
असम विधानसभा में 'लग्जरी हिरासत केंद्र' क्यों बनवाना चाहते हैं, हिमंत सरकार के मंत्री? वजह बताई
असम की हिमंत बिस्वा सरकार में मंत्री बोरा ने विधानसभा में हिरासत केंद्र बनवाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि निलंबित किए गए विधायक सदन की कार्यवाही के बारे में अपने हिसाब से बयान देते हैं, उन्हें रोका जाना चाहिए।
असम की हिमंत बिस्वा सरकार के कैबिनेट मंत्री बिमल बोरा ने स्पीकर के सामने विधानसभा में एक हिरासत केंद्र बनाने का प्रस्ताव रखा है। बोरा ने दावा किया कि सदन की कार्यवाही से निलंबित किए गए विधायक पहले ही यहां से निकल जाते हैं, और फिर मीडिया के सामने अपने हिसाब से बयानबाजी करके एक नैरेटिव सेट करने की कोशिश करते हैं। गौरतलब है कि बोरा का यह बयान प्रश्नकाल के दौरान निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई को निलंबित किए जाने के तुरंत बाद आया।
बोरा ने अपनी बात रखते हुए विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी से कहा कि इस पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "निलंबित विधायकों को विधानसभा परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि वे सदन में हुईं गतिविधियों पर केवल अपना पक्ष रखते हैं। इसे रोकने के लिए शायद एक सभी सुविधाओं से युक्त हिरासत कक्ष बनाया जा सकता है।
आपको बता दें, निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई सदन में मुखरता के साथ सरकार का विरोध करते हैं। मंगलवार को गायक जुबिन गर्ग की मृत्यु पर स्थगन प्रस्ताव के दौरान भी उन्होंने सदन में स्पीकर के पास जाने की कोशिश की थी और गर्ग का पोस्टर दिखाया था। इसके बाद उन्हें कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया गया था।
नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधायक देबब्रत सैकिया ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष कार्यालयको किसी भी गलतफहमी से बचने के लिए निलंबन के कारणों को स्पष्ट करते हुए एक प्रेस बयान जारी करना चाहिए।
इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष दैमारी ने सभी सदस्यों से शिष्टाचार बनाए रखने और कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालन में सहयोग करने की अपील की थी।
गौरतलब है कि असम में इस समय गायक जुबिन गर्ग की मौत के बाद लगातार राजनीतिक तनाव बना हुआ है। मुख्यमंत्री इसे हत्या मानते हैं। ऐसे में पूरे राज्य में यह मुद्दा गर्म बना हुआ है। वहीं, दूसरी तरफ आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव भी सिर पर है, ऐसे में राज्य की राजनीति में तनाव बना हुआ है।





