि, सरकार पहले दिन से ही इस बात को लेकर बेहद गंभीर थी कि आंदोलनकारी छात्रों का इस्तेमाल राजनीतिक मोहरे के रूप में न किया जाए। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, "सरकार यह बिल्कुल नहीं चाहती थी कि छात्र किसी के लिए सॉफ्ट टारगेट बनें। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग को पूरा करके सरकार का उद्देश्य यही था कि छात्र लंबे समय तक चलने वाले आंदोलनों को छोड़कर वापस अपनी पढ़ाई और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर सकें।"

सरकार का यह कदम जंतर-मंतर जैसे प्रमुख स्थानों पर जारी विरोध-प्रदर्शनों को शांत करने और असंतुष्ट गुटों द्वारा भड़काए जा रहे भारत-विरोधी बयानों पर विराम लगाने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक प्रयास माना जा रहा है।

परीक्षा प्रणाली में सुधारों पर फोकस

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ बने तात्कालिक राजनीतिक गतिरोध के समाप्त होने के बाद अब केंद्र सरकार का पूरा ध्यान परीक्षा प्रणाली में बड़े और संरचनात्मक सुधारों पर केंद्रित हो गया है। सरकार की भावी योजनाओं के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर की सभी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं को चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) फॉर्मेट में ट्रांसफर किया जाएगा ताकि पेपर लीक की गुंजाइश खत्म हो सके। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और अन्य संस्थागत प्रणालियों की निगरानी को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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